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विज्ञान

एस्प्रिन के इस्तेमाल पर सवाल

अमेरिकी स्वास्थ्य मंत्रालय के मुताबिक थोड़ी मात्रा में एस्प्रिन का इस्तेमाल गर्भवती मिहलाओं के लिए फायदेमंद साबित हो सकता है हालांकि दिल की बीमारी से बचने के लिए जो इसका रोज इस्तेमाल करते हैं उनके लिए चेतावनी भी दी है.

गर्भवती महिलाओं में प्रीएक्लैंप्सिया नाम से जानी जाने वाली परिस्थिति में मां को उच्च रक्तचाप और मूत्र में प्रोटीन की अत्यधिक मात्रा जैसी समस्याएं होती हैं. इसके रहते गर्भावस्था में कई खतरे हो सकते हैं. अमेरिकी स्वास्थ्य विभाग के अनुसार प्रीएक्लैंप्सिया, डायबिटीज, हाइपरटेंशन या फिर एक से अधिक भ्रूण गर्भ में होने की स्थिति में मां के लिए एस्प्रिन फायदेमंद साबित हो सकती है. महिलाओं को डॉक्टर से सलाह लेकर तीन महीने के बाद हर रोज एस्प्रिन की थोड़ी मात्रा लेते रहना चाहिए.

यूएस प्रेवेंटिव सर्विसेस टास्क फोर्स (यूएसपीटीएफ) द्वारा जारी बयान के अनुसार, "चिकित्सकीय परीक्षणों में एस्प्रिन की 50 से 160 एमजी प्रतिदिन की खुराक प्रीएक्लैंप्सिया के खतरे को चौबीस फीसदी तक कम करने में सफल रही." एस्प्रिन की प्रतिदिन खुराक से समय से पहले होने वाले जन्म की संभावना को चौदह फीसदी कम किया जा सका.

इस रिसर्च को अंजाम देने के लिए उन्नीस चिकित्सकीय परीक्षण किए गए जिनमें से किसी में भी कोई बुरा प्रभाव सामने नहीं आया. लंबे समय में इसके क्या कोई बुरे प्रभाव हो सकते हैं, इस बारे में अभी कुछ नहीं कहा गया है.

हालांकि यह सुझाव केवल उन महिलाओं के लिए दिया गया है जो पहले से प्रीएक्लैंप्सिया से ग्रसित हैं या जिन्हें इसका खतरा है. दुनिया भर में गर्भावस्था से जुड़ी इस समस्या के फिलहाल दो से आठ फीसदी मामले हैं. समय से पहले पैदाइश के पंद्रह फीसदी मामलों के लिए प्रीएक्लैंप्सिया को जिम्मेदार माना जाता है. इससे मां और बच्चे दोनों को ही जान का खतरा रहता है. स्वास्थ्य मंत्रालय का यह सुझाव एनल्स ऑफ इंटर्नल मेडिसिन पत्रिका में छपा है.

दिल के मामले में एस्प्रिन

यह एक आम धारणा है कि एस्प्रिन के इस्तेमाल से दिल का दौरा पड़ने का खतरा कम होता है. अमेरिकी फूड एंड ड्रग एड्मिनिस्ट्रेशन एफडीए ने इन दावों पर सवाल उठाया है कि जिन लोगों को कभी दिल की बीमारी नहीं हुई उनके लिए भी क्या यह बात लागू होती है.

हाल में जर्मन दवा निर्माता कंपनी बायर ने एस्प्रिन की पैकेजिंग बदलने की मांग की थी. कंपनी नई पैकेजिंग में इस बात का प्रचार करना चाहती थी कि एस्प्रिन से उन लोगों को दिल की बीमारी का खतरा कम होगा जिन्हें पहले कभी दिल की कोई समस्या नहीं हुई.

एजेंसी के उपनिदेशक डॉक्टर रॉबर्ट टेंपल ने एफडीए द्वारा जारी बयान में कहा कि लोगों को हर रोज एस्प्रिन सिर्फ डॉक्ट्री सलाह पर ही लेना चाहिए. एस्प्रिन की खूबी यह है कि यह खून को जमने में मदद करने वाली प्लेटलेट कोशिकाओं को कम करती है, जिससे खून पतला होता है. ऐसे में जिन लोगों को पहले कभी दिल का दौरा पड़ चुका है उन्हें मदद मिलती है. लेकिन जानकारों का मानना है कि इसके हर रोज इस्तेमाल से शरीर को नुकसान भी हो सकता है.

एफडीए ने अपनी वेबसाइट पर लिखा कि 1990 से चिकित्सकीय डाटा इस बात को प्रमाणित करता है कि जिन लोगों को ब्लॉकेज जैसी समस्याएं हैं उन्हें एस्प्रिन के डेली इस्तेमाल से मदद मिली है. लेकिन कुछ प्रमुख रिसर्चों से इकट्ठा किए आंकड़े यह निर्धारित नहीं करते कि एस्प्रिन को दिल की बीमारी रोकने के लिए सिर्फ एहतियात के तौर पर भी इस्तेमाल किया जा सकता है.

दवा निर्माता कंपनी ने जारी बयान में कहा है कि एफडीए का ताजा फैसला एस्प्रिन के बारे में पहले से तय फायदों को खारिज नहीं करता है. कंपनी का कहना है, "बिना डॉक्टरी सलाह के लोगों को एस्प्रिन का इस्तेमाल नहीं रोकना चाहिए. इसे अचानक रोक देना भी खतरनाक साबित हो सकता है."

एसएफ/एमजी (एएफपी/रॉयटर्स)

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