1. Inhalt
  2. Navigation
  3. Weitere Inhalte
  4. Metanavigation
  5. Suche
  6. Choose from 30 Languages

दुनिया

एमएच17 यात्रियों के अंतिम पल

एमएच17 में चढ़ने से पहले 11 साल के मिगेल ने मां को गले लगाया. वो कई दिनों से बहुत दुखी था और मौत और भगवान की बातें कर रहा था.

17 जुलाई की सुबह. एम्सटर्डम में धूप खिली हुई थी. एयरपोर्ट जाने से पहले विलेम ग्रोटशोल्टन ने अपनी प्रेमिका क्रिस्टीन को फोन किया. क्रिस्टीन ने बच्चों से कहा, "तुम्हारे पापा तुमसे मिलने आ रहे हैं. हम हमेशा साथ रहेंगे."

वहीं समीरा कालेर ने अपने बच्चों मिगेल और शाका को एयरपोर्ट पहुंचाया. 19 साल के शाका ने वादा किया कि वह बाली में अपने 11 साल के भाई मिगेल का ख्याल रखेगा. तभी मिगेल ने कहा, "मां अगर प्लेन क्रैश हुआ तो क्या होगा." समीरा नाराज हो गई और कहा सब ठीक होगा. उसके बेटे अंदर चले गए.

फ्लाइट एमएच17 ने 12 बजकर 15 मिनट पर टेक ऑफ किया. और दो घंटे बाद 298 जिंदगियां आंसुओं में सिमट गईं. समीरा कालेर लगातार मिगेल की बात याद कर रही हैं. कहती हैं, "मुझे उसकी बात सुन लेनी चाहिए थी. मुझे उसकी बात सुन लेनी चाहिए थी."

अधूरी रह गई कहानियां

समीरा कालेर के दोनों बच्चे इंडोनेशिया के बाली में अपनी नानी के साथ गर्मी की छुट्टियां मनाने जा रहे थे. इसके लिए एमएच17 से पहले उन्हें क्वालालंपुर जाना था और वहां