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विज्ञान

ऑटिज्म की शुरुआत गर्भ में हो जाती है

ऑटिज्म से पीड़ित बच्चों में बीमारी की शुरुआत गर्भ में ही हो जाती है. भ्रूण विकास के दौरान दिमाग की संरचना में पैदा हुई गड़बड़ी इसका कारण है.

न्यू इंग्लैंड जरनल ऑफ मेडिसिन में प्रकाशित इस अमेरिकी शोध में कहा गया है कि इससे "पता चलता है कि ऑटिज्म का सीधा संबंध जन्म के पहले से है." सिर्फ अमेरिका में ही 88 में से एक बच्चा ऑटिज्म से पीड़ित है. शोध लिखने वाली टीम में शामिल कैलिफोर्निया यूनिवर्सिटी में ऑटिज्म सेंटर फॉर एक्सीलेंस के निदेशक प्रोफेसर एरिक कूर्शेस्न ने बताया, "भ्रूण विकास के दौरान बच्चे के मस्तिष्क का कॉरटेक्स बनता है, इसमें कुल छह सतहे होती हैं. कॉरटेक्स दिमाग को ढकने वाले ऊतक को कहते हैं. इसमें कई सतहें होती हैं. ऑटिज्म से पीड़ित अधिकतर बच्चों के दिमाग में कॉरटेक्स के इस लेयर के विकास में रुकावट का संकेत देने वाले फोकल पैच हमें मिले हैं."

शोध के लिए

वैज्ञानिकों ने दो से पंद्रह साल की उम्र के ऐसे 11 बच्चे चुने जो ऑटिज्म स्पेक्ट्रम डिसॉर्डर (एएसडी) से पीड़ित थे और जिनकी मौत हो गई. इन बच्चों के दिमाग की कोशिकाओं का डाइसेक्शन किया गया. ऐसे 25 खास जीन ढूंढे गए जिनके कॉरटेक्स में नियमित, स्वस्थ और विशेष पैटर्न दिखाई देते हों. इनकी तुलना उन्होंने 11 सामान्य बच्चों के कॉरटेक्स से की. शोधकर्ताओं ने पाया कि ऑटिज्म से पीड़ित 91 फीसदी बच्चों के कॉरटेक्स की लेयर में या तो वो खास जीन नहीं थे या फिर उनमें असामान्य पैटर्न दिखाई दिए.

दिमाग के फ्रंटल और टैम्पोरल यानी सामने और दाईं और बाईं तरफ के हिस्सों की अलग अलग सतहों में अनियमितता दिखाई दी. ये वो हिस्से थे जो सामाजिक क्रियाकलाप, संवाद, भावनाओं और भाषा के लिए जिम्मेदार हैं.

आश्चर्यजनक

सिएटल में मस्तिष्क विज्ञान की एलेन इंस्टीट्यूट में काम करने वाले और शोध के सह लेखक एड लेन ने बताया, "पता लगने वाली सबसे आश्चर्यजनक बात ये थी कि सभी ऑटिस्टिक दिमाग में एक जैसी कमियां पाई गई. ये एकरूपता ऑटिज्म के अलग अलग लक्षणों वाले मरीजों और बीमारी की जटिल आनुवांशिकी के संदर्भ में बहुत महत्वपूर्ण है."

हालांकि शोधकर्ता अभी भी इस बात को नहीं समझ पाए हैं कि ये बदलाव कुछ ही बच्चों में क्यों होते हैं. हालांकि ये जरूर संकेत मिला कि क्यों ऑटिज्म लोगों को अलग अलग तरह से प्रभावित कर सकता है. इससे यह भी पता चल सकता है कि क्यों कुछ बच्चों का इलाज हो पाता है और कुछ का नहीं. अभी सिर्फ 11 बच्चों के दिमाग की जांच की गई है, इसलिए इसका व्यापक शोध होना जरूरी है.

एएम/एमजी (एएफपी)

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