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विज्ञान

कचरे का गोदाम बनता समंदर

दुनिया भर में सागर कूड़े को फेंकने की जगह बनते जा रहे हैं. मलेशिया के दुर्घटनाग्रस्त विमान एमएच370 की खोज ने समंदर में गंदगी के आयाम पर रोशनी डाली है.

विश्व पर्यावरण दिवस इस पर चिंता करने का मौका देता है. सागर में तैरता हर टुकड़ा दुर्घटना का शिकार हुए यात्रियों के परिजनों को उनके सवालों का जवाब दे सकता था. मार्च के शुरू में मलेशिया के गायब हुए यात्री विमान से जुड़े सवाल. लेकिन गायब होने से पहले विमान में क्या हुआ, यह सवाल अनुत्तरित है. विमान के खोज के सिलसिले में समुद्र में जो कुछ भी मिला, वह विमान का मलबा होने के बदले कूड़ा निकला. प्लास्टिक, मछली मारने के सामान या तैरता कचरा.

विशेषज्ञों को इसमें आश्चर्य नहीं होता. सागर कचरे में डूब रहे हैं. तटीय इलाके ही नहीं दूरदराज के इलाके भी कचरे से महफूज नहीं हैं. पर्यावरण संगठन ग्रीनपीस के थीलो माक कहते हैं, "हर साल करीब 28 करोड़ टन प्लास्टिक का उत्पादन होता है. एक अनुमान के अनुसार उसका 20 फीसदी समुद्र में चला जाता है." सच में कोई नहीं जानता कि कितना प्लास्टिक समुद्र में जाता है. पानी के ऊपर तैरते टुकड़े समस्या का सिर्फ एक हिस्सा भर हैं. पानी के अंदर भी बहुत सारा कचरा जमा है. माक के अनुसार उत्तरी सागर में ही समुद्र तल में 300,000 टन प्लास्टिक होने का अनुमान है.

प्रशांत सबसे बड़ा कचराघर

समुद्र में पानी की तरह कचरा भी लगातार बह रहा है. लहरें उन्हें अपने साथ ले जाती हैं, एक जगह से दूसरी जगह, एक महासागर से दूसरे महासागर. उत्तर प्रशांत सागर में तो ग्रेट पैसिफिक गार्बेज पैच की बात कही जाती है. कचरे का यह कालीन मध्य यूरोप के बराबर है. सागर पर शोध करने वाले यूनेस्को के अंतरसरकारी सागर आयोग की वेंडी वॉटसन राइट का कहना है कि यह कुछ हद तक गलतबयानी है. ग्रेट पैसिफिक गार्बेज पैच शब्द से एक दूसरे से जुड़े कचरे के चादर का अहसास होता है, जिसे अंतरिक्ष से देखा जा सकता हो. लेकिन यह सच नहीं है क्योंकि यह आम तौर पर छोटे छोटे टुकड़ों से बना है. वॉटसन राइट का कहना है कि इससे कचरे की समस्या से निबटने में मुश्किल आती है. दिखने वाले कचरे को साफ करना कहीं आसान होता.

प्रशांत सागर दुनिया का सबसे बड़ा सागर है जो पृथ्वी का 30 फीसदी है. वॉटसन राइट कहती हैं, "कैचमेंट एरिया बहुत बड़ा है और समुद्री लहरों जैसी वायुमंडलीय शर्तें कचरे को इकट्ठा करने में बड़ी भूमिका निभाती हैं." सागर को पूरी तरह साफ करना बहुत ही मुश्किल है. पूरे सागर के ऊपर से उड़कर उसे देखना और उसकी जांच करना बहुत ही महंगा है. यदि सिर्फ कचरे के बड़े ढेरों पर ही ध्यान दिया जाए तो भी चुनौती बहुत बड़ी है. ग्रीनपीस के थीलो माक का कहना है कि प्लास्टिक के टुकड़ों को साफ करना तो संभव है लेकिन उससे समस्या का समाधान नहीं होगा. प्लास्टिक के टुकड़ों प्लांक्टो ऑर्गेनिज्म के बराबर होते हैं और यदि उन्हें छाना जाए तो प्लांक्टो ऑर्गेनिज्म भी साथ में निकल जाएंगे. समस्या यह भी है प्लास्टिक सालों तक नष्ट नहीं होता.

सोच बदलने की जरूरत

सागर की स्थिति में स्थायी सुधार के लिए लोगों की सोच में बदलाव जरूरी है. आम लोगों के अलावा स्थानीय और राष्ट्रीय सरकारों की चुनौती यह है कि वे कचरा साफ करने में जिम्मेदारी दिखाएं. माक कहते हैं कि इसके अलावा प्लास्टिक का उत्पादन करने वाले उद्यमों को उसकी रिसाइक्लिंग की भी जिम्मेदारी उठानी चाहिए. कचरा रिसाइक्लिंग के लिए एक टिकाऊ सिस्टम की जरूरत है ताकि प्लास्टिक और दूसरी नुकसानदेह चीजों को समुद्र में पहुंचने से रोका जा सके.

हिन्द महासागर में मलेशिया एयरलाइंस के जहाज की खोज के दौरान मिले चीजों का आकार 20 मीटर से भी लंबा था. ऐसा कचरा जिसकी वजह से विमान के साथ गायब हुए यात्रियों के परिजनों के मन में उम्मीद जगी. और दुनिया एक क्षण के लिए सागर की गंदगी के रूबरू हुई. वेंडी वॉटसन को उम्मीद है कि ये तस्वीरें लोगों के दिमाग में बनी रहेगी और संभवतः कुछ बदलाव लाएगी. "यदि इस भयानक दुर्घटना में कुछ अच्छी बात है तो वह यह उम्मीद है कि कचरे ने इस पर ध्यान दिलाया है कि कितना कचरा लोगों की गलती से हर दिन समुद्र में पहुंच रहा है."

रिपोर्ट: एस्थर फेल्डेन/एमजे

संपादन: ए जमाल