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दुनिया

ऑस्ट्रेलिया की कैद में आदिवासी बच्चों को यातना

ऑस्ट्रेलिया में युवा कारावास में आदिवासी बच्चों के उत्पीड़न का मामला सामने आने के बाद संयुक्त राष्ट्र के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा है कि ये घटना यूएन उत्पीड़न संधि का हनन हो सकती है.

सीसीटीवी फुटेज के सामने आने के बाद ऑस्ट्रेलिया के उत्तरी क्षेत्र ने बाल कैदियों के खिलाफ हुड और कंट्रोल में रखने के कदमों के इस्तेमाल को रोक दिया गया है. वीडियो फुटेज में बच्चों के ऊपर टीयर गैस का इस्तेमाल और एक अधनंगे कैदी को सर ढक कर कुर्सी से बंधे हुए देखा जा सकता है. ऑस्ट्रेलिया के प्रधानमंत्री मैल्कम टर्नबुल ने बच्चों के साथ हुए दुर्व्यवहार की जांच के लिए एक रॉयल कमीशन का गठन किया है लेकिन राष्ट्रीय जांच ठुकरा दी है.

उत्पीड़न पर संयुक्त राष्ट्र के रिपोर्टर खुआन मेंडेस ने कहा है कि वीडियो से पता चलता है कि बच्चों का उत्पीड़न हुआ हो सकता है. उन्होंने जांच आयोग गठित किए जाने का स्वागत किया है लेकिन चेतावनी दी है कि उसके दायरे को छोटा ना किया जाए. उन्होंने कहा, "वीडियो और प्रेस रिपोर्टिंग के आधार पर कुछ कहना मुश्किल है. लेकिन मैं समझता हूं कि यह बहुत ही चिंताजनक बात है, जो उत्पीड़न या हर हाल में क्रूर, अमानवीय और अपमानजनक हो सकता है."

वीडियो फुटेज में छह ऑस्ट्रेलियाई आदिवासियों को नंगा करते, सर ढक कर कुर्सी से बांधे जाते और गले में धक्का देकर सेल में धकेले जाते और लंबे समय तक एकांत कैद में देखा जा सकता है. यह वीडियो 2010 से 2014 के बीच डार्विन के निकट डॉन डेल यूथ डिटेंशन सेंटर में रिकॉर्ड हुए हैं. नॉर्दर्न टेरिटरी के बाल कमिश्नर की 2015 की रिपोर्ट में गार्डों के व्यवहार में गलती पाई गई. फुटेज का प्रसारण करने वाली सरकारी प्रसारण संस्था ऑस्ट्रेलियन ब्रॉडकास्टिंग कॉर्पोरेशन का कहना है कि जांच रिपोर्ट के नतीजों को तत्कालीन जेल प्रमुख ने नहीं माना. रिपोर्ट के सामने आने के फौरन बाद नॉर्दर्न टेरिटरी के जेल मंत्री को बर्खास्त कर दिया गया.

यह मामला आदिवासी बच्चों के असमान अनुपात में जेल में होने की समस्या की ओर ध्यान दिलाता है. ऑस्ट्रेलिया के मूल निवासियों के नेता राजनीतिज्ञों से देश में आदिवासियों के साथ व्यवहार के जुड़े मुद्दों पर कदम उठाने की मांग कर रहे हैं. ऑस्ट्रेलिया की आबादी में आदिवासियों का हिस्सा सिर्फ 3 प्रतिशत है लेकिन देश में बंद कैदियों में उनका हिस्सा 27 प्रतिशत है. नॉर्दर्न टेरिटरी के किशोर कैदियों में उनकी संख्या 94 प्रतिशत है. देश की 2.3 करोड़ आबादी में आदिवासियों की संख्या करीब 7 लाख है और तकरीबन हर आर्थिक और सामाजिक सूचकांक में उनका निचला स्थान है.

एमजे/आरपी (रॉयटर्स)

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