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विज्ञान

ऑस्ट्रेलिया 10,000 घोड़े मारेगा

दस हजार घोड़ों को खत्म करने की योजना पर ऑस्ट्रेलिया की स्थानीय सरकारों ने काम शुरू कर दिया है. प्रशासन का कहना है कि भूमि को बचाने के लिए ऐसा करना जरूरी है, जबकि वन्य जीव संरक्षण से जुड़े लोग इससे नाराज हैं.

केंद्रीय भूमि काउंसिल का कहना है कि खाने और पीने के अभाव में हजारों घोड़े, गधे और ऊंट दम तोड़ रहे हैं. ऐसे में "मानवता और पर्यावरण" के मद्देनजर उन्हें मार देना ही सही है.

उनका यह भी कहना है कि ये बड़े जानवर पानी के गड्ढों को बर्बाद कर रहे हैं, जिससे कई प्रजातियों को नुकसान पहुंच रहा है क्योंकि दोनों प्रजातियां पीने के पानी के लिए इन्हीं पर निर्भर हैं.

यह मामला ऑस्ट्रेलिया और पूरी दुनिया में संवेदनशील बनता जा रहा है, लिहाजा इससे जुड़े सवाल पर अधिकारियों ने जवाब नहीं दिया कि क्या वाकई में घोड़ों को मार डालने का काम शुरू कर दिया गया है.

हालांकि ऑस्ट्रेलियन ब्रॉडकास्टिंग कॉर्पोरेशन ने रिपोर्ट दी है कि यह काम शुरू कर दिया गया है और आम लोगों की सेहत को ध्यान में रखते हुए चेतावनी जारी की गई है. उनसे कहा गया है कि वे एलिस स्प्रिंग के पास एक खास जगह से 300 किलोमीटर की दूरी पर रहें.

घोड़ों को मारने का तरीका बेहद विवादित है. हेलिकॉप्टर पर उड़ते शिकारी जमीन पर चर रहे घोड़ों को मारते हैं और सरकार इस काम के पैसे देती है. यह काम मध्य जून तक चलेगा.

घोड़ों से प्रेम करने वाले लोगों ने इस फैसले का जम कर विरोध किया लेकिन प्रशासन का कहना है कि यह घोड़ों और ऊंटों के ही हित में है कि उन्हें मार दिया जाए. ऑस्ट्रेलिया इसी तरह ऊंटों की संख्या पर भी नियंत्रण करता है.

काउंसिल निदेशक डेविड रॉस का कहना है, "कोई भी नुकसान नहीं सहना चाहता है, खास कर उन जमीन के मालिक हैं. वे भी घोड़ों को पसंद करते हैं लेकिन जानते हैं कि उनकी संख्या बढ़ने से क्या होगा." उन्होंने कहा, "हम उस इलाके में हवा से घोड़ों को गोली मार रहे हैं, जहां कम से कम 10,000 घोड़े बहुत बुरी दशा में जी रहे हैं. वे धीमी मौत मर रहे हैं और देश को भी नुकसान पहुंचा रहे हैं."

रॉस ने कहा कि हेलिकॉप्टर से घोड़ों को मारना ही सबसे अच्छा तरीका है क्योंकि घोड़े बड़े दायरे में फैले हैं और सड़कों से उन तक पहुंचना आसान नहीं है. उन्होंने कहा कि यह सही नहीं होगा कि पहले घोड़ों को पकड़ा जाए और फिर उन्हें 1,500 किलोमीटर दूर बूचड़खानों में ले जाकर मारा जाए.

ये घोड़े जिस जाति के हैं, उसके पुरखे औपनिवेशिक काल में न्यू साउथ वेल्स में पाले गए थे. बाद में इन्हें भारत में तैनात ब्रिटेन की सेना तक पहुंचाया गया था.

एजेए/एमजी (एएफपी)

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