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दुनिया

और फिर आया वह दिन...

3 अक्टूबर, 1990 की रात को बर्लिन की सड़कों पर लाखों लोग निकल आए थे जर्मन एकीकरण का जश्न मनाने के लिए. उससे पहले राजनीतिज्ञों को काफी पापड़ बेलने पड़े थे और नतीजा कतई तय नहीं था.

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बर्लिन के राइषटाग भवन के ऊपर आतिशबाजियों का फव्वारा फूट पड़ा था, बहुतों की आंखों में आंसू थे. वे एक ऐसी ऐतिहासिक घटना के गवाह बन रहे थे, जिसे जर्मनी क्या, यूरोप के किसी देश में मुमकिन नहीं माना जाता था. एक शांतिपूर्ण क्रांति के जरिये जीडीआर के नागरिकों ने समाजवादी राज्य प्रणाली को उखाड़ फेंका था. कहीं गोली नहीं चली थी, हिंसा नहीं हुई थी और किसी को नुकसान नहीं पहुंचा था. और तीन अक्टूबर, 1990 के दिन जीडीआर संघीय गणराज्य जर्मनी में शामिल हुआ, जर्मन फिर एक एकजुट देश के नागरिक बने.

Flash-Galerie Richard von Weizsäcker wird 90 Wiedervereinigung 1990

तात्कालीन विदेश मंत्री डीटरिष गेन्शर, हानलोरे कोल, पश्चिमी जर्मनी के चांसलर हेलमूट कोल, जर्मन राष्ट्रपति रिचार्ड फॉन वाइत्सेकर

उस घड़ी में भी संघीय राष्ट्रपति रिचार्ड फॉन वाइत्सेकर ने जर्मन एकीकरण और यूरोपीय महाद्वीप के एकीकरण के बीच संबंधों की ओर ध्यान दिलाया था. एकीकरण का जश्न शुरू होने से कुछ ही देर पहले अपने संदेश में उन्होंने कहा था: हम जर्मन अपनी जिम्मेदारी के प्रति सचेत हैं और एक संयुक्त यूरोप में विश्वशांति के लिए काम करना चाहते हैं.


नींद के लिए वक्त कहां


उन दिनों संघीय चांसलर दफ्तर के प्रधान थे रूडॉल्फ जाइटर्स. एकीकरण से पहले लगभग एक साल तक चांसलर हेलमुट कोल के विश्वसनीय साथी के रूप में उन्होंने महत्वपूर्ण घटनाओं को नजदीक से देखा था. बाहर एकीकरण का जश्न हो रहा था और वे बर्लिन में संघीय सरकार के प्रभारी के दफ्तर में रात बिता रहे थे. सोने का कोई सवाल ही नहीं था. उस रात को कहे गए उनके शब्द: मुझे याद आती है दूतावास में ठहरे शरणार्थियों की यात्रा की अनुमति के लिए की गई बातचीत, प्राग के जर्मन दूतावास की बालकनी में हान्स डीटरिष गेंशर के साथ वह दृश्य, दीवार गिरने के बाद जर्मन संसद में अपना भाषण, क्योंकि हेलमुट कोल वारसा गए हुए थे, और फिर ड्रेसडेन के फ्राउएनकिरषे गिरजे के सामने हेलमुट कोल का महत्वपूर्ण भाषण.

Dossierbild Tryptychon Deutsche Einheit Berlin Reichstag Feuerwerk 1

बर्लिन के राइषटाग के सामने खुशी मनाते लोग


सनसनीखेज 323 दिन

बर्लिन की दीवार गिरने के सिर्फ 323 दिन बाद 3 अक्टूबर, 1990 को देश एक हुआ. दोनों जर्मन देशों के नेताओं के लिए ये दिन जटिल बातचीत व दूरगामी फैसलों के दिन थे. खासकर जीडीआर में कोई पुरानी चीज बाकी नहीं रह गई. मार्च 1990 में हुए चुनाव के बाद जीडीआर की जनसंसद के सदस्यों ने एकीकृत समाजवादी देश को एक संघात्मक देश में बदला था, जिसके प्रदेश अब संघीय गणराज्य जर्मनी के अंग बने. राजकीय खुफिया विभाग विसर्जित कर दिया गया था और डी-मार्क का प्रचलन शुरू हो चुका था. संघीय सरकार जल्द निर्णय लेना चाहती थी. पूर्वी यूरोप में सुधार आंदोलन के बाद लोग हर कहीं यात्रा की आजादी और राजनीतिक व्यवस्था में तब्दीली की मांग कर रहे थे.

