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दुनिया

ओबामा पर्यावरण पहल का भारी विरोध

अमेरिकी राष्ट्रपति बराक ओबामा ने अपने देश के लिए पर्यावरण लक्ष्यों की घोषणा क्या की, पूरे देश में विरोध के स्वर मुखर होने लगे हैं. कोयला उद्योग, विपक्षी रिपब्लिकन और बहुत से प्रांत ओबामा की पहलकदमी का विरोध कर रहे हैं.

ग्रीनहाउस प्रभाव को कम करने के लिए अपनी महात्वाकांक्षी योजना पर अमल में राष्ट्रपति बराक ओबामा को भारी विरोध का सामना करना होगा. रिपब्लिकन पार्टी के राष्ट्रपति पद के उम्मीदवारों ने ओबामा की योजना को संविधान विरोधी बताया है तो बहुत से प्रांतों की सरकारों ने राष्ट्रपति की योजना के खिलाफ अदालत का दरवाजा खटखटाने की घोषणा की है. कोयला उद्योग भी खुश नहीं है. न्यूयॉर्क टाइम्स के अनुसार यदि ओबामा द्वारा प्रस्तावित नियमों को लागू किया जाता है तो सैकड़ों कोयला चालित बिजलीघरों को बंद करना होगा.

नवंबर में पेरिस में होने वाले अंतरराष्ट्रीय जलवायु सम्मेलन से कुछ ही महीने पहले ओबामा ने ग्रीनहाउस गैसों के उत्सर्जन पर लगाम लगाने के अब तक के सबसे सख्त कदमों की घोषणा की है. नए नियमों के तहत अमेरिका के बिजलीघरों को पहली बार जहरीली गैसों के उत्सर्जन में 2005 के स्तर से 32 प्रतिशत की कमी लानी होगी. इसके लिए उनके पास 2030 तक का समय होगा. ओबामा ने खुद इसे जलवायु परिवर्तन के खिलाफ अब तक का सबसे महत्वपूर्ण कदम बताया है. उन्होंने कहा कि यदि अब कदम नहीं उठाए गए तो बहुत देर हो जाएगी. राष्ट्रपति ने कहा, "हमारे पास सिर्फ एक घर है, एक ही ग्रह है. हमारे पास कोई प्लान बी नहीं है."

पर्यावरण सुरक्षा के लिए कड़े कायदे कानून शुरू से ही ओबामा की सबसे महत्वपूर्ण घरेलू चुनौती थी. लेकिन वे संसद को इसके लिए नहीं मना पाए. अब उन्होंने हवा को साफ रखने के मौजूदा नियमों में कुछ नए नियम जोड़ने के आदेश दिए हैं. उन्होंने धरती के गर्म होने की वजह से ग्लेशियर के पिघलने, बाढ़, सूखा और जंगलों में आग लगने जैसे गंभीर उदाहरण दिए. ओबामा ने कहा कि जलवायु परिवर्तन को और झुठलाया नहीं जा सकता और इस समस्या को अगली पीढ़ी के लिए नहीं छोड़ा जा सकता.

अमेरिकी सरकार के नए प्रस्ताव पिछले साल दिए गए प्रस्तावों से कुछ मामलों में आगे तक जाते हैं. उस प्रस्ताव में जहरीली गैसों के उत्सर्जन में 30 प्रतिशत की कमी की बात की गई थी. इसके विपरीत नए प्रस्ताव में कुछ राज्यों को उत्सर्जन में कटौती को लागू करने के लिए ज्यादा समय दिया जा रहा है. इसके अलावा वे खुद इस बात का फैसला कर सकेंगे कि इन लक्ष्यों को वे किस तरह पूरा करेंगे. इन कदमों के साथ ओबामा का एक मकसद यह भी है कि ऊर्जा कंपनियां जल्द से जल्द पवन और सौर ऊर्जा का उत्पादन शुरू करें. नई योजना के अनुसार 2030 तक अमेरिका की ऊर्जा क्षमता में अक्षय ऊर्जा का हिस्सा 28 प्रतिशत होगा.

ओबामा द्वारा घोषित नए कदम साल के अंत में पेरिस में होने वाले अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन के लिए निर्णायक कदम उठाने का प्रोत्साहन भी है. अब तक अमेरिका हिचकिचाहट दिखाता रहा है. अमेरिकी सीनेट में रिपब्लिकन बहुमत के नेता मिच मैककॉनेल ने ओबामा के प्रस्तावों को अयथार्थवादी और विकास को रोकने वाला बताया है. देश के सभी 50 प्रातों के गवर्नरों को पत्र लिखकर उन्होंने ओबामा की योजना को नहीं लागू करने की अपील की है. राष्ट्रपति पद के रिपब्लिकन उम्मीदवार जेब बुश ने नए नियमों को आपदा बताया है तो मार्को रूबियो ने कहा है कि इससे भविष्य में बिजली की कीमतें बढ़ जाएंगी.

एमजे/आरआर (डीपीए)

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