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मंथन

एरिक योहानसन और कैमरे के ट्रिक्स

कभी सोचा है कि कैमरे की मदद से कुछ ट्रिक्स संभव हैं. स्वीडन के एरिक योहानसन ऐसे आर्टिस्ट हैं जो भ्रम की कला में उस्ताद हैं.

एरिक अपने कंप्यूटर और कैमरे का इस्तेमाल कर ऐसी तस्वीरें बनाते हैं जो एकदम सच्ची लगती हैं. तस्वीरें देखकर मन में सवाल आते हैं कि ये हकीकत है या कोरी कल्पना? असली दुनिया की असली तस्वीर है या कलाकारी? अजीबोगरीब जगहों पर विचित्र आयामों के साथ घुली मिली ये तस्वीरें स्वीडन के फोटोग्राफर एरिक जॉनसन की हैं. ये कलात्मक तस्वीरें सीधे कैमरे से नहीं खींची जातीं, इनकी शुरुआत हर बार आइडिया को पेपर पर उतारने और उसका स्केच बनाने के साथ होती है.

फोटोग्राफर का दिमाग भी किसी कलाकार की तरह चलता है. जब स्केच पूरा हो जाता है तो उन्हें पता चलता है कि उन्हें किस थीम की तस्वीर लेनी है. वह बताते हैं, "मेरे लिए आइडिया का मतलब है दो ऐसी चीजों के बीच में संबंध खोजना जो एक दूसरे से मेल न खाते हों. मैं ऐसे मैटेरियल इस्तेमाल करता हूं जो एकदम अलग हो सकते हैं, लेकिन उन्हें इस तरह साथ लाता हूं कि वे अच्छे लगें."

स्केच तैयार करने के बाद अंतिम तस्वीर के पूरा होने में महीनों लग जाते हैं. फोटोग्राफर के लिए सबसे अहम बात यह होती है कि हर डीटेल को जहां तक हो सके उसके असली रूप में रहने दिया जाए, और आइडिया को मूर्त रूप देने में खर्च या मेहनत की परवाह न की जाए. असल बात है कि भ्रम पर्फेक्ट होना चाहिए. एरिक जॉनसन को ऐसे आईडिया कहां से मिलते हैं?

वे कहते हैं, "मुझे बचपन से ही ड्रॉइंग पसंद थी, लेकिन कंप्यूटर में भी मेरी दिलचस्पी थी. जब मुझे पहला डिजिटल कैमरा मिला तो मैं 15 साल का था और मुझे पहली बार लगा कि मैं अपनी दोनों दिलचस्पियों को जोड़ सकता हूं, और कुछ नया कर सकता हूं." एरिक योहानसन के लिए जगह से ज्यादा महत्वपूर्ण है अनुभव. वे हाल ही में बर्लिन छोड़कर प्राग में रहने लगे हैं. 30 साल के फोटोग्राफर का कहना है कि वे कहीं भी रहकर काम कर सकते हैं. रिलोकेशन के जरिये उन्हें प्रेरणा मिलती है. "मैं समझता हूं कि किसी जगह की संस्कृति मेरे काम को भी प्रभावित कर सकती है. आप जो कुछ देखते हैं वह नए प्रोडक्ट के लिए प्रेरणा का काम कर सकती है. मुझे पता नहीं कि किस तरह लेकिन मुझे पक्का विश्वास है कि प्राग नए आइडिया देगा."

वीडियो देखें 02:25

डिजिटल जादूगरी

एरिक को अपने आस पास से प्रेरणा मिलती है. प्रकृति और कृत्रिम वस्तुओं के बीच अंतर से भी. उनकी तस्वीरें 60 से 120 यूरो में बिकती हैं. कभी कभी ये तस्वीरें वे अंतरराष्ट्रीय कंपनियों के ऑर्डर पर भी तैयार करते हैं. अपने स्टूडियो में काम करते समय वे अपनी पुरानी तस्वीरों को निगाहों के सामने रखते हैं. क्योंकि इस तरह उन्हें यहां वहां कोई ऐसी भूल दिख जाती है जिसे वे भविष्य में दोहराना नहीं चाहते. "जिस दिन मैं अपने काम से पूरी तरह खुश हो जाऊंगा, मैं सोचूंगा कि मेरा काम पूरा हो गया. मुझे अभी भी लग रहा है बहुत से आइडिया हैं, जिन्हें मैं पूरा करना चाहता हूं."

और वे अपने आइडिया को पूरा करने में जुटे हैं. "मैं आसमान से शुरुआत करता हूं, उसके बाद बैकग्राउंड और फिर सामने की जगह पर काम करता हूं. फिर सैचुरेशन को थोड़ा कम करता हूं." परफेक्ट भ्रम पैदा करने के लिए वे दुनिया भर का दौरा करते हैं. उनका देश स्वीडन अक्सर उनकी तस्वीरों में दिखता है, उभरता है. अगर मौसम के कारण तस्वीर वैसी नहीं बन पा रही है, जैसा कि वे चाहते हैं, तो वे अगले सीजन तक इंतजार करते हैं. ज़रूरी है कि तस्वीर जहां तक हो सके असली दिखे. या शायद नहीं भी.

ओफेलिया हार्म्स आरुति/एमजे

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