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दुनिया

औसत से कम हैं जर्मनी में डिग्री पाने वाले

जर्मनी भले ही निर्यात में विश्व चैंपियन हो, लेकिन यूनिवर्सिटी ग्रेजुएटों के मामले में वह औद्योगिक देशों के औसत से भी कम है. आर्थिक सहयोग और विकास संगठन ओईसीडी ने यह रिपोर्ट दी है.

ओईसीडी ने शिक्षा पर एक रिपोर्ट जारी की है, जिसमें यूनिवर्सिटी पास करने वालों की संख्या पर शिकायत जरूर की गई है, पर साथ ही व्यावसायिक प्रशिक्षण को दिए जाने वाले भारी महत्व की सराहना भी की गई है. रिपोर्ट का कहना है कि जर्मनी में 25 से 34 साल के युवाओं में सिर्फ 28 प्रतिशत के पास तथाकथित टरशियरी डिग्री यानि यूनिवर्सिटी डिग्री है. इस उम्र वर्ग में ओईसीडी के देशों में डिग्री वाले युवाओं की तादाद 39 प्रतिशत है. ओईसीडी ने इस बात की सराहना की है कि 2005 के मुकाबले 2011 में यूनिवर्सिटी जाने वालों की संख्या 36 प्रतिशत से बढ़कर 46 प्रतिशत हो गई है, लेकिन ओईसीडी का औसत 60 प्रतिशत है.

तनख्वाह पर असर

रोजगार के मामले में यूनिवर्सिटी की डिग्री छात्रों के लिए बहुत फायदेमंद होती है. ओईसीडी के अनुसार किसी और देश में कॉलेज डिग्री का तनख्वाह में होने वाला लाभ पिछले सालों में उतना नहीं बढ़ा है जितना जर्मनी में, जहां पिछले दस सालों में इसमें 20 प्रतिशत की वृद्धि हुई है. जिसके पास यूनिवर्सिटी या कॉलेड की डिग्री होती है उसे हायर सेकंडरी की डिग्री वाले युवाओं से 1.6 गुना ज्यादा तनख्वाह मिलती है. स्कूली शिक्षा पूरी न करने वालों को हायर सेकंडरी वालों से 90 फीसदी कम तनख्वाह मिलती है.

जर्मनी में ज्यादा युवा भले ही उच्च शिक्षा के लिए विश्वविद्यालय न जाते हों, लेकिन यहां व्यावसायिक प्रशिक्षण पर बहुत ध्यान दिया जाता है. जर्मनी के श्रम बाजार में व्यावसायिक प्रशिक्षण का कम से कम उतना ही महत्व है, जितना दूसरी डिग्रियों का. यहां पेशेवर प्रशिक्षण की लंबी परंपरा रही है और सारी कंपनियां किशोरों को बड़ी संख्या में पेशेवर प्रशिक्षण देती हैं. ओईसीडी के शिक्षा विशेषज्ञ आंद्रेयास श्लाइषर इसे जर्मनी का सबसे बड़ा आकर्षण मानते हैं. यह पिछले सालों के वित्तीय संकट के दौरान भी फायदेमंद रहा है.

Symbolbild Unterricht Deutschland Wirtschaft

ओईसीडी के अनुसार यूनिवर्सिटी शिक्षा पाने वालों की तादाद बढ़ी है, लेकिन अब भी औद्योगिक देशों के औसत से कम है.

बेरोजगारी के खिलाफ बीमा

रिपोर्ट में कहा गया है कि जर्मनी में बेरोजगारी डिग्रीधारियों के साथ साथ व्यावसायिक प्रशिक्षण पाने वालों में भी अपेक्षाकृत कम है. जर्मन शिक्षा मंत्रालय ने ओईसीडी की रिपोर्ट के हवाले से कहा है कि 2011 में सिर्फ 2.4 प्रतिशत यूनिवर्सिटी डिग्रीधारी बेरोजगार थे. ओईसीडी के देशों में औसत 4.8 प्रतिशत डिग्रीधारी बेरोजगार थे. इसी तरह पेशेवर प्रशिक्षण पाए लोगों में जर्मनी में बेरोजगारी दर 5.8 प्रतिशत थी, जबकि ओईसीडी के देशों में यह औसत 7.3 प्रतिशत था.

जर्मनी की शिक्षा मंत्री योहान्ना वांका ने इस रिपोर्ट के आने के बाद भरोसा जताया है कि पूरी की गई यूनिवर्सिटी शिक्षा या सफल पेशेवर प्रशिक्षण बेरोजगारी के खिलाफ सबसे अच्छा बीमा है. उन्होंने कहा कि जर्मनी भविष्य में भी दो पटरियों वाली शिक्षा व्यवस्था जारी रखेगा ताकि वह श्रम बाजार में प्रतिस्पर्धी बना रह सके. जर्मनी उन कुछेक देशों में शामिल है जहां आर्थिक संकट के बावजूद बेरोजगारी दर बढ़ी नहीं है. ओईसीडी के अनुसार 2008 से 2011 के बीच शिक्षा के सभी वर्गों में बेरोजगारी दर गिरी है. 2011 में जर्मनी में 11 प्रतिशत युवा ने तो शिक्षा पा रहे थे और न ही काम कर रहे थे, जबकि ओईसीडी में उनका औसत 16 प्रतिशत था.

ओईसीडी के विशेषज्ञों का कहना है कि छोटे बच्चों की देखभाल में जर्मनी ने खासी प्रगति की है. लेकिन रिपोर्ट में इस बात की आलोचना की गई है कि जर्मनी में बहुत से शिक्षक 50 साल के हैं या उससे ज्यादा उम्र के हैं. ओईसीडी में 34 देश शामिल हैं.

एमजे/आईबी (एएफपी, डीपीए)

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