1. Inhalt
  2. Navigation
  3. Weitere Inhalte
  4. Metanavigation
  5. Suche
  6. Choose from 30 Languages

मनोरंजन

ऐशो आराम में भी नाखुश बच्चे

सहूलियत का सारा सामान मुहैया होने के बाद भी ज्यादातर जर्मन बच्चे जीवन से संतुष्ट नहीं हैं. क्या जीवन की आसानियां ही इनकी दुश्मन बन गई हैं?

जर्मनी में बाल कल्याण पर यूनिसेफ की ताजा रिपोर्ट के अनुसार यहां बच्चे जीवन में तमाम तरह के आराम के बावजूद भी सुखी महसूस नहीं करते. जर्मनी में युवा सिगरेट कम पीते हैं, ये शिक्षित हैं और अपने माता पिता की पीढ़ी के मुकाबले उनमें किशोरावस्था में गर्भधारण के मामले भी कम हैं. लेकिन ऐसे में भी जर्मन बच्चे जीवन से संतुष्ट और कई तो खुश भी नहीं हैं. यूनिसेफ के एक सर्वे के बाद छपी रिपोर्ट के अनुसार शिक्षा, सुरक्षा, सामाजिक ढांचे, पर्यावरण और जन कल्याण की सुविधाओं के स्तर पर 20 विकसित देशों में जर्मनी को छठे स्थान पर पाया गया है. सात में से एक बच्चा जीवन से नाखुश है.

जरूरत से ज्यादा सुरक्षा

जर्मन शिक्षक संघ के अध्यक्ष योसेफ क्राउस इसके पीछे कुछ और वजह मानते हैं. क्राउस को लगता है कि बच्चों को यहां इतना ज्यादा सुरक्षित वातावरण दिया जाता है कि उन पर बाद में अच्छे प्रदर्शन का भारी दबाव आ जाता है.

आम तौर पर हर परिवार में सिर्फ एक बच्चा है. ऐसे में उन्हें बहुत ज्यादा प्यार दुलार और संरक्षण मिलता है. नतीजा यह होता है कि बच्चे के आसपास रहने वाले लोगों का वह दबाव महसूस करता है. क्राउस के अनुसार जर्मनी के 20 फीसदी परिवार अपने बच्चों को जरूरत से ज्यादा दुलार करते हैं, "इस तरह की असल में अनुकूल परिस्थिति और उसके प्रति आपके व्यवहार के बीच अंतर होना ही समृद्ध समाज की मुसीबत है." वह मानते हैं कि ऐसा जर्मनी में ही होता है.

सामाजिक अंतर

रिपोर्ट में यह भी स्पष्ट किया गया है कि ऐसा नहीं है कि जर्मनी के सभी बच्चे समृद्ध हैं. बच्चों में गरीबी के मामले यहां भी काफी हैं. संयुक्त राष्ट्र ने नीति निर्माताओं से मांग की है कि वे बाल गरीबी से निबटने के लिए कम आमदनी वाले अभिभावकों और बच्चों की अकेले परवरिश कर रहे मां या बाप की मदद के रास्ते निकालें. जर्मनी के परिवार कल्याण मंत्रालय के प्रवक्ता ने इस बारे में कोई भी प्रतिक्रिया देने से इनकार किया है.

इस सर्वे में नीदरलैंड्स को यूरोपीय संघ के सदस्य देशों में सबसे ऊपर और रोमानिया को सबसे नीचे पाया गया है.

रिपोर्टः नाओमी कोनराड/एसएफ

संपादनः ए जमाल

DW.COM