1. Inhalt
  2. Navigation
  3. Weitere Inhalte
  4. Metanavigation
  5. Suche
  6. Choose from 30 Languages

दुनिया

ऑस्ट्रेलिया से यूरेनियम बेचने पर रोक खत्म करने की मांग

भारत के विदेश मंत्री एस एम कृष्णा ने ऑस्ट्रेलियाई विदेश मंत्री केविन रड से मुलाकात कर भारत को यूरेनियम बेचने पर लगी पाबंदी खत्म करने की मांग की है. मेलबर्न में गुरुवार को हुई दोनों नेताओँ की मुलाकात.

default

विदेश मंत्री एस एम कृष्णा ने इस मुलाकात में विकासशील देशों की बढ़ती ऊर्जा जरूरतों की तरफ ऑस्ट्रेलियाई विदेश मंत्री का ध्यान खींचा और यूरेनियम की बिक्री पर से पाबंदी खत्म करने की मांग की. मेलबर्न की रॉयल सोसाइटी ऑफ विक्टोरिया में दोनों नेताओं के बीच सातवें दौर की बातचीत में विजय लता रेड्डी और ऑस्ट्रेलिया में भारतीय उच्चायुक्त सुजाता सिंह भी शामिल हुईं. केविन रड के साथ भारत में ऑस्ट्रेलियाई उच्चायुक्त पीटर वर्गीज और विदेश मंत्रालय के दूसरे बड़े अधिकारी थे.

Australien / Rudd / Canberra

इस मौके पर एस एम कृष्णा ने कहा कि जलवायु परिवर्तन के कारण ये जरूरी है कि हम साफ ईंधन पर ध्यान दें.विशेषज्ञों ने यह माना है कि परमाणु ऊर्जा इस लिहाज से सबसे ज्यादा उपयुक्त है और भारत परमाणु ऊर्जा हासिल करने की दिशा में आगे बढ़ने के लिए प्रतिबद्ध है. उन्होंने यह भी कहा, "मेरे विचार से ये जरूरी है कि इस मामले पर हम ऑस्ट्रेलिया से बात करें. इनके पास यूरेनियम का भंडार है और दुनिया में खासतौर से भारत जैसे विकासशील देशों के लिए ऊर्जा पैदा करना इस वक्त सबसे जरूरी मसला है."

कृष्णा ने इस बात पर जोर दिया कि भारत के इरादे नेक हैं और वह यूरेनियम को सिर्फ ऊर्जा पैदा करने के लिए इस्तेमाल करना चाहता है. इसके साथ ही उन्होंने यह भी याद दिलाया कि परमाणु ऊर्जा के क्षेत्र में भारत अमेरिका, फ्रांस, अर्जेंटीना और कनाडा से पहले ही करार कर चुका है. कृष्णा ने साफ कहा कि परमाणु परीक्षण करने के बावजूद भारत पर एक जिम्मेदार परमाणु ताकत से लैस देश के रूप में भरोसा किया जा सकता है.

इससे पहले बुधवार को कृष्णा ने ऑस्ट्रेलिया के संसाधन, ऊर्जा और पर्यटन मंत्री मार्टिन फर्गुसन से यूरेनियम की बिक्री पर बातचीत की. हालांकि बातचीत के बाद फर्गुसन ने भारत को यूरेनियम बेचने से इंकार कर दिया.

ऑस्ट्रेलिया के पास दुनिया में यूरेनियम का सबसे बड़ा भंडार है लेकिन वह उन देशों को यूरेनियम नहीं बेचता जिन्होंने एनपीटी पर दस्तखत नहीं किए हैं. सत्ताधारी लेबर पार्टी ने 2007 में जॉन हॉवर्ड के दौर में हुए इस वादे को मानने से इंकार कर दिया जिसमें भारत को यूरेनियम बेचने की बात कही गई थी. इस फैसले ने भारतीय नेताओं को खासा नाराज किया. हालांकि विदेश मंत्री का कहना है कि इस मसले से दोनों देशों के आपसी संबंधों पर कोई असर नहीं पड़ा है.

इस बीच ऑस्ट्रेलियाई विदेश मंत्री केविन रड ने बातचीत में कॉमनवेल्थ खेलों में काम करने वाली कंपनियों के बिल न चुकाए जाने का मसला भी उठाया. इस पर एस एम कृष्णा ने कहा कि दिल्ली लौट कर वह इस बारे में संबंधित अधिकारियों से बात कर इस मसले को निबटाएंगे. कॉमनवेल्थ खेलों के दौरान ऑस्ट्रेलिया की कई कंपनियों ने खेलों के आयोजन से जुड़े काम किए थे जिनका भुगतान अभी तक नहीं हुआ है. सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक यह रकम करोड़ो में है. केविन रड ने एस एम कृष्णा से इस मसले पर हुई बातचीत पर संतोष जताया है.

रिपोर्टः एजेंसियां/एन रंजन

संपादनः उज्ज्वल भट्टाचार्य

DW.COM

WWW-Links