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दुनिया

और तेजी से शरणार्थियों को लौटाएगा जर्मनी

जर्मनी में शरण लेने के इच्छुक जिन लोगों का आवेदन रद्द हो गया है, उन्हें उनके देश वापस भेजने का काम जर्मनी और भी तेजी से करेगा. इस कदम का एलान चांसलर मैर्केल की कैबिनेट ने लिया. इन कदमों को संसद की मंजूरी मिलना बाकी है.

युद्ध से तबाह हुए देश अफगानिस्तान के नागरिकों को जर्मनी से वापस लौटाए जाने को लेकर काफी विवाद हो रहा है. अब जर्मन कैबिनेट में हुए नए निर्णयों से इस मुद्दे के और आगे बढ़ने की आशंका जताई जा रही है. बुधवार को हुए निर्णयों के तहत देश की प्रवासी एजेंसियों के अधिकारियों को भविष्य में शरण का आवेदन करने वालों के स्मार्टफोन तक देखने का अधिकार होगा. कुछ मामलों में इसे उनकी पहचान और मूल देश की पुष्टि करने के लिए मददगार समझा जा रहा है.

करीब 50 अफगान नागरिकों को बुधवार शाम को ही एक चार्टर विमान से म्यूनिख से अफगानिस्तान भेजा जाना है. पिछले तीन महीनों में प्रवासियों को वापस ले जाने वाला यह ऐसा तीसरा विमान होगा. उन्हें वापस भेजे जाने पर एमनेस्टी इंटरनेशनल और कई वामपंथी पार्टियों ने अपना विरोध जताया है. उनका कहना है कि अफगानिस्तान में माहौल सुरक्षित नहीं है.

यूरोपीय संघ की सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था जर्मनी 2015 से 10 लाख से भी अधिक प्रवासियों को देश में जगह दे चुकी है. जर्मनी ने 2016 में ऐसे करीब 80,000 लोगों को वापस उनके देश भेज दिया, जिन्हें शरणार्थी स्टेटस नहीं दिया जा सकता था. अब देश अस्वीकार किए गए आवेदकों को और तेजी से वापस भेजना चाहता है. जर्मनी ने युद्ध प्रभावित सीरिया जैसे देशों के नागरिकों के लिए तो रास्ते खुले रखे हैं, लेकिन काबुल और अफगानिस्तान के दूसरे हिस्सों से आने वाले लोगों को वापस भेज रहा है. जर्मनी का कहना है कि अफगानिस्तान जैसे देशों में नाटो सेनाओं का हिस्सा होने के कारण पहले से जर्मन सैनिक मौजूद हैं, जो उस इलाके में शांति स्थापित करने के मकसद से ही भेजे गए हैं.

इसी साल सितंबर में जर्मनी में संसदीय चुनाव हैं. मैर्केल एक बार फिर चांसलर पद की उम्मीदवार हैं. बड़ी संख्या में जर्मनी पहुंचे प्रवासियों को लेकर उन्हें कई वोटरों का गुस्सा भी झेलना पड़ सकता है. दो हफ्ते पहले ही उन्होंने जर्मनी के सभी 16 राज्य सरकारों के साथ प्रवासियों के रीपैट्रिएशेन प्लान यानि वापस उनके देश भेजे जाने की योजना पर आम सहमति बनाई है. अब वापस भेजे जाने से पहले ऐसे लोगों को हिरासत में भी रखा जा सकेगा, जिनसे आम जनता को किसी तरह का खतरा हो सकता हो. ऐसे लोगों के टखने पर इलेक्ट्रॉनिक ब्रेसलेट भी पहनाए जा सकते हैं, जिससे उनकी ट्रैकिंग आसान हो. जर्मनी में राष्ट्रीय "डिपोर्टेशन केन्द्र" बनेंगे और स्वेच्छा से वापस लौटने वालों को धनराशि भी दी जाएगी. इन सभी उपायों को अभी संसद की मंजूरी मिलनी बाकी है. जर्मनी उन देशों पर भी दबाव बढ़ाना चाहता है जो अपने नागरिकों को लेने से मना कर रहे हैं या फिर नौकरशाही के झमेलों में फंसाकर प्रक्रिया को लंबा खींच रहे हैं.

आरपी/ओएसजे (एएफपी)

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