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दुनिया

ओबामाकेयर: सरकार नयी लेकिन राजनीतिक मतभेद वही पुराने

अमेरिका में हेल्थकेयर सुधारों को लेकर राष्ट्रपति ट्रंप की नयी कांग्रेस में भी वैसे ही चुनौतियां सामने आ रही हैं, जैसी ओबामा के समय में आयी थीं. क्या ट्रंप के लिए अपने चुनावी वादों जैसा हेल्थकेयर बिल लाना आसान होगा.

अमेरिका में व्हाइट हाउस और सीनेट पर नियंत्रण और सदन में भी बहुमत में होने के बावजूद रिपब्लिकन पार्टी को 'फ्रीडम कॉकस' से चुनौती झेलनी पड़ रही है. सदन के रिपब्लिकन नेता आज एक बार फिर उसी तरह विभाजित दिख रहे हैं, जैसे राष्ट्रपति ओबामा के कार्यकाल में थे.

हाउस फ्रीडम कॉकस में 30 सदस्य हैं, जिनमें से ज्यादातर अल्ट्रा-कंजर्वेटिव नेता हैं. इनमें से अधिकतर नेता 2010 में ओबामा के अफोर्डेबल केयर एक्ट के विरोध में थे. बीते कई साल रिपब्लिकन नेताओं ने इस एक्ट का विरोध करते हुए बिताये हैं. अब डेमोक्रैट नेता ट्रंप की योजना के खिलाफ खड़े हैं. उसके ऊपर से खुद ट्रंप की रिपब्लिकन पार्टी को फ्रीडम कॉकस का समर्थन भी नहीं मिल रहा है.

ट्रंप एक ओर कंजर्वेटिव सांसदों को मनाने की कोशिश कर रहे हैं तो दूसरी ओर मॉडरेट्स को भी साथ लाना जरूरी है. कई कंजर्वेटिव मानते हैं कि ट्रंप की योजना अब भी सरकार के लिए बहुत महंगी पड़ेगी. ओबामाकेयर के अंतर्गत सरकार ने कई तरह की स्वास्थ्य बीमा योजनाओं को "बुनियादी स्वास्थ्य सुविधा" के दायरे में लायी थी, जिसके कारण खर्च बढ़ गया था. इन सुविधाओं में मैटरनिटी केयर, इमरजेंसी रूम और टीके जैसी प्रिवेंटिव सुविधाएं शामिल हैं.

कंजर्वेटिव नेताओं को इस पर आपत्ति है कि महंगा होने के कारण अगर ओबामाकेयर की जगह तथाकथित "ओबामाकेयर लाइट" बिल लाया जाना है, तो उस बिल में इन अतिरिक्त सुविधाओं को निरस्त करवाने जैसे सुधार जरूरी हैं. हाउस फ्रीडम कॉकस का कहना है इन सुधारों के बिना "केवल हेल्थकेयर सब्सिडी थोड़ी कम होगी, खत्म नहीं" और इससे और अधिक लोगों को भी बीमा दायरे में लाने का मकसद पूरा नहीं होगा.

ट्रंप की योजना में उच्च-आय वर्ग वाले परिवारों के लिए टैक्स बढ़ाकर उनके लिए मेडिकल केयर महंगा करने का प्रस्ताव है. ट्रंप का दावा है कि केवल इस कदम से ही अगले छह सालों में करीब 15 अरब डॉलर जमा होंगे, जिन्हें स्वास्थ्य सुविधाओं में लगाया जाएगा. वहीं एक नॉनपार्सिसन कांग्रेस बजट में अनुमान लगाया गया है कि रिपब्लिकन प्लान के कारण करीब 1.4 करोड़ अमेरिकी अगले साल से ही बीमा दायरे से बाहर हो जाएंगे.

अब सवाल फ्रीडम कॉकस पर आ टिका है. अगर वे ट्रंप का साथ देते हैं तो यह ट्रंप के लिए एक बड़ी जीत होगी. ओबामाकेयर के बाद और कठिन फैसले लेने में ट्रंप का आत्मविश्वास बढ़ेगा. लेकिन अगर कॉकस नहीं मानता तो रिपब्लिकन हेल्थकेयर प्लान औंधे मुंह गिरेगा. और यह बुनियादी सवाल भी उठेगा कि जीओपी में 237-193 से बहुमत में होने के बावजूद प्रशासन में रिपब्लिकन पार्टी की मर्जी नहीं चल पा रही है. इस पर विवादों के चलते सदन में वोटिंग को टालना पड़ा.

आरपी/ओएसजे (एपी,एएफपी)

   

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