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जर्मन चुनाव

ऑस्ट्रेलिया में ऐतिहासिक जोड़ तोड़ शुरू

ऑस्ट्रेलिया में अभी भी चुनाव के नतीजों की तस्वीर पूरी तरह साफ नहीं हो पाई है, लेकिन देश त्रिशंकु संसद की ओर बढ़ रहा है. ऐसे में वहां पार्टियों के बीच जोड़ तोड़ शुरू हो गया है. हालांकि जानकार जल्द दोबारा चुनाव देख रहे हैं

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अब सरकार बनानी है

शनिवार को डाले गए वोटों की गिनती पूरी होने में और आखिरी नतीजा आने में अभी काफी वक्त लगेगा, लेकिन अल्पसंख्यक और आजाद सांसदों को भाव बढ़ चुके हैं. प्रधानमंत्री जूलिया गिलार्ड ने इशारा किया है कि वह सत्ता में बनी रहना चाहती हैं और इसके लिए उन्होंने आजाद उम्मीदवारों के साथ बातचीत भी शुरू कर दी है. उधर विपक्ष के नेता टोनी एबट भी पीछे नहीं हैं और उन्होंने भी सरकार बनाने के लिए जोड़तोड़ का काम शुरू कर दिया है.

कम से पांच अल्पसंख्यक और आजाद सांसद ऐसे हैं जिनका फैसला सरकार बनाने में अहम साबित हो सकता है. इन्हीं के फैसले पर यह तय होगा कि अगली संसद की तस्वीर कैसी होगी. चूंकि 70 साल के इतिहास में ऑस्ट्रेलिया में पहली बार ऐसा हो रहा है कि किसी पार्टी को बहुमत नहीं मिला है, तो लोग हैरान भी हैं और परेशान भी. ऑस्ट्रेलियन नैशनल यूनिवर्सिटी में पढ़ाने वाले राजनीतिक विश्लेषक नॉर्मन एब्जॉर्न्सेन कहते हैं, "हम इस स्थिति से बिल्कुल अनजान हैं. पिछले 70 साल में हमने ऐसी स्थिति नहीं देखी है इसलिए इस हल करने के लिए कोई सामान्य नियम ही नहीं है."

नॉर्मन कहते हैं कि हमें एक थोड़ी देर तक चल पाने वाली सरकार नजर आ रही है और यह स्थिति बहुत अस्थिर और अनिश्चितता पैदा करती है.

पिछले चुनाव में पूरी तरह साफ हो गए विपक्ष ने इस बार जबर्दस्त वापसी करते हुए पांच पर्सेंट वोट का मुनाफा कमाया है लेकिन टोनी एबट के नेतृत्व में उनका सरकार बनाने के लिए जरूरी 76 सीटों तक पहुंच पाना मुश्किल लग रहा है. विशेषज्ञ निक इकोनोमोउ कहते हैं कि अब यह स्थिति वाम रुझान वाली ग्रीन्स पार्टी और आजाद सांसदों के साथ मोल तोल के जरिए ही हल हो पाएगी. लेकिन मोनाश यूनिवर्सिटी में पढ़ाने वाले निक यह भी कहते हैं कि कोई भी हल ज्यादा कारगर साबित नहीं हो पाएगा. वह कहते हैं, "जो भी सरकार बनाएगा उसकी संसद में हालत बहुत बहुत तंग रहेगी. ऐसे में कुछ भी कर पाना मुश्किल हो जाएगा." ऐसे में जानकारों को लगता है कि डेढ़ साल के भीतर ही दोबारा चुनाव हो सकते हैं.

रिपोर्टः एजेंसियां/वी कुमार

संपादनः ओ सिंह

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