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खेल

"कतर में नहीं हो सकता वर्ल्ड कप"

जर्मन फुटबॉल संघ डीएफबी के पूर्व अध्यक्ष थेओ स्वानसिगर का कहना है कि 2022 का फुटबॉल वर्ल्ड कप शायद कतर में ना हो. स्वानसिगर फीफा की प्रबंधक कमेटी के सदस्य हैं.

स्वानसिगर ने तेज गर्मी को इसका कारण बताया है. जर्मन खेल पत्रिका स्पोर्ट बिल्ड प्लुस को दिए एक इंटरव्यू में उन्होंने कहा, "मुझे लगता है कि आखिरकार यही होगा कि कतर से 2022 के खेलों का अधिकार छीन लिया जाएगा. डॉक्टरों का कहना है कि अगर इतनी गर्मी में वर्ल्ड कप करवाया जाता है, तो वे उसकी जिम्मेदारी नहीं लेंगे और मैं पहले से ही इस बात पर जोर दे रहा हूं."

पहले ही खेलों को गर्मी की जगह सर्दी के महीनों में करवाए जाने का सुझाव दिया जा चुका है. लेकिन आयोजक इससे सहमत नहीं हैं. उनका कहना है कि अगर खेलों को जून जुलाई से हटा कर देर से किया जाता है, तो यूरोप में होने वाले लीग मैचों पर भी असर पड़ेगा.

वहीं कतर का कहना है कि वह इस तरह के स्टेडियम बना चुका है जिनमें तापमान को नियंत्रित रखा जा सकता है, लेकिन स्वानसिगर इससे आश्वस्त नजर नहीं आ रहे. उनका मानना है कि जब कतर में दिन का तापमान चालीस डिग्री को पार कर जाएगा, तो खिलाड़ियों के लिए बहुत सी तकलीफें पैदा हो जाएंगी. इसके अलावा उन्हें दर्शकों की भी चिंता सता रही है. इंटरव्यू में उन्होंने कहा, "वर्ल्ड कप केवल स्टेडियम में ही नहीं खेला जाता, पूरी दुनिया से दर्शक वहां पहुंचेंगे और उन्हें गर्मी से जूझना होगा."

Theo Zwanziger DFB Präsident Porträt

थेओ स्वानसिगर

फीफा ने बनाई दूरी

उन्होंने तो यहां तक कह दिया कि तेज तापमान से लोगों की जान पर भी जोखिम हो सकता है, "किसी की जान पर बन आने का पहला ही मामला जांच के घेरे में आ जाएगा और मुझे नहीं लगता कि फीफा की प्रबंधन कमेटी में कोई भी इसकी जिम्मेदारी लेना चाहेगा." जब समाचार एजेंसी रॉयटर्स ने फीफा से इस बारे में जानना चाहा तो एक प्रवक्ता ने कहा, "मिस्टर स्वानसिगर खुद ही कह चुके हैं कि ये उनके निजी विचार हैं."

वहीं एक अन्य इंटरव्यू में कतर 2022 की प्रबंधन कमेटी के हसन अल थवाडी ने कहा कि उन्हें पूरा यकीन है कि वर्ल्ड कप कतर में ही होगा. उन्होंने कहा, "लोग जब इस इलाके के बारे में बात करते हैं, तो वे विवादों के बारे में सोचते हैं. वर्ल्ड कप लोगों को एक करने में मददगार साबित होगा. इसका सकारात्मक असर होगा."

2010 में कतर की मेजबानी की घोषणा की गयी. तब से यह फैसला विवादों में घिरा हुआ है. पहले भ्रष्टाचार के मामलों में कतर का नाम सुर्खियों में रहा और बाद में प्रवासी कारगरों की बुरी परिस्थितियों को ले कर भी बहस छिड़ी रही.

आईबी/एएम (एएफपी, डीपीए, रॉयटर्स)


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