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खेल

ओलंपिक में भारत की वापसी के आसार

अंतरराष्ट्रीय ओलंपिक समिति ने भारत के साथ सकारात्मक बातचीत की है और इसके बाद ओलंपिक में भारत की वापसी के रास्ते खुलते दिख रहे हैं. हाल ही में अंतरराष्ट्रीय संस्था ने भारत को निकाल दिया था.

स्विट्जरलैंड के लोजान शहर में स्थित अंतरराष्ट्रीय समिति ने कहा कि उसके प्रतिनिधियों ने भारतीय खेल मंत्री जीतेंद्र सिंह के साथ खास बातचीत की है और यह अच्छी दिशा में बढ़ता दिख रहा है. समिति ने भारतीय ओलंपिक संघ के साथ भी मशविरा किया है.

पिछले साल दिसंबर में समिति ने भारतीय संघ को उस वक्त निकाल दिया था, जब ललित भनोत को भारतीय संघ का महासचिव चुना गया. उन पर 2010 के कॉमनवेल्थ खेलों के दौरान भ्रष्टाचार के आरोप लगे थे.

अंतरराष्ट्रीय समिति ने तब कहा कि भारत उसके नियमों के तहत काम करने में विफल रहा है, इसलिए उसकी सदस्यता निलंबित की जाती है. भारत दुनिया में दूसरी सबसे बड़ी आबादी वाला देश है लेकिन ओलंपिक में वह अपने आकार के अनुरूप प्रदर्शन नहीं कर पाता है.

लेकिन समिति यानी आईओसी का कहना है कि बुधवार की बैठक के बाद भारतीय मंत्री ने अच्छे संकेत दिए हैं और "इस बात की गारंटी दी है कि भारत सरकार अंतरराष्ट्रीय ओलंपिक समिति के नियमों का पूरा सम्मान करेगी." समिति का कहना है कि इसके अलावा सभी पार्टियों में आपसी सहमति भी बनती दिख रही है.

इसके अलावा इस बात पर भी सहमति बन गई कि भारत में खेल से जुड़ा नया बिल आईओसी के साथ मशविरे के बाद ही तैयार किया जाएगा, ताकि ओलंपिक अभियान के नियमों को ध्यान में रखा जा सके. यह बात भी तय की गई है कि भारतीय ओलंपिक संघ अपने वर्तमान अध्यक्ष विजय कुमार मल्होत्रा के साथ मिल कर अपने संविधान पर दोबारा नजर डालेगा और उसमें जरूरी फेरबदल के लिए तैयार रहेगा.

आईओसी ने कहा, "पूरे मामले पर आईओसी की नजर रहेगी. यह निलंबित भारतीय ओलंपिक संघ और उसके सदस्यों को जरूरी दिशा निर्देश देगा."

81 साल के मल्होत्रा 2010 के कॉमनवेल्थ खेलों से भी जुड़े रहे थे. उन्होंने पिछले दिनों असहयोग की धमकी दी थी क्योंकि नए नियमों के तहत अध्यक्ष को 70 साल की उम्र में रिटायर होना पड़ सकता है और किसी एक अध्यक्ष की मीयाद सिर्फ 12 साल की होगी.

आईओसी से सस्पेंड होने का मतलब है कि भारत राष्ट्रीय ध्वज के साथ ओलंपिक में शामिल नहीं हो सकता है और न ही उसे समिति से किसी तरह की आर्थिक मदद मिल सकती है.

एजेए/आईबी (एएफपी)

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