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दुनिया

"ओबामा को खुद पर भरोसा नहीं"

अमेरिका के राष्ट्रपति बराक ओबामा को अफगानिस्तान नीति पर खुद ही यकीन नहीं था. पूर्व रक्षा मंत्री रॉबर्ट गेट्स की किताब में खुलासा किया गया है कि ओबामा अफगान नीति पर कैसे बेचैन रहा करते थे.

मीडिया ने गेट्स की किताब "ड्यूटीः मेमोयर ऑफ ए सेक्रेट्री ऑफ वॉर" के हवाले से रिपोर्ट दी है कि गेट्स को लगता था कि राष्ट्रपति ओबामा ने खुद जिस युद्ध नीति पर हस्ताक्षर किए थे, उन्हें उस पर विश्वास नहीं था. न्यूयॉर्क टाइम्स, वॉल स्ट्रीट जर्नल और वॉशिंगटन पोस्ट में छपी रिपोर्टों में कहा गया है कि ओबामा अफगान राष्ट्रपति हामिद करजई को भी पसंद नहीं करते.

मार्च, 2011 में व्हाइट हाउस की एक मीटिंग का जिक्र करते हुए गेट्स ने लिखा, "जब मैं वहां बैठा था, तो मैंने सोचा, राष्ट्रपति अपने कमांडर पर भरोसा नहीं करते, करजई को नहीं झेल पाते, अपनी ही रणनीति में विश्वास नहीं करते और यह भी नहीं मानते कि यह युद्ध उनका है. उनके लिए सबसे जरूरी है कि वहां से बाहर निकला जाए."

राजनीतिक विरोधी

रॉबर्ट गेट्स ओबामा के डेमोक्रैटिक पार्टी के विरोधी यानी रिपब्लिकन पार्टी के सदस्य हैं. उन्होंने जॉर्ज बुश के राष्ट्रपति कार्यकाल के आखिरी दिनों और बराक ओबामा के शुरुआती दिनों में कुल मिला कर साढ़े चार साल रक्षा मंत्री का कामकाज संभाला था. अमेरिका में मंत्रियों का सत्ताधारी पार्टी का होना जरूरी नहीं. नवनिर्वाचित राष्ट्रपतियों द्वारा संसद में बहुमत नहीं होने पर या विपक्ष का समर्थन पाने की उम्मीद में विपक्षी पार्टी के प्रमुख नेताओं को सरकार में शामिल करने की परंपरा है.

रॉबर्ट गेट्स की किताब 14 जनवरी को रिलीज हो रही है. इसमें उन्होंने राष्ट्रपति ओबामा के बारे में लिखा है, "अगर वह नाकामी नहीं समझते थे, तो उन्हें इसकी कामयाबी पर भी संदेह था." अफगानिस्तान में युद्ध ओबामा से पहले अमेरिका के राष्ट्रपति रहे रिपब्लिकन पार्टी के जॉर्ज बुश ने शुरू किया था. सीआईए के प्रमुख रह चुके गेट्स ने लिखा है कि उन्हें इस बात से तकलीफ होती थी कि ओबामा के व्हाइट हाउस की तरफ से नियंत्रणवादी नीति अपनाई जाती थी और पेंटागन के मामलों में लगातार दखल दिया जाता था. उनका कहना है कि प्रशासनिक अधिकारियों को सैनिक मामलों की ज्यादा जानकारी नहीं होती, फिर भी वे लगातार इसमें हस्तक्षेप करते हैं.

Barack Obama und Robert Gates

रॉबर्ट गेट्स के साथ बराक ओबामा

सेना प्रशासन में तनाव

गेट्स ने लिखा, "प्रशासन में बहुत पहले से ही व्हाइट हाउस अधिकारियों का सैनिक अधिकारियों पर संदेह और अविश्वास का भाव पैदा हो गया. इनमें राष्ट्रपति और उप राष्ट्रपति भी शामिल थे. यह मेरे लिए बड़ी समस्या थी क्योंकि मैं कमांडर इन चीफ और उनके सैनिक अधिकारियों के बीच तारतम्य बिठाने की कोशिश कर रहा था." उन्होंने लिखा है कि 2009 में अफगानिस्तान पर एक बैठक के बाद वह इस्तीफा देने का मन बना चुके थे क्योंकि ओबामा के अधिकारियों के साथ काम करना उनके बस से बाहर हो रहा था.

किताब में अमेरिकी उप राष्ट्रपति जो बाइडन पर भी गहरे सवाल उठाए गए हैं और इसमें लिखा गया है कि अपने चार दशक के तजुर्बे में वह लगभग हर विदेश नीति पर गलत साबित हुए हैं. हालांकि उन्होंने यह भी लिखा है कि बाइडन एक सम्मानित शख्सियत हैं.

राष्ट्रीय सुरक्षा समिति की ओर से ओबामा के कार्यों का पक्ष लिया गया है. इसकी प्रवक्ता केटलिन हेडन ने कहा, "सबको पता है कि राष्ट्रपति अल कायदा को नाकाम करने के अपने लक्ष्य को पाना चाहते हैं और वे इसके लिए प्रतिबद्ध हैं. लेकिन इसके साथ हमारी योजना यह भी थी कि हम युद्ध को तय वक्त पर खत्म करें."

बाइडन के मामले में हेडन का कहना है, "राष्ट्रपति गेट्स की इस समीक्षा से इत्तेफाक नहीं रखते. जो बाइडन अपने समय के प्रमुख राजनीतिज्ञ रहे हैं और उनकी मदद से अमेरिका का विश्व में कद बढ़ा है."

हालांकि किताब में अमेरिका की पूर्व विदेश मंत्री हिलेरी क्लिंटन की तारीफ की गई है. ओबामा के नाम पर गेट्स ने बस ओसामा बिन लादेन के खिलाफ कार्यवाही की तारीफ की है जब नेवी सील्स ने पाकिस्तान के एबटाबाद में घुस कर बिन लादेन को मार गिराया. गेट्स ने लिखा कि उन्होंने "व्हाइट हाउस के अंदर यह सबसे साहसी फैसला देखा".

एजेए/एमजे (एपी, एएफपी)

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