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जर्मन चुनाव

ऑस्ट्रेलिया और इंग्लैंड में खिताबी भिड़ंत

ट्वेन्टी 20 वर्ल्ड कप में आज क्रिकेट के दो सबसे पुराने प्रतिद्वंद्वियों इंग्लैंड और ऑस्ट्रेलिया के बीच खिताबी मुकाबला है. क्लार्क और कॉलिंगवुड की टीमें आमने सामने है और टी 20 कप पहली बार एशिया से बाहर जा रहा है.

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क्रिकेट के बादशाह

वैसे तो दोनों टीमों में यह लड़ाई ऐशेज सीरीज के लिए होती है लेकिन इस बार ऑस्ट्रेलिया और इंग्लैंड वर्ल्ड कप के खिताबी मुकाबले में आमने सामने हैं. 1987 में भारत में खेले गए वनडे वर्ल्ड कप के बाद यह दोनों टीमें पहली बार किसी वर्ल्ड कप फाइनल में भिड़ने को तैयार हैं. जाहिर है, इन मुकाबला सिर्फ मैच नहीं, बल्कि नाक की लड़ाई के तौर पर देखा जा रहा है.

Cricket Ashes Cup Englad Australien Juli 2009

ऐशेज जैसा मुकाबला

यूं तो ऑस्ट्रेलिया की टीम को आंख बंद कर ज्यादा मजबूत बताने वालों की कमी नहीं लेकिन हाल के दिनों में इंग्लैंड ने जैसा खेल दिखाया है, उसे कम करके आंकना पैर पर कुल्हाड़ी मारने जैसा होगा. अगर डकवर्थ लेविस नियम के नतीजे को छोड़ दिया जाए, तो दोनों ही टीमों ने इस वर्ल्ड कप में अभी तक एक भी हार का सामना नहीं किया है.

पॉल कॉलिंगवुड की अगुवाई में और केविन पीटरसन के बल्ले के साथ इंग्लैंड की क्रिकेट टीम इस वक्त दुनिया की सबसे शक्तिशाली टीमों में एक है और धीरे धीरे बुलंदियों पर पहुंच रही है. हालांकि वेस्ट इंडीज में खेले जा रहे 2010 टी 20 वर्ल्ड कप में टीम की शुरुआत अच्छी नहीं रही. इंग्लैंड को पहला मैच वेस्ट इंडीज से गंवाना पड़ा क्योंकि बारिश के बाद डकवर्थ लेविस नियम लगाया गया, जिसमें इंग्लैंड की हार हुई.

कॉलिंगवुड की टीम के लिए दूसरा मैच पहले से भी खराब साबित हुआ और आयरलैंड जैसी कमजोर टीम के खिलाफ कोई नतीजा ही नहीं निकल पाया. इस तरह इंग्लैंड के खाते से जीत के अंक छिन गए. पिछले वर्ल्ड कप में भी इंग्लैंड को कुछ ऐसी ही शुरुआत का सामना करना पड़ा था, जब नीदरलैंड्स ने उसे पहले मैच में हरा दिया था.

लेकिन दो मैचों के बाद टीम लय में आ गई और उसके बाद जीत का दरवाजा खुल गया. पाकिस्तान, श्रीलंका, न्यूजीलैंड या दक्षिण अफ्रीका, जो भी रास्ते में आया, पिटता चला गया. इंग्लैंड ने पिछले साल के चैंपियन पाकिस्तान पर जीत के साथ अपना लय हासिल किया और फिर लगातार जीत हासिल की.

Paul Collingwood England Cricket

कॉलिंगवुड की कला

सुपर 8 में दक्षिण अफ्रीका की मजबूत टीम को और सेमीफाइनल में श्रीलंका को जिस तरह आसानी से हराया, उससे पता लगता है कि टीम कितने भरोसे में है. पीटरसन में रनों की भूख दिख रही है, जबकि कप्तान कॉलिंगवुड और ग्रेम स्वैन जैसे खिलाड़ी पूरे फॉर्म में हैं.

लेकिन क्रिकेट इतिहास की सबसे मजबूत टीम समझी जाने वाली टीम ऑस्ट्रेलिया हमेशा से किसी भी खिताब की सबसे बड़ी दावेदार होती है. इस बार भी है. माइकल क्लार्क ने जब से टी 20 टीम की कप्तानी संभाली है, ऑस्ट्रेलिया ने क्रिकेट के इस सबसे छोटे स्वरूप को बेहद गंभीरता से लिया है और लगातार जीत पर जीत दर्ज करता जा रहा है. इस वर्ल्ड कप में ऑस्ट्रेलिया ने अब तक एक भी मैच नहीं हारा है औऱ सेमीफाइनल में तो उसने चमत्कारी ढंग से पाकिस्तान के हाथ से जीत छीन ली थी.

माइकल क्लार्क और डेविड हसी के अलावा डेविड वार्नर, शेन वाटसन और कैमरन व्हाइट जैसे खिलाड़ी हैं, जो किसी भी मैच का पासा पलट सकते हैं. तीन साल पहले 2007 के वनडे वर्ल्ड कप में भी ऑस्ट्रेलिया ने कुछ ऐसा ही प्रदर्शन किया था, जब उसने बिना एक भी मैच हारे वर्ल्ड कप जीत लिया था.

यह पहला मौका है, जब ट्वेन्टी 20 वर्ल्ड कप में एशियाई टीमों की छुट्टी हो गई है. इससे पहले के दोनों वर्ल्ड कप में सिर्फ एशियाई टीमें ही फाइनल में पहुंची थीं. पहले टी 20 वर्ल्ड कप को भारत ने जीता था और पाकिस्तान उपविजेता रहा था. दूसरी बार श्रीलंका को हरा कर पाकिस्तान की जीत हुई. लेकिन इस बार ये तीनों टीमें पहले ही बाहर हो चुकी हैं.

बहरहाल, मुकाबला ऑस्ट्रेलिया और इंग्लैंड के बीच है. क्रिकेट के दो सबसे परंपरागत देशों की टीमों के बीच और दो सबसे बड़े प्रतिद्वंद्वियों के बीच, लिहाजा फाइनल मैच के बहुत मायने हैं.

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