ग्लासनोस्त और पेरेस्त्रोयका के नारों के साथ यह दौर शुरू हुआ था. सोवियत संघ में वह फैल चुका था और पूर्वी यूरोप के सभी देशों में इसके चलते मजबूत विरोध आंदोलन सामने आ चुके थे. उन दिनों की याद करते हुए रुडॉल्फ जाइटर्स कहते हैं: सवाल उस समय उस प्रक्रिया को कायदे से आगे बढ़ाने का था, जिसकी वजह से सिर्फ मास्को ही नहीं, बल्कि पश्चिम यूरोप के देशों में भी चिंता फैल गई थी. 

Bundespräsident Richard von Weizsäcker Flash-Galerie

संघीय राष्ट्रपति रिचार्ड फॉन वाइत्सेकर, रूस के राष्ट्रपति मिचेल गोर्बाचोव


एकीकरण का झरोखा

एकीकरण के लिए जर्मन आकांक्षा को यूरोप की कुछ राजधानियों में शंका की दृष्टि से देखा जा रहा था. महाद्वीप के बीचोबीच एक शक्तिशाली जर्मनी के उदय से कुछ लोगों को चिंता थी. ब्रिटिश प्रधान मंत्री मार्गरेट थैचर खुलेआम जर्मन एकीकरण का विरोध कर रही थीं. फ्रांस के राष्ट्रपति फ्रांसोआ मितरां को भी यह पसंद नहीं था.

सोवियत संघ में भी यूरोप में हो रहे परिवर्तन रास नहीं आ रहे थे. वारसा संधि में संगठित व नाटो और पूंजीवादी व्यवस्था को चुनौती देने वाले पूर्वी यूरोप के देशों में इस महाशक्ति का असर घटता जा रहा था. पश्चिम में यह डर बढ़ता जा रहा था कि महासचिव मिखाईल गोर्बाचोव की सत्ता पलटी जा सकती है, जिसके चलते जर्मन एकीकरण पर सवालिया निशान लग सकता था.

Bildgalerie Helmut Kohl und Mitterand

पश्चिमी जर्मनी के चांसलर हेलमूट कोल फ्रांसिसी राष्ट्रपति फ्रांसोआ मितरां

विश्व राजनीति के केंद्र में जर्मन एकीकरण

किस्मत जर्मनी का साथ दे रही थी. यह दौर, जिसे एकीकरण का झरोखा कहा जा रहा था, सन 1990 तक सीमित रहा. कोई ऐसी दूसरी बड़ी घटना नहीं हुई, जिसके चलते लोगों का ध्यान जर्मन एकीकरण की प्रक्रिया से हटता. कुछ दिनों के बाद स्थिति बदल जाती, जबकि अगस्त, 1990 में इराक ने कुवैत पर हमला कर उसे हड़प लिया, या 1991 के मध्य में कुछ एक जनरलों ने लाल सेना के एक हिस्से के समर्थन से गोर्बाचोव के खिलाफ सत्ता हड़पने की कोशिश की. अगर ये घटनाएं एक साल पहले हुई होतीं, जर्मन एकीकरण की प्रक्रिया कहीं अधिक जटिल हो जाती और कहीं अधिक समय लग जाता. लेकिन जर्मन एकीकरण का सवाल विश्व राजनीति के केंद्र में बना रहा.

समग्र जर्मन संसद

आतिशबाजियों का दौर अभी चल ही रहा था, कि संघीय जर्मन बुंडेसटाग और जीडीआर की संसद फोल्क्सकामर के सदस्यों का संयुक्त सत्र हुआ. दो महीने बाद समूचे जर्मनी में संसद का चुनाव हुआ, 1932 के बाद पहली बार. हेलमुट कोल के नेतृत्व में सीडीयू-सीएसयू व एफडीपी के मोर्चे की स्पष्ट जीत हुई.

रिपोर्ट: माथियास फॉन हेलफील्ड/उज्ज्वल भट्टाचार्य

संपादन: महेश झा