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दुनिया

ऑस्ट्रेलिया चले पंजाबी किसान

पंजाब के कई किसान अपने खेत बेच कर ऑस्ट्रेलिया और कनाडा में खेती कर रहे हैं. पंजाब में ज़मीन के दाम विदेश की तुलना में कई गुणा अधिक हैं.

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पंजाब प्रांत की राजधानी चंडीगढ़ के आस पास कई खेत हैं. यहीं पुनीत भल्ला के परिवार के भी खेत हुआ करते थे जो कई पीढ़ियों से उनके पास थे. लेकिन हाल ही में उन्होंने अपने खेत बेच दिए. पुनीत एक उद्योगपति हैं और अपने फैसले पर उन्हें कोई पछतावा नहीं है. उनका कहना है कि उन खेतों से कोई खास कमाई नहीं हो रही थी. ऐसे में उन्हें कई लोगों ने खेत बेच कर किसी अन्य व्यवसाय में निवेश करने का सुझाव दिया. कई लोगों ने कहा कि विदेश में कारोबार में निवेश करना भी अच्छा रहेगा.

Indien Ackerland in Punjab

खेती बाड़ी पंजाब का मुख्य व्यवसाय है और राज्य की अर्थव्यवस्था में इसकी बड़ी भूमिका है. भारतीय बाज़ार में ज़्यादातर खाद्यान्न यहीं से आता हैं. पिछले कुछ सालों में पंजाब में ज़मीन की कीमतें आसमान छू रही है. ऐसे में यदि कोई किसान अपनी 5-6 एकड़ जमीन बेचता है तो वह विदेश में उसी राशि से काफी जमीन खरीद सकता है.

ऑस्ट्रेलिया और कनाडा जा रहे हैं पंजाब के किसान

कई किसान पहले ही पंजाब से ऑस्ट्रेलिया और कनाडा जा कर बस चुके हैं और अब वहां खेती कर रहे हैं. खुशवंत सिंह होशियारपुर के एक किसान हैं, जो कहते है कि कई देशों की इस तरह की आप्रवास नीतियां हैं कि आप वहां कृषि के लिहाज़ से ज़मीन खरीद कर वहां बस सकते हैं. "मुझे लगता है कि पंजाब में कानून के लिहाज़ से स्थिति बिगड़ती जा रही है, और लोग एक बेहतर जीवन शैली की आशा में विदेश की ओर देख रहे हैं."

ऑस्ट्रेलिया आकार में भारत से तिगुना है लेकिन उसकी महज़ 2.2 करोड़ की आबादी पंजाब की आबादी से भी कम है. ऑस्ट्रेलिया में लगभग 85 प्रतिशत कृषि भूमि व्यर्थ पड़ी है. इसलिए सरकार ने विदेशियों के लिए दरवाज़े खोल दिए हैं. सरकार चाहती है कि बाहर से लोग वहां आएं, ज़मीन खरीदें, वहीं रहें और उस ज़मीन को उपजाऊ बनाएं.

किसानों को रिझाने के लिए पंजाब कृषि विश्वविद्यालय में नए कोर्स

पंजाब कृषि विश्वविद्यालय ने अब यांत्रिक खेती के लिए खास कोर्स भी निकाले हैं. साथ ही वहां यह भी सिखाया जा रहा है कि विदेशी फल और सब्जियों को किस तरह से उगाया जा सकता है. लेकिन इसका कुछ खास फ़ायदा होता नहीं दिख रहा. कल्तार सिंह पंजाब में अपनी ज़मीन बेच कर न्यूजीलैंड में बस गए हैं. वे तीन साल से वहां रह रहे हैं. वे बताते हैं कि पंजाब में यांत्रिक रूप से खेती बाड़ी करना आसान नहीं है. "मैंने देखा कि पंजाब में कृषि की हालत कुछ खास अच्छी नहीं है, इसकी वजह यही है कि किसानों के पास काफी छोटी ज़मीनें हैं, और बड़े आकार की ज़मीनों के बिना खेती बाड़ी को मशीनों द्वारा नए रूप से करना मुमकिन नहीं है. इसीलिए आपको मुनाफा भी कम ही मिलता है."

रियल एस्टेट एजेंट खरीद रहे हैं ज़मीन

कम मुनाफों के चलते किसान रियल एस्टेट डीलर के लुभावने प्रस्तावों को मना नहीं कर पाते. चंडीगढ़ के आस पास पिछले कुछ समय से लगातार नई इमारतों का निर्माण हो रहा है. नए इन्फ्रास्ट्रक्चर को बनाने के चक्कर में डेवलपर पंजाब भर में खेतों पर नजर गड़ाए हुए हैं. किसान भी एक अच्छी रकम ले कर फटाफट देश से बाहर निकलने के अवसर को खोना नहीं चाहते.

खुशवंत सिंह मानते हैं कि यह प्रवृत्ति भविष्य में भी जारी रहेगी. "यह तो चलता ही रहेगा. पर साथ ही मैं ऐसे भी कई लोगों को जानता हूं जो लम्बे समय से विदेश में रह रहे हैं और अब यहां निवेश के रूप में ज़मीन खरीद रहे हैं. यह सब तो आर्थिक और सामाजिक स्थिति पर निर्भर करता है." बहरहाल ऑस्ट्रेलिया और कनाडा के बाद कई पंजाबी अब अफ्रीका में भी अवसर तलाश रहे हैं.

रिपोर्ट: मुरली कृष्णन/ईशा भाटिया

सम्पादन: महेश झा

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