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ताना बाना

ऑस्ट्रेलिया को मिला पहला अबॉरिजीनी एमपी

केन व्याट ऑस्ट्रेलियाई संसद में पहुंचने वाले पहले अबॉरिजीनी बन गए हैं. अबॉरिजीनी ऑस्ट्रेलिया के मूल निवासियों को कहते हैं. व्याट का कहना है कि उन्होंने न सिर्फ गरीबी का, बल्कि नस्लवाद का भी खूब सामना किया है.

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व्याट विपक्षी नेता टोनी अबॉट की लिबरल पार्टी से जुड़े हैं. रविवार को जब उन्हें पश्चिमी ऑस्ट्रेलिया में हासलक सीट से विजेता घोषित किया गया तो उन्होंने चुनाव के दौरान मिले सभी नफरत भरे मेलों का जवाब दिया. वह कहते हैं, "यह मेरे लिए कोई नई बात नहीं है. 60, 70 और 80 के दशक में एक अबॉरिजीनी की तरह बड़े होते हुए मैंने ऐसी बहुत सी बातों का सामना किया है."

जब व्याट से नफरत भरे संदेशों के बारे में ज्यादा पूछा गया तो उन्होंने कहा कि इस दिन ऐसी बातों की ज्यादा चर्चा करना ठीक नहीं है. उनके मुताबिक, "इन बातों को छोडिए. अहम बात यह है कि हम ऑस्ट्रेलिया को किस दिशा में आगे ले जाते हैं और सोचें कि यह समाज वैसा ही बने जैसा हम चाहते हैं."

लिबरल पार्टी की उपनेता जूली बिशप ने व्याट को बधाई दी और कहा कि लिबरल पार्टी में नस्लवाद के लिए कोई जगह नहीं है. उनके मुताबिक, "जहां तक लिबरल पार्टी का सवाल है, तो नस्लवाद को किसी भी सूरत में स्वीकार नहीं किया जाएगा. मुझे लगता है कि केन सभी ऑस्ट्रेलियाई लोगों के लिए आर्दश साबित होंगे. वह अब संसद का हिस्सा बन गए हैं. इसलिए इस तरह की नफरत कम होने की उम्मीद है." ऑस्ट्रेलिया की दो करोड़ बीस लाख की आबादी में पांच लाख अबोरिजीनी लोग हैं, जिन्हें इस विशाल महाद्वीप का मूल निवासी समझा जाता है. लेकिन सामाजिक और राजनीतिक रूप से उनकी स्थिति ज्यादा अच्छी नहीं रही है.

हाल ही में ऑस्ट्रेलिया में हुए आम चुनावों में किसी भी पार्टी को बहुमत नहीं मिला. प्रधानमंत्री जूलिया गिलार्ड और विपक्षी नेता टोनी अबॉट के बीच सरकार बनाने के लिए कड़ी रस्साकशी चल रही है. सत्ताधारी लेबर पार्टी को 72 सीटें मिली हैं जबकि लिबरल पार्टी ने 73 स्थानों पर कामयाबी हासिल की. सरकार बनाने के लिए 150 सदस्यों की संसद में 76 सांसदों की जरूरत होती है. सरकार बनाने का दारोमदार अब निर्दलीय सांसदों पर टिका है.

रिपोर्टः एजेंसियां/ए कुमार

संपादनः ओ सिंह

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