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मनोरंजन

ऑनलाइन रिव्यू से हो रहा है नुकसान

किस रेस्तरां में जाना चाहिए या कौनसा डॉक्टर अच्छा है, हर किसी का रिव्यू इंटरनेट में मिलता है. यूजर के लिए इंटरनेट में मौजूद ये गैर पेशेवर रिव्यू बड़ी मदद के हैं. लेकिन वे कारोबार को नुकसान भी पहुंचा सकते हैं.

येल्प और ट्रिप एडवाइजर जैसे वेबपेज यूजरों को अपना असली नाम बताए बिना अपने अनुभव बांटने का मौका देते हैं. सकारात्मक या नकारात्मक अनुभव बांटने का मकसद दूसरे लोगों को फायदा पहुंचाना है. लेकिन रिव्यू अगर सख्त हों तो जिन लोगों का रिव्यू किया गया है उन्हें नुकसान भी पहुंचा सकते हैं. जब कभी रिव्यू अपमानजनक होता है तो पीड़ित पार्टी अदालत में भी जा सकती है, जैसा पिछले दिनों जर्मनी में हुआ. एक डॉक्टर डॉक्टरों का रिव्यू करने वाले पोर्टल के खिलाफ अपनी अपील लेकर सर्वोच्च अदालत तक पहुंचा.

इंटरनेट मौत का खतरा

डॉक्टर ने नकारात्मक रिव्यू करने वाले का नाम बताने की मांग की है. सानेगो अब तक इससे इंकार कर रहा है. फैसला पहली जुलाई को होगा. सानेगो के वकील यान ग्मेरेक अभिव्यक्ति की आजादी का हवाला देते हैं. उनका कहना है कि गोपनीयता के बिना बहुत कम नकारात्मक और इमानदार टिप्पणियां की जाएंगी. इसका मतलब यह भी होगा कि लोगों को फैसला लेने के लिए जरूरी विश्वसनीय जानकारी कम मिलेगी. प्रभावित डॉक्टर का प्रतिनिधित्व करने वाले वकील मथियास सीगमन का कहना है कि रिव्यू में गलत सूचनाएं थीं, इसलिए उनका मुवक्किल मुआवजे का हकदार है.

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सीगमन ने समाचार एजेंसी डीपीए से कहा, "अभिव्यक्ति की आजादी गलत बयानी की सुरक्षा नहीं करती." इंटरनेट कानून की विशेषज्ञ एवा जेपीना कहती हैं, "यदि रिव्यू सही नहीं है, अपमानजनक है और व्यक्तिगत अधिकारों का हनन करता है, तो उसके खिलाफ कार्रवाई करनी होगी." उनका कहना है कि गुमनाम रिव्यू कानूनी है, लेकिन यह नैतिक तौर पर सवालिया भी है. जेपीना कहती हैं कि गलत रिव्यू के गंभीर नतीजे होते हैं, इससे संबंधित व्यक्ति की छवि को या आर्थिक तौर पर नुकसान भी पहुंच सकता है. इसका नतीजा "इंटरनेट मौत" भी हो सकता है.

बेड एंड ब्रेकफास्ट का अंत

दूसरे देशों में भी ऑनलाइन साइटों पर कथित गलत रिव्यू के कारण मुकदमे हुए हैं. स्कॉटलैंड के इंवरनेस काउंटी में मार्टिन और जैकी क्लार्क का छोटा सा ब्रेड एंड ब्रेकफास्ट कारोबार इंटरनेट मौत का शिकार हो गया. यह दम्पत्ति इस मामले को लेकर एडिनबरा की अदालत में गया और ट्रिप एडवाइडर पर रिव्यू करने वाले दो लोगों का नाम बताने की मांग की. क्लार्क का कहना था कि उनका रिव्यू गलत, दुर्भावनापूर्ण और कारोबार को नुकसान पहुंचाने वाला था.

लेकिन अदालत ने ट्रिप एडवाइजर को रिव्यू करने वालों का नाम बताने का फैसला नहीं दिया. अदालत ने कहा कि यह मामला उसके अधिकारक्षेत्र में नहीं आता क्योंकि रिव्यू पोर्टल का दफ्तर मैसाच्यूटेस में है. अदालत का कहना था कि क्लार्क को मेसाच्यूटेस की अदालत में अपील करनी होगी. चूंकि क्लार्क दम्पत्ति के पास इतना धन नहीं था, उन्होंने इसके लिए मना कर दिया. नकारात्मक रिव्यू से लड़ने की उनकी अक्षमता के कारण क्लार्क ने कहा कि उन्हें बेड एंड ब्रेकफास्ट कारोबार को बेचने का फैसला करना पड़ा.

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जनवरी 2014 में वर्जीनिया की एक अदालत ने रिव्यू किए गए उद्यमों के पक्ष में फैसला सुनाया. कालीन साफ करने वाली एक दुकान ने रिव्यू साइट येल्प से सात रिव्यू करने वालों का नाम जाहिर करने की मांग की थी. उनका कहना था कि उन्होंने सफाई कंपनी का ग्राहक बने बिना ही रिव्यू किया था. अदालत ने फैसला सुनाया कि येल्फ को उनका नाम बताना होगा क्योंकि रिव्यू करने वालों ने गलत दावों के साथ साइट पर अपनी टिप्पणियां छोड़ी हैं. येल्प के वकील का कहना है कि इस फैसले से कंपनियों के बारे में मूल्यवान जानकारी मिलना मुश्किल हो जाएगा.

निष्पक्ष मानकों की जरूरत

ग्राहकों के लिए जानकारी का अभाव एक समस्या हो सकता है, क्योंकि ऑनलाइन रिव्यू साइट बहुत से लोगों के लिए फैसले में अहम भूमिका निभाते हैं.जर्मनी की उपभोक्ता सलाहकार संघ की मिषाएला सिंके कहती हैं, "डॉक्टरों का रिव्यू करने वाले पोर्टल खासकर वरिष्ठ नागरिकों के लिए महत्वपूर्ण हैं, क्योंकि इंटरनेट पर उन्हें बड़े पैमाने पर लुभाने की कोशिश हो रही है." सिंके रिव्यू की वैधता को चुनौती दिए जाने को पोर्टल द्वारा रोकने की कोशिशों से बचने के लिए निष्पक्ष मानक तय करने की मांग करती हैं. "निष्पक्ष कसौटी से वस्तुपरक रिव्यू मिलेगा."

और यदि जाली या अपमानजनक रिव्यू का मामला होता है तो पीड़ित पार्टी पुलिस के पास जा सकती है. एवा जेपीना का कहना है कि यदि कोई डॉक्टर या होटल का मालिक अज्ञात रिव्यू करने वाले के खिलाफ शिकायत करता है तो पुलिस कानून की संभावना के मुताबिक उसका नाम पता करने की हर कोशिश करेगी. लेकिन जेपीना कहती हैं, "यदि खराब रिव्यू से परेशान हर कोई पुलिस के पास जाने लगे तो हमें जल्द ही बहुत ज्यादा पुलिस वालों की जरूरत होगी." इस हालत में जब तक इंटरनेट में विवाद पर स्पष्ट कानून नहीं बन जाते लोग अदालतों में जाना जारी रखेंगे.

रिपोर्ट: कार्ला ब्लाइकर/एमजे

संपादन: ईशा भाटिया

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