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विज्ञान

कतर के पास दिखावे से मुक्ति का मौका

कतर में आज से विश्व जलवायु सम्मेलन शुरू हो रहा है. कतर पर्यावरण को नुकसान पहुंचाने के लिए खासा बदनाम है. तो क्या सम्मेलन की वजह से कतर के रुख में कुछ बदलाव आएगा.

"कतर साइकिल सवारों की राजधानी बनना चाहता है." विश्व जलवायु सम्मेलन 2012 के मेजबान कतर ने राजधानी दोहा में जगह जगह ऐसे बैनर लगाए हैं. जर्मन इंस्टीट्यूट फॉर इंटरनेशनल एंड सिक्योरिटी अफेयर्स के मध्यपूर्व विशेषज्ञ गीडो श्टाइनबेर्ग इस कोशिश को सिर्फ दिखावा कहते हैं, "पर्यावरण सुरक्षा कतर की राजनीति में कोई विषय ही नहीं है."

लेबनान में क्लाइमेट एक्शन नेटवर्क के निदेशक वाएल हमदान भी श्टाइनबेर्ग से सहमत हैं. वह कहते हैं कि विश्व जलवायु सम्मेलन के मेजबानी से ठीक पहले तक कतर की राजनीति में इस पर कभी बात नहीं हुई. जलवायु सम्मेलन हर साल किसी दूसरे देश में होता है. मेजबान देश का चुनाव पांच ग्रुपों के बीच से किया जाता है. मेजबानी अफ्रीका, एशिया प्रशांत, पूर्वी यूरोप, पश्चिमी यूरोप और लैटिन अमेरिका के किसी देश को दी जाती है.

पिछले साल दक्षिण अफ्रीकी शहर डरबन में यह सम्मेलन हुआ. इस बार एशिया की बारी थी. कतर ने दक्षिण कोरिया को पीछे छोड़ मेजबानी पाई.

एसी बनाम पर्यावरण

वैसे पर्यावरण की बात करें तो कतर के पास मेजबानी पाने का ठोस कारण नहीं था. प्रतिव्यक्ति कार्बन डायोक्साइड के उत्सर्जन के लिहाज से कतर दुनिया के शीर्ष देशों में हैं. गर्मियों में यहां तापमान 50 डिग्री तक चला जाता है और खूब एयर कंडीशनर चलते हैं.

हमदान को इतने एसी और फ्रिज पसंद नहीं. वह कहते हैं, "यह देश बहुत जल्दी, बहुत अमीर हो गया." यहां सार्वजनिक परिवहन तो नहीं ही है, पर्यावरण के प्रति जागरुकता की भी कमी है. देश में ऐसे एनजीओ बहुत कम हैं जो पर्यावरण संबंधी मुद्दों पर सरकार पर दबाव बना सकें.

विश्व बैंक के अध्ययन के मुताबिक प्रति व्यक्ति आय के मामले में कतर दुनिया का तीसरा अमीर देश है. इससे ऊपर सिर्फ लक्जमबर्ग और नॉर्वे हैं. 2011 में कतर की अर्थव्यवस्था 19 फीसदी आगे बढ़ी. देश की समृद्धि की बड़ी वजह तेल और गैस का आयात है.

कम भरोसेमंद

गीडो श्टाइनबेर्ग कतर को मेजबानी दिये जाने से बिल्कुल खुश नहीं है. मायूस होने वाले वह अकेले व्यक्ति नहीं हैं. जर्मनवॉच पर्यावरण संगठन के स्टेन हार्मेलिंग कहते हैं, "शुरू में ही जब कतर ने मेजबानी जीती तो दो तरह के विचार आए. या तो लोगों ने सोचा कि अगर ऐसा नहीं हुआ तो कतर समझौतों में आनाकानी करेगा. अगर उसे मेजबानी मिल गई तो शायद इलाके में बदलाव के लिए वह योगदान दे."

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पर्यावरण कार्यकर्तां को लगता है कि मेजबानी मिलने से कतर हानिकारक गैसों के उत्सर्जन में कमी लाने के लिए बाध्य भी होगा. लेकिन हमदान को इसकी कम ही उम्मीद है. वह कहते हैं कि बीते सम्मेलनों में कतर ने कभी अपने वरिष्ठ अधिकारी नहीं भेजे, न ही कभी यह साफ किया की जलवायु के मुद्दे पर उसका रुख क्या है.

वैसे बीते पांच छह सालों से कतर कई अंतरराष्ट्रीय आयोजनों का मेजबान बनने की जी तोड़ कोशिश कर रहा है. कई अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन वहां हो भी चुके हैं. 2022 में फुटबॉल वर्ल्ड कप कतर में खेला जाएगा. श्टाइनबेर्ग इसकी वजह कुछ और बताते हैं, "कतर एक बहुत छोटा सा देश है जो बीच बीच में पड़ोसी देशों की धमकी सहता रहता है. इस तरह के आयोजन करके कतर खुद को बचाए रखने की मुहिम छेड़ रहा है."

रिपोर्ट: आंद्रेया रोन्सबेर्ग/ओएसजे

संपादन: आभा मोंढे

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