ओबामा की शानदार जीत | दुनिया | DW | 07.11.2012
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दुनिया

ओबामा की शानदार जीत

अर्थव्यवस्था सुधरी तो नहीं लेकिन रास्ते पर जरूर है, आतंकवाद नहीं मिटा पर ओसामा अब नहीं है, सेहत सुधरेगी, टैक्स घटेगा दुनिया माने न माने अमेरिका ने माना और कह दिया, व्हाइट हाउस में बराक ओबामा चार साल और रहेंगे.

अमेरिकी चुनावों में ओबामा को ऐतिहासिक यूं ही नहीं कहा जाता, 2008 के चुनाव किसी अश्वेत नागरिक की व्हाइट हाउस में पहली ताजपोशी थी तो 2012 में मिली बड़ी जीत ने उन्हें मुकाबिलों से और बड़ा साबित किया है. पहले से माने जा रहे डेमोक्रैट राज्यों के बाद ओहायो, वर्जीनिया, नेवाडा, आयोवा, कोलोराडो, विस्कोन्सिन और पेन्सिल्वेनिया, एक के बाद एक कर स्विंग स्टेट्स के नतीजे ओबामा के पक्ष में आते गए और जीत की तस्वीर साफ होती गई. न्यूयॉर्क, कैलिफोर्निया, इलिनोइस जैसे बड़े राज्यों के साथ ही ओबामा को कोलंबिया, हवाई, मैसेच्यूसेट्स, मिनेसोटा, न्यू मेक्सिको और रोड जैसे छोटे राज्यों में भी जीत मिली है.

कहां तो जीत के लिए 270 इलेक्टोरल कॉलेज की जरूरत थी और कहां देखते ही देखते आंकड़ा 283 को छू गया जबकि अभी कई राज्यों में लोग वोट डाल ही रहे थे. स्विंग स्टेट्स में केवल नॉर्थ कैरोलाइना में ही मिट रोमनी को जीत मिली बाकी सारे राज्य मामूली अंतर से ओबामा के पक्ष में चले गए. उम्मीद की जा रही है कि आखिरी नतीजा आने तक ओबामा के पास 300 से ज्यादा सीटें होंगी. जीत के बाद ओबामा ने कहा, "इन चुनावों में आप अमेरिकी लोगों ने हमें याद दिलाया है कि हमारा रास्ता कठिन है, हमारा सफर लंबा है लेकिन हम उठ खड़े हुए हैं, हम लड़ रहे हैं. हम अपने दिलों में जानते हैं कि अमेरिका का सर्वश्रेष्ठ अभी आना बाकी है."

मिट रोमनी बड़े कारोबारी हैं, एक दक्ष गवर्नर और खेल का रुख पलटने में माहिर, लेकिन व्हाइट हाउस में पहुंचने का छह साल पुराना उनका अभियान मंगलवार को ध्वस्त हो गया. धीमी अर्थव्यवस्था और ओबामा के लिए रुढ़िवादियों के मन में गुस्से के बावजूद रोमनी चुनाव नहीं जीत सके. उनकी जीत देश को पहला मॉरमॉन राष्ट्रपति देती लेकिन 2008 में प्राथमिक उम्मीदवारी जीतने के बाद चमत्कारी रूप से उनकी वापसी राष्ट्रपति की ताजपोशी में नहीं बदल सकी. मैसेच्यूसेट्स के गवर्नर के राजनीतिक करियर पर इस हार ने पूर्ण विराम लगा दिया है.

रोमनी को सबसे बड़ा नाउम्मीदी ओहायो से हुई है जिस पर बहुत हद तक राष्ट्रपति चुनावों के नतीजे तय करने का दारोमदार था. ओहायो को अपने पक्ष में करने के लिए रोमनी और ओबामा ने पूरी ताकत लगा रखी थी. यहां तक कि प्रचार अभियान के आखिरी वक्त में चुनाव के वक्त रोमनी ओहायो में ही थे लेकिन ओबामा मामूली अंतर से ओहायो और अमेरिका जीत ले गए. वर्जीनिया ऐसा राज्य है जिसने ओबामा के रूप में 1964 के बाद पहली बार किसी डेमोक्रेट को राष्ट्रपति बनने के लिए वोट दिया है.

यह हाल तब है जब वो लगातार अपने वादे पूरे न कर पाने के आरोपों से जूझ रहे हैं. जिस वक्त ओबामा की जीत का परचम पूरे अमेरिका में लहरा रहा है, उसी वक्त देश में बेरोजगारी का आंकड़ा 7.9 फीसदी को छू रहा है. मिट रोमनी ने तुरंत हार तो नहीं मानी लेकिन कहा है कि वो राष्ट्रपति बराक ओबामा की कामायाबी के लिए दुआ मांगेंगे. राष्ट्रपति बराक ओबामा का अभी भी उन्हीं मुद्दों से जूझना है जिनसे वह चार साल पहले जूझ रहे थे. फर्क सिर्फ इतना है कि बीते चार साल में ऑटो और बैंकिंग सेक्टर में कुछ जान फूंक कर, स्वास्थ्य सेवाओं में सुधार लागू कर उन्होंने चुनौतियों को थोड़ा आसान बना लिया है. हालांकि अभी उनके सामने सबसे बड़ी चुनौती 10 खरब डॉलर के सालाना बजट घाटे से निबटना और करीब 160 खरब डॉलर के कर्ज को घटाना है. इसके साथ ही संसद से अपनी बात मनवाना भी एक बड़ी चुनौती है जो पार्टियों के दायरे में फंसी हुई है.

राष्ट्रपति चुनाव के साथ ही सीनेट की एक तिहाई सीटों, 11 राज्यों के गवर्नर और कांग्रेस के चुनाव भी हुए हैं. अब तक के नतीजे बता रहे है कि डेमोक्रैट एक बार फिर सीनेट अपने पास रखने में कामयाब हुए हैं जबकि कांग्रेस पर रिपब्लिकन का कब्जा बरकरार रहेगा. जाहिर है कि ओबामा के लिए चुनाव में जीत से ज्यादा कठिन आगे की डगर होगी. ओबामा की जीत के साथ ही अगले चार साल के लिए अमेरिका के खर्च, टैक्स, स्वास्थ्य सेवाएं, सरकार की भूमिका और विदेश नीति की चुनौतियों का दायरा तय हो गया है. अमीरों को ज्यादा टैक्स देना होगा और सरकार के खर्चों में कुछ और इजाफा होगा.

एनआर/ओएसजे (डीपीए,एएफपी,रॉयटर्स)

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