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विज्ञान

एयरपोर्ट पर भी चैन की नींद

लंबी विमान यात्रा और उससे पहले घंटों एयरपोर्ट की आपाधापी के बीच कुछ पल सकून के मिल जाएं तो बड़ा आराम महसूस होता है. म्यूनिख एयरपोर्ट ने आवाजरोधी केबिन बनाए हैं जहां यात्री चैन से सो सकते हैं.

यूरोप के दूसरे व्यस्त हवाई अड्डों की तरह ही म्यूनिख में भी बड़ी चहल पहल और गहमागहमी रहती है. विमान का इंतजार कर रहे यात्रियों के लिए शोर शराबे के बीच सोना तो दूर चैन से बैठना भी मुश्किल है. इसे ध्यान में रख कर एयरपोर्ट ने सोने के लिए खास केबिन बनाए हैं. डबल बेड, पढ़ने की मेज और एसी लगे इन केबिनों में यात्री बड़े मजे से कुछ घंटों तक आराम कर सकते हैं. वो पढ़ना या कंप्यूटर पर काम करना चाहें तो इसका भी इंतजाम है.

इन केबिनों का दरवाजा क्रेडिट कार्ड से खुलता है और उसी कार्ड से एक निश्चित रकम सेवा की कीमत के रूप में वसूल कर ली जाती है. सेवा अच्छी जरूर है लेकिन कीमत कम नहीं. दिन में प्रति घंटे के लिए 19 यूरो करीब 1300 रुपये देने पड़ते हैं जबकि रात में 700 रुपये प्रति घंटे की दर से कीमत वसूली जाती है.

नई सेवा शुरू करने वाली नैपकैब्स के प्रवक्ता योर्ग पोल ने बताया कि यात्री यहां आराम कर खुद को तरोताजा कर सकते हैं. म्यूनिख में अब तक 5,500 यात्री इसका मजा ले चुके हैं और कंपनी इस सेवा को दुनिया भर के हवाई अड्डों पर शुरू करने की योजना बना रही है.

जर्मनी में होटल उद्योग के लिए खेमेबाजी करने वाले जर्मन ट्रैवल एसोसिएशन इन केबिनों को होटल का विकल्प नहीं मान रहा है. संघ से जुड़ी सिबिले जॉयष का कहना है, "कैप्सूल यात्रियों के लिए होटल का सस्ता विकल्प हो सकते हैं लेकिन यह छुट्टी मनाने के लिए अच्छे नहीं है, हालांकि यह टर्मिनल पर खुले में पड़े बेड की तुलना में अच्छे हैं." इस तरह के केबिन की शुरुआत जापान में 1980 के दौरान हुई. यह ऐसे यात्रियों को एकांत और आराम का मौका देता था जो होटल नहीं जाना चाहते या फिर एयरपोर्ट से बाहर नहीं निकलना चाहते. म्यूनिख के एयरपोर्ट पर बने केबिन करीब नौ फीट लंबा और साढ़े पांच फीट चौड़े हैं, जो जापान में शुरू हुए कैप्सूल से काफी बड़े हैं.

ट्रैवल एसोसिएशन की तरह होटल लॉबी भी इस पर नाक भौं सिकोड़ रहा है. होटल संघ के प्रवक्ता बेनेडिक्ट वोल्बेक ने कहा, "यूरोपीय मेहमानों के नींद की जरूरत का एशियाई मेहमानों की नींद की जरूरत से तुलना नहीं की जा सकती." संघ का मानना है कि इस सेवा का विस्तार महज यूरोप तक ही सीमित रहेगा. वैसे इस तरह के कैप्सूल होटल मॉस्को, एम्सटर्डम, अटलांटा और न्यूयॉर्क में चल रहे हैं जबकि केवल टोक्यो में ही 100 से ज्यादा मिनी होटल हैं.

दुनिया के सबसे बड़े हवाई अड्डों में शामिल लंदन के हीथ्रो पर भी यात्री एक खास कैप्सूल होटल में आराम कर सकते हैं. यहां के कैप्सूल म्यूनिख की तुलना में काफी बड़े हैं. करीब 75 वर्ग फीट के कैप्सूल में बड़ा बिस्तर, मुफ्त वाई फाई, कंप्यूटर, शावर और फ्लैट टीवी स्क्रीन भी हैं. कीमत करीब 2,100 रुपये चार घंटे के लिए. लंदन के दूसरे एयरपोर्ट भी इस तरह की सुविधा शुरू करने जा रहे हैं. एयरपोर्ट पर चैन की नींद लोगों को लुभा रहा है.

एनआर/एजेए(डीपीए)

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