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विज्ञान

ऑस्ट्रेलिया में कार्बन टैक्स पर विवाद

ऑस्ट्रेलिया सरकार द्वारा विवादास्पद कार्बन टैक्स हटाने के फैसले की पर्यावरण संरक्षक समूह निंदा कर रहे हैं. ऊर्जा कुशलता बढ़ाने के लिए कंपनियों को फायदा दिए जाने की बात को तो वैज्ञानिक "बेवकूफी की आंधी" बता रहे हैं.

जब दुनिया भर के देशों से कार्बन उत्सर्जन में कमी और पर्यावरण संरक्षण में हाथ बंटाने की अपील की जा रही है, ऑस्ट्रेलिया के इस फैसले की भारी आलोचना हो रही है. ऑस्ट्रेलिया दुनिया का सबसे बड़ा कोयले का निर्यातक है और ग्रीन हाउस गैसों के उत्सर्जन में भी वह बड़ा भागीदार है. आलोचना करने वालों में ईयू के पर्यावरण कमिश्नर कोनी हेडेगार्ड भी शामिल हैं.

ऑस्ट्रेलियाई चैंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री के प्रमुख केट कार्नेल इसे फायदे का फैसला मानते हैं. उनके मुताबिक, "कार्बन टैक्स ऑस्ट्रेलियाई अर्थव्यवस्था पर बोझ की तरह था और इसे हटाने का फैसला ग्राहकों की जीत है. यह ऊर्जा का इस्तेमाल करने वालों समेत उद्योग की जीत है." कार्बन टैक्स को हटाने का फैसला लेने वाली प्रधानमंत्री टोनी एबॉट की सरकार का कहना है कि ग्राहकों को भारी बिल भर कर कार्बन टैक्स की कीमत अदा करनी पड़ रही थी.

विवाद की जड़

कार्बन टैक्स लगाने का कानून 2011 में ऑस्ट्रेलिया के निचले सदन में बहुत कम बहुमत के साथ पारित हुआ था. इसके तहत प्रदूषण फैलाने वाली बड़ी फैक्ट्रियों को प्रति टन कार्बन डाइ ऑक्साइड के उत्सर्जन पर 25.40 डॉलर कार्बन टैक्स देना तय हुआ. ये कदम जलवायु परिवर्तन के खतरे को कम करने की रणनीति के तहत उठाया गया था. लेकिन ऑस्ट्रेलिया में कार्बन टैक्स विवादास्पद रहा है.

इसके विकल्प में सरकार ने डायरेक्ट एक्शन प्लान प्रस्तावित किया है, जिसे संसद के ऊपरी सदन में समर्थन की जरूरत होगी. इस योजना के मुताबिक कंपनियों को उत्पादन में कम ऊर्जा के बेहतर इस्तेमाल के लिए आर्थिक फायदा दिया जाएगा, जबकि कार्बन टैक्स के मुताबिक ज्यादा प्रदूषण करने वाली कंपनियों को उत्सर्जन टैक्स देना पड़ता था. पर्यावरण मंत्री ग्रेग हंट ने उम्मीद जताई कि संसद में 2.55 अरब ऑस्ट्रेलियाई डॉलर की इस योजना को समर्थन मिलेगा.

फैसले की आलोचना

विक्टोरिया इंस्टीट्यूट ऑफ स्ट्रैटीजिक इकोनॉमिक स्टडीज के रिसर्चर रॉजर जोंस ने कार्बन टैक्स हटाने के फैसले को बहुत बड़ी "बेवकूफी" करार दिया. उन्होंने कहा, "खराब पॉलिसी और घटिया तर्क का इससे अच्छा उदाहरण मुश्किल है." वह इसे पर्यावरण की तरफ लापरवाह रवैया मानते हैं.

कार्बन टैक्स हटा देने से ऑस्ट्रेलिया 2020 तक अपने ग्रीनहाउस गैसों के उत्सर्जन को कम से कम पांच फीसदी कम करने के मकसद से बहुत दूर दिखाई दे रहा है. एबॉट सरकार के इस पैसले की विपक्ष ने भी जम कर निंदा की और माना कि इससे ऑस्ट्रेलिया की अतरराष्ट्रीय छवि पर असर पड़ेगा.

यूनिवर्सिटी ऑफ मेलबर्न के पर्यावरण विभाग के वरिष्ठ विश्लेषक रॉजर डार्गविल मानते हैं कि डायरेक्ट एक्शन प्लान अर्थव्यवस्था को मदद करने का सही तरीका नहीं है. उन्होंने बताया, "2012 में जब स्वच्छ ऊर्जा बिल लाया गया तो ऑस्ट्रेलिया के बिजली उत्पादन में होने वाले उत्सर्जन में फौरन भारी कमी हुई. यह कमी कोयले की जगह गैस और हाइड्रो पावर के इस्तेमाल की वजह से हुई थी." यह परिवर्तन कार्बन की कीमत चुकाने से जुड़ा था.

एसएफ/एमजे (एएफपी)

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