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दुनिया

कतर खरीदेगा अरबों के जर्मन हथियार

खाड़ी देश कतर जर्मनी से आधुनिक टैंक और तोप खरीद रहा है. विपक्षी पार्टियों ने कतर के साथ हथियारों के कारोबार की आलोचना की है. राजनीतिशास्त्रियों का आरोप है कि वहां लोकतंत्र नहीं है.

हथियार बनाने वाली कंपनी क्राउस मफाई वेगमन (केएमडब्ल्यू) ने कतर के साथ 1.9 अरब यूरो का सौदा किया है. इस सौदे पर पांच साल की बातचीत के बाद म्यूनिख की कंपनी ने पिछले हफ्ते बताया कि खाड़ी के अमीरात के साथ 62 लियोपार्ड-2 टैंक और 24 बख्तरबंद गाड़ियां बेचने का सौदा हुआ है. केएमडब्ल्यू के अनुसार कतर के पास इस समय फ्रांस और दक्षिण अफ्रीका में बने पुराने टैंक और तोपखाने हैं. अब वह उन्हें नष्ट कर 8,500 जवानों वाली अपनी सेना को जर्मन हथियारों से लैस करना चाहता है.

लेकिन कतर को दुनिया के सबसे आधुनिक टैंकों की क्या जरूरत है? एजेंसी रिपोर्टों के अनुसार कतर ईरान के साथ विवाद के लिए तैयार होना चाहता है. खाड़ी विशेषज्ञ प्रो. वेर्नर रूफ इसे संभव मानते हैं. "निश्चय ही यह एक कारण है कि कतर खाड़ी की ऐसी ताकतों में शामिल है जो ईरान से खतरा देखते हैं और इस खतरे से निबटने के लिए तैयार रहना चाहते हैं."

Prof. Dr. Werner Ruf

प्रो. वेर्नर रूफ

हथियारों की वजह

हथियारों की बड़े पैमाने पर खरीद बिक्री में रिश्वतखोरी की भी भूमिका होती है. प्रो. वेर्नर रूफ का कहना है कि ऐसे सौदों में धन की भूमिका को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए, "हथियारों के सौदे ऐसे कारोबार हैं जिनमें सबसे ज्यादा रिश्वत दी जाती है. यह हथियारों का ऑर्डर देने का फैसला लेने वाले के लिए अच्छी सी ऊपरी आमदनी होती है."

बर्लिन के राजनीतिशास्त्री हमदी अल आउनी का तो मानना है कि कतर अपने लिए वे हथियार खरीद ही नहीं रहा है, बल्कि उनसे विदेशों के साथी गुटों की मदद करना चाहता है. "इस संभावना से इंकार नहीं किया जा सकता कि इन हथियारों को कहीं न कहीं भेज दिया जाएगा, मैं समझता हूं कि तुर्की से होकर सीरिया में. शायद लेबनान को भी."

Hamadi El-Aouni

हमदी अल आउनी

अल आउनी इस दलील को नहीं मानते कि कतर इन हथियारों की मदद से ईरान से अपनी सुरक्षा करना चाहता है. वे कहते हैं, "खाड़ी में दो देश हैं जहां अमेरिकी अड्डे हैं, बहरीन में नौसैनिक अड्डा और कतर में हवाई अड्डा. ये अमेरिका के सबसे बड़े सैनिक अड्डों में शामिल हैं." अल आउनी का कहना है कि ईरान के साथ विवाद की स्थिति में कतर को अमेरिका की सुरक्षा मिलेगी.

आजादी और विपक्ष

जर्मनी की विपक्षी पार्टियां कतर को हथियार बेचे जाने का कड़ा विरोध कर रही हैं. उनका कहना है कि इस देश में निरंकुश शासन है, वहां मानवाधिकारों का पालन नहीं होता. एसपीडी, ग्रीन और वामपंथी डी लिंके के इस आकलन से प्रो. वेर्नर रूफ और हमदी अल आउनी भी सहमत हैं. प्रो.रूफ कहते हैं कि हालांकि अरब टेलिविजन चैनल अल जजीरा कतर में है, जो पहले कभी निष्पक्ष रिपोर्टिंग का समर्थन करता था, लेकिन इस बीच उसकी रिपोर्ट मुख्य रूप से प्रोपेगैंडा रिपोर्ट होती है. हमदी अल आउनी का कहना है कि कतर में विपक्ष को अनुमति नहीं है. "कुछेक अपवादों को छोड़कर बोलने की आजादी नहीं है. अमीर और उनका कुनबे की आलोचना नहीं हो सकती."

