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विज्ञान

ऑस्ट्रेलिया ने सिगरेट कंपनियों का धुआं उड़ाया

धुआं उड़ाने में खत्म होती जिंदगी को बचाने के लिए ऑस्ट्रेलिया की सरकार ने सिगरेट सादे पैकेटों में बेचने का फैसला लागू कर दिया है. सिगरेट का सादा डिब्बा चेतावनी देती तस्वीरों से भरा है, शायद कश भरने वालों को अक्ल आ जाए.

सिगरेट से ग्लैमर हटाने के लिए ऑस्ट्रेलियाई सरकार ने इस कदम का एलान किया है जो शनिवार से पूरे देश में लागू हो गया. सरकार मानती है कि इस कदम से युवाओं को धूम्रपान से दूर किया जा सकेगा. दुनिया में अपनी तरह का यह पहला कानून है जो बड़ी तंबाकू कंपनियों की दमदार चुनौती के बावजूद अमल में आया है.

सभी कंपनियों की सिगरेट एक ही तरह के जैतूनी रंग के पैकेट में आएंगी जिनका ज्यादातर हिस्सा सेहत से जुड़ी चेतावनियों से ढंका होगा. सिगरेट कंपनी का लोगो बहुत छोटा होगा. डिब्बे के ज्यादातर भाग में सड़ी हुई टांगें, मुंह के कैंसर या कंकाल जैसे शरीर में मरते इंसान की डरावनी तस्वीरें भी होंगी. सिडनी की एक दुकान के कैशियर ने बताया कि बहुत से ग्राहक नए पैकेट को सिगरेट छुड़ाने वाला मान रहे हैं. सांजिद अमात्य ने कहा कि सिगरेट पीने वाले तस्वीर देख कर सिगरेट का पैकेट चुन रहे है क्योंकि किसी के लिए सड़ा हुआ पैर देखना मुश्किल हो रहा है तो किसी के लिए बीमार बच्चे पर सिगरेट के धुएं का असर. वैसे बहुत से लोग ऐसे भी हैं जिन पर इन तस्वीरों का का कोई असर नहीं.

कुछ लोगों ने सिगरेट केस रखना शुरू किया है जिससे कि वो इन तस्वीरों को देखने से बच सकें. सिगरेट के खुदरा व्यापारी अनास हसन बताते हैं, "वे नफरत करते हैं, मैं सिगरेट पीता हूं और मैं भी इससे नफरत करता हूं."

सिगरेट के खिलाफ अभियान चलाने वाले लोग इस फैसले से खुश हैं. सिगरेट के डिब्बे पर सामने के 75 फीसदी हिस्से पर चेतावनी वाले ग्राफिक्स जरूरी कर दिए गए हैं. सिगरेट के पैकेट का पीने वालों पर असर का पता लगाने के लिए रिसर्च करने वाली संस्था एक्शन ऑन स्मोकिंग एंड हेल्थ (एएसएच) से जुड़े स्टैफोर्ड सैंडर्स का कहना है, "यह लोगों को स्वास्थ्य से जुड़ी चेतावनियों के बारे में ज्यादा जागरुक बना सकता है. इसके साथ ही यह पैकेटों के जरिए लोगों को गुमराह करने से भी रोकेगा." सैंडर्स मानते हैं कि कुछ लोग इन तस्वीरों से काफी विचलित हुए हैं पर उनका कहना है, "इन तस्वीरों को परेशान करने वाला होना ही चाहिए. इनका असर होना जरूरी है. अगर यह तस्वीरें एक बच्चे को भी सिगरेट पीने से रोक लेती हैं तो इससे दूसरों की नाराजगी का मोल वैसे ही खत्म हो जाएगा."

21 साल की लूसिया ब्रूक्स ने सिगरेट के पैकेट पर लिखी चेतावनी पर ध्यान नहीं दिया. वो कहती हैं, "मैं तनाव से भरी एक यूनिवर्सिटी स्टूडेंट हूं मैं निश्चित रूप से एक दिन सिगरेट छोड़ दूंगी लेकिन मैं अभी यह नहीं छोड़ना चाहती."

ऑस्ट्रेलिया में 1950 के दशक में करीब आधी आबादी सिगरेट पीती थी जो अब घट कर 15 फीसदी पर आ गई है. सरकार इसे और घटा कर 2018 तक 10 फीसदी पर ले जाना चाहती है. 80 फीसदी से ज्यादा 18 साल की उम्र से पहले सिगरेट पीना शुरू करते हैं जबकि 99 फीसदी यह आदत 26 की उम्र में पहुंचने से पहले पकड़ लेते हैं. स्वास्थ्य विभाग से जुड़ी संस्थाओं को उम्मीद है कि नया कदम युवाओं पर काफी असर करेगा. स्वास्थ्य मंत्री तान्या प्लिबेर्सेक ने कानून लागू होने से एक दिन पहले शुक्रवार को कहा, "अगर हम युवाओं को इसे अपनाने से रोक सकें तो यह उनके लिए जिंदगी भर का तोहफा होगा." ऑस्ट्रेलिया में सिगरेट ऐसी मौतों की एक बड़ी वजह है जिसे रोका जा सकता है. हर साल इसकी वजह से करीब 15,000 लोग अपनी जान गंवाते हैं. सरकार ने कहा है कि कानून का पालन कराने में छोटी मोटी गलतियों पर तो ज्यादा बड़ी सजा नहीं होगी लेकिन जान बूझ कर कानून तोड़ने वालों पर 10 लाख अमेरिकी डॉलर तक का जुर्माना लगेगा.

ऑस्ट्रेलिया के फैसले पर भारत और ब्रिटेन की भी नजर है. दोनों देश देखना चाहते हैं कि ऑस्ट्रेलिया तंबाकू कंपनियों के खिलाफ कारगर ढंग से लड़ सकता है या नहीं. अगर ऑस्ट्रेलिया की जीत हुई तो भारत और ब्रिटेन भी इस राह पर आगे बढ़ सकते हैं. सिगरेट कंपनियां ऑस्ट्रेलिया सरकार के खिलाफ विश्व व्यापार संघ में शिकायत करने की तैयारी कर रही है. कंपनियों का तर्क है कि उन्हें अपने सामान का प्रचार करने का पूरा अधिकार है.

एनआर/ओएसजे (एएफपी)

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