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विज्ञान

एलईडी जलाने वालों को भौतिकी का नोबेल

इसामू आकासाकी, हिरोशी अमानो और शुजी नाकामुरा को भौतिक विज्ञान के क्षेत्र में 2014 के नोबेल पुरस्कार के लिए चुना गया है. तीनों वैज्ञानिकों को एलईडी ब्लू लाइट फेंकने वाले डायोड के आविष्कार के लिए यह पुरस्कार दिया जाएगा.

मंगलवार को रॉयल स्वीडिश अकादमी ने भौतिकी के लिए 2014 का नोबेल पुरस्कार का एलान किया. इस साल भौतिकी के नोबेल पुरस्कार से जापान के इसामू आकासाकी और हिरोशी अमानो और अमेरिका के शुजी नाकामुरा को सम्मानित किया गया है. नोबेल पुरस्कार समिति ने कहा, "एलईडी लैंप के अविष्कार से अब हमारे पास बिजली के पुराने स्रोतों की तुलना में ज्यादा टिकाऊ और ऊर्जा की अधिक बचत करने वाला विकल्प मौजूद है." साथ ही समिति ने तीनों वैज्ञानिकों के काम को समाज के लिए महान योगदान बताया.

बयान में आगे कहा गया कि भले ही उनका आविष्कार 20 साल पुराना है, शोधकर्ता हम सबके लाभ के लिए नए तरीके से सफेद रोशनी बनाने की दिशा में पहले से ही योगदान दे चुके हैं. इस सम्मान के तहत वैज्ञानिकों को 11 लाख डॉलर दिए जाएंगे, जो तीनों वैज्ञानिकों के बीच बराबर बराबर से बटेंगे.

1990 में तीनों वैज्ञानिकों ने अर्ध संचालकों से ब्लू लाइट बीम कैसे पैदा की जाए, ये खोज निकाला. उनकी खोज ने सफेद लाइट वाली एलईडी लैंप्स के आविष्कार का नेतृत्व किया. जूरी ने आविष्कार के लाभ की ओर इशारा किया. पूरी दुनिया में बिजली की जितनी खपत होती है, उसकी एक चौथाई रोशनी पैदा करने में खर्च होती है. एलईडी लैंप्स की क्षमता अन्य मानक प्रकाश बल्ब की तुलना में कहीं अधिक है.

10 दिसंबर को पुरस्कार वितरण समारोह स्वीडन की राजधानी स्टॉकहोम में होगा. चिकित्सा क्षेत्र का पुरस्कार इस बार मस्तिष्क पर शोध कर रहे तीन वैज्ञानिकों को मिला है. पिछले साल ब्रह्मांड का सबसे छोटा कण यानि हिग्स बोसोन की खोज के लिए पीटर हिग्स और फ्रांसोआ आंगलेया को भौतिकी के लिए 2013 का नोबेल पुरस्कार दिया गया था.

एए/ओएसजे (एपी, एएफपी)

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