हालांकि कतर ने अरब क्रांति के दौरान विद्रोहियों का साथ दिया है, लेकिन ऐसा आजाद खयालों की वजह से नहीं हुआ है. अल आउनी का कहना है कि ऐसा अपने हितों पर अमल के लिए किया गया है. "कतर ने नौजवानों के विद्रोह का समर्थन इसलिए नहीं किया कि ट्यूनीशिया, लीबिया या मिस्र में लोकतंत्र आए." कतर को उम्मीद थी कि क्रांति से इस्लामी राज्य और समुदाय पैदा होंगे. इसका मतलब यह है कि कतर ने लोकतंत्र के लबादे में गैरलोकतांत्रिक सत्ता की भूमिका निभाई है.

Katar Doha Skyline

दोहा की गगनचुंबी इमारतें

प्रो. वेर्नर रूफ के अनुसार यह रवैया विदेशनीति में भी दिखता है. पड़ोसी बहरीन के लोकतांत्रिक आंदोलन में उसका रवैया देखने लायक था. "अल जजीरा पर अरब विद्रोह का गुणगान किया जा रहा था, और बहरीन में टैंक भेजा जा रहा था. सउदी नेतृत्व में इन हथियारों की मदद से बहरीन के आंदोलन को खून में डूबो दिया गया."

पश्चिम ने निगाहें घुमाई

खाड़ी विशेषज्ञ वेर्नर रूफ का मानना है कि पश्चिमी देशों द्वारा कतर की स्थिति की आलोचना न किया जाना सामरिक कारणों से प्रेरित है. "मैं समझता हूं कि इन सबके पीछे वहां अंतरराष्ट्रीय संरचना का पुनर्गठन है, जहां अमेरिका वह नहीं कर सकता जो वह चाहता है. वे अपनी सैनिक ताकत प्रशांत में ले जा रहे हैं और खाड़ी में नई क्षेत्रीय सत्ता खड़ी कर रहे हैं."

Emir von Katar

कतर के अमीर

खाड़ी में यह नई सत्ता सउदी अरब और कतर के नेतृत्व में खाड़ी सहयोग परिषद है. वे अपनी सत्ता के आधार को मजबूत बनाने के लिए अरब देशों में व्यापक इस्लामीकरण की कोशिश कर रहे हैं. "ये मिस्र में देखा जा सकता है, ट्यूनिशिया में भी, जहां भारी धन से इस्लामी संगठनों की मदद की जा रही है, जहां इस धन की मदद से सीरिया और माली के विवादों के लिए हजारों लड़ाकों की भर्ती हो रही है." रूफ का कहना है कि इसमें मानवाधिकारों और लोकतंत्र की कोई भूमिका नहीं है.

जर्मनी का भी यहां रवैया ईमानदारी वाला नहीं है. रूफ कहते हैं कि जब माली में इस्लामी लड़ाकों ने हमला किया तो सबने उसकी आलोचना की. "लेकिन इन सबके स्रोत कतर और सबसे बढ़कर सउदी अरब में, जहां हर रोज मानवाधिकारों का व्यवस्थित रूप से हनन हो रहा है, वहां पश्चिमी देश कन्नी काट जाते हैं." रूफ जर्मन विदेश मंत्री गीडो वेस्टरवेले के एक बयान को खाड़ी देशों में निरंकुश शासन को वैधता देने वाला मानते हैं, जिन्होंने कहा कि था सउदी अरब इलाके में स्थिरता का लंगर है और इसमें कतर भी शामिल है.

रिपोर्टः गुंटर बिर्केनश्टॉक/एमजे

संपादनः निखिल रंजन

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