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विज्ञान

कंकड़ पत्थर थे डायनासोर का हाजमोला

साढ़े छह करोड़ वर्ष पूर्व नर्मदा की घाटी में डायनासोर अपने हाजमे के लिए कंकड़ और चमकीले पत्थर निगला करते थे. मध्य प्रदेश के धार जिले में कुक्शी बाग इलाके में हो रही रिसर्च से यह दिलचस्प बात सामने आई है.

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खुदाई के दौरान अनुसंधानकर्ताओं को लुप्त हो चुके डायनासोरों के अंडे, जीवाश्म और कुछ पत्थर मिले हैं. मंगल पंचायतन परिषद नाम के अनुसंधानकर्ताओं के एक समूह में शामिल विशाल वर्मा कहते हैं, "डायनासोर के अंडों और जीवाश्म के अलावा हमें 120 छोटे चमकते हुए पत्थर भी मिले हैं."

यह परिषद पिछले कई साल से नर्मदा घाटी में रिसर्च कर रही है. इसके सदस्यों को इस बात के प्रमाण मिले हैं कि डायनासोर अपने हाजमे के लिए छोटे छोटे पत्थर निगलते थे. वर्मा ने बताया, "पत्थर एक दूसरे से टकरा कर खाने को महीन करने की प्रक्रिया को सुगम बनाते हैं और इस तरह हाजमे में मदद करते हैं." वर्मा ने बताया कि बिना दांतों वाली चिड़ियाएं भी हाजमे के लिए छोटे छोटे पत्थर निगलती हैं.

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भारत में मिले डायनासोरों के अंडे के अवशेष

रिसर्च के मुताबिक 20 से 30 फुट ऊंचे शाकाहारी डायनासोर अपने खाने को पचाने के लिए खास तरह के पत्थर निगलते थे क्योंकि उनके दांत ज्यादा बड़े नहीं थे जिसके कारण खाना चबाना उनके लिए एक मुश्किल काम था. इन डायनासोरों का मुंह शरीर के मुकाबले बहुत छोटा होता था.

चार साल पहले परिषद को धार में डायनासोर के 400 अंडे मिले. अब सरकार ने वहां एक डायनासोर पार्क बनाने का फैसला किया है. दाहोद से जबलपुर तक फैला नर्मदा का इलाका करोड़ों वर्ष पहले डायनासोर की गतिविधियों का गवाह रहा है जिसके सबूत इलाके में जीवाश्म अंडों के रूप में मौजूद हैं.

रिपोर्टः एजेंसियां/ए कुमार

संपादनः ओ सिंह

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