ओबामा के विरोधी को राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार बनने का न्योता | दुनिया | DW | 18.11.2016
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दुनिया

ओबामा के विरोधी को राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार बनने का न्योता

2014 में ओबामा ने जिस अधिकारी की छुट्टी की, उसी अफसर को डॉनल्ड ट्रंप अमेरिका का नया राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार बनाना चाहते हैं. ट्रंप के फैसलों से अमेरिका के साझेदार सांसत में हैं.

डॉनल्ड ट्रंप अमेरिकी सेना के पूर्व इंटेलिजेंस चीफ माइलक फ्लाइन को राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार बनाना चाहते हैं. ट्रंप के दफ्तर के एक वरिष्ठ अधिकारी ने इसकी पुष्टि करते हुए कहा कि फ्लाइन को राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार के पद का प्रस्ताव दिया गया है. फ्लाइन चुनाव अभियान के दौरान ट्रंप को सलाह दे रहे थे. जब यह पूछा गया कि क्या 57 साल के फ्लाइन पद स्वीकार करेंगे तो अधिकारी ने कहा, "अगर अमेरिका का राष्ट्रपति आपसे सेवाएं देने को कहता है तो एक ही जवाब होता है."

राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अमेरिकी राष्ट्रपति के साथ मिलकर काम करता है. राष्ट्रपति तक उसकी पहुंच बेहद आसान होती है. इस पद के लिए अमेरिकी संसद की मंजूरी की जरूरत नहीं पड़ती.

फ्लाइन को रूस का करीबी माना जाता है. मॉस्को से निकटता के चलते ही 2014 में अमेरिकी राष्ट्रपति बराक ओबामा ने डिफेंस इंटेलिजेंस चीफ के पद से हटा दिया. लेकिन अब ट्रंप ने उनका प्रमोशन कर दिया है. अमेरिका के साझेदार ट्रंप द्वारा की जा रही नियुक्तियों पर पैनी नजर रख रहे हैं. इन नियुक्तियों के जरिये अमेरिकी नीतियों में आ रहे बदलावों का अंदाजा लगाने की कोशिशें भी की जा रही हैं.

फ्लाइन मध्य पूर्व संकट और इस्लामिक आतंकवाद को लेकर ओबामा प्रशासन की आलोचना कर चुके हैं. चुनाव अभियान के दौरान भी उन्होंने ट्रंप के समर्थन में ट्वीट किये. फ्लाइन ने कुछ ट्वीट यहूदी समाज के खिलाफ भी किये, जिनके लिए बाद में उन्हें माफी मांगनी पड़ी.

अमेरिका में राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार का पद शीत युद्ध के दौरान शुरू किया गया. हेनरी किसिंजर, कॉलिन पावेल, कोंडोलिजा राइस के बाद फिलहाल सुजाने राइस अमेरिका की राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार हैं. लेकिन बराक ओबामा का आठ साल का कार्यकाल खत्म होते ही राइस की भी छुट्टी हो जाएगी और तमाम अहम पदों पर ट्रंप के अधिकारी तैनात होंगे.

Deutschland Pressekonferenz vom US-Präsident Obama in Berlin (picture-alliance/dpa/B. von Jutrczenka)

साझा प्रेस कॉन्फ्रेंस में ओबामा और मैर्केल

परेशान यूरोप

ट्रंप के राष्ट्रपति बनने से अमेरिका का अहम साझेदार यूरोप काफी परेशान है. सीरिया और यूक्रेन को लेकर रूस व यूरोपीय संघ आमने सामने हैं. अब तक यूरोपीय संघ को इन मुद्दे पर अमेरिका सहयोग मिलता रहा है, लेकिन ट्रंप अगर मॉस्को के करीब गए तो ईयू बेहद असहसज स्थिति में आ जाएगा. यूरोपीय संघ के अधिकारियों के साथ ही जर्मनी और फ्रांस की सरकारें भी ट्रंप को लेकर संशय में हैं. जर्मनी के विदेश मंत्री फ्रांक वाल्टर श्टाइनमायर तो साफ कह चुके हैं कि यूरोप को अमेरिका से इतर अपना रास्ता बनाना होगा.

अमेरिकी राष्ट्रपति बराक ओबामा अपने कार्यकाल के आखिरी दौर में यूरोप के दौरे पर हैं. गुरुवार को बर्लिन में ओबामा ने जर्मन चांसलर अंगेला मैर्केल से मुलाकात की. ओबामा ने मैर्केल से फिर चांसलर का चुनाव लड़ने की अपील की. दोनों नेताओं ने बर्लिन में एक साझा प्रेस कॉन्फ्रेंस भी की. इस दौरान मैर्केल ने भावुक अंदाज में कहा, मेरे लिये ओबामा को अलविदा कहना मुश्किल हो रहा है. मैर्केल ने आठ साल तक करीबी और दोस्ताना साझेदारी के लिए ओबामा का आभार भी जताया.

डॉनल्ड ट्रंप की सरकार में अमेरिका और यूरोप के रिश्ते कैसे होंगे, इस पर भी दोनों नेताओं ने बात की. ट्रंप और रूस के मुद्दे पर ओबामा ने कहा, "दुनिया के बड़े संकट सुलझाने के लिए, रूस के साथ काम करना हमारे हित में है." लेकिन मुझे उम्मीद है कि अगर रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन अमेरिकी मूल्यों और अंतरराष्ट्रीय नियमों से हटते हैं तो आगामी राष्ट्रपति उनके सामने खड़े होंगे.

(अब तक किस किस नेता से बात कर चुके हैं ट्रंप)

ओएसजे/वीके (एपी, डीपीए)

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