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दुनिया

एमेजॉन के मुकाबले एप्पल क्यों है बेहतर?

गैर सरकारी संस्था ग्रीनपीस ने अपनी एक रिपोर्ट में तकनीकी कंपनियों के परिचालन और पर्यावरण पर पड़ने वाले इनके प्रभावों का जिक्र किया है. रिपोर्ट मे जहां एमेजॉन की आलोचना की गई है तो वहीं एप्पल की तारीफ मिली है.

दुनिया की दिग्गज तकनीकी कंपनियां ग्रीनहाउस गैसों के उत्सर्जन को लेकर अपनी प्रतिबद्धतायें पूरी करने में असफल साबित हो रहीं हैं. वहीं कुछ कंपनियां अभी भी अक्षय ऊर्जा के इस्तेमाल को लेकर अनिच्छुक नजर आ रहीं हैं. ग्रीनपीस अमेरिका की ग्रीनर इलेक्ट्रॉनिक्स से जुड़ी एक रिपोर्ट में यह बताया गया है. रिपोर्ट में ऐसी 17 कंपनियों की आलोचना की गयी है जो अब तक बड़े स्तर पर रिसाइकल उत्पादों के इस्तेमाल करने में असफल रहीं. साथ ही जिन्होंने उत्पादन प्रक्रिया में विषाक्त पदार्थों के इ्स्तेमाल को अब तक नहीं घटाया है. ग्रीनपीस अमेरिका से जुड़े गैरी कुक के मुताबिक, "तकनीकी कंपनियां, इनोवेशन के मामले में स्वयं को अग्रणी कहती हैं लेकिन इनका आपूर्ति तंत्र पुराने औद्योगिक ढांचे में ही फंसा हुआ है." रिपोर्ट में सर्वाधिक मांग में रहने वाले स्मार्टफोन और टैबलेट जैसे आधुनिक मोबाइल कंप्यूटिंग उपकरणों के पीछे छिपी लागत का जिक्र भी किया गया है.

टॉप कंपनियां

एमेजॉन अमेरिकी की इकलौती ऐसी कंपनी है जिसे इस सर्वे में पर्यावरण प्रतिबद्धताओं के मानक स्तर पर सबसे कम अंक प्राप्त हुए हैं. कुछ ऐसा ही हाल चीन की कंपनियों का भी है. ग्रीनपीस के मुताबिक, "एमेजॉन अपने कार्यों के बारे में सबसे कम खुलासा करती है और कंपनी ग्रीनहाउस गैस फुटप्रिंट की भी कोई जानकारी नहीं देती." सैमसंग इलेक्ट्रॉनिक्स का प्रदर्शन भी बेहतर नहीं कहा जा सकता. रिपोर्ट के मुताबिक, सैमसंग ने अपनी उत्पादन ऊर्जा की जरूरतों को पूरा करने के लिए अक्षय ऊर्जा का महज एक फीसदी ही इस्तेमाल किया है. वहीं इसके इतर एप्पल ने अक्षय ऊर्जा का अपने परिचालन में लगभग 96 फीसदी इस्तेमाल किया है. नीदरलैंड्स की तकनीकी कंपनी फेयरफोन को ग्रीनपीस की इस रिपोर्ट में अक्षय ऊर्जा का इस्तेमाल करने वाली सबसे अग्रणी कंपनी कहा गया है.  

एए/आईबी (एपी, एएफपी)

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