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विज्ञान

कंबोडिया के ईजी टॉयलेट

गांवों में साफ सफाई बड़ी समस्या रहती है. खास कर घरों में बाथरूम और टॉयलेट नहीं होने के कारण बीमारियां फैलने का डर बना रहता है. ये मुश्किल भारत के गांवों में ही नहीं, दुनिया भर के कई गांव इससे जूझ रहे हैं.

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दक्षिण पूर्वी एशिया का एक छोटा सा देश है कंबोडिया. यहां के गांवों में लोगों को साफ सफाई के प्रति जागरूक करने के लिए घर घर जाकर टॉयलेट बेचे जा रहे हैं. कारण यहां की 80 फीसदी जनता के पास उपयुक्त साफ सफाई नहीं है. लोग गरीबी रेखा के नीचे रहते हैं. कनाडा के एक नागरिक कोर्डेल जैक्स एक एनजीओ आईडीई कंबोडिया सैनिटेशन मार्केटिंग की बात करते हैं.

"कंबोडिया के गांवों में साफ सफाई की बहुत ज्यादा जरूरत है. अधिकतर लोग खुले मैदानों में नित्यकर्म के लिए जाते हैं इस कारण बहुत बीमारियां फैलती हैं. यही कारण है कि एशिया में पांच साल के कम उम्र के बच्चों की मौत की दर इतनी ज्यादा है."- कोर्डेल जैक्स

जैक्स के मुताबिक आईडीई ने टॉयलेट को नया डिजाइन दिया है. इसे तीन कंक्रीट से बनाया गया है जो जमीन में छह फुट नीचे डाला जाता है. इस नए डिजाइन के कारण यह सस्ता भी है और इसे आसानी से लगाया जा सकता है. उन्होंने इलाके की छह फैक्ट्रियों को सिखाया कि ये आसान टॉयलेट्स कैसे बनाया जाता है. और फिर इन बने बनाए टॉयलेट्स को कैसे बेचा जाता है. पहले गांव के लोगों को शौचालय लगवाने के लिए दूसरे गांव में जाना पड़ता उसे फिट करवाने के लिए एक और व्यक्ति लगता इससे खर्चा बढ़ जाता लेकिन अब ये मुश्किल ही दूर हो गई है.

पिछले साल दिसंबर में ये ईजी टॉयलेट्स शुरू किए गए थे. अब तक 6000 बिक चुके हैं. जैक्स का कहना है कि मुख्य बात है लोगों को साफ सफाई के बारे में बताना. साथ ही उन्हें ये भी बताना की गंदगी से कितनी बीमारियां होती हैं. विश्व बैंक की 2008 की रिपोर्ट कहती है कि खराब स्वास्थ के लिए कम से कम 150 डॉलर हर परिवार का खर्चा हो जाता है लेकिन ये टॉयलेट सिर्फ 35 डॉलर यानी करीब 1600 रुपये का है. इससे कंपनी को कम से कम प्रति टॉयलेट पांच से दस डॉलर का फायदा है और परिवारों को बीमारियों से मुक्ति.

रिपोर्टः आभा मोंढे

संपादनः ए जमाल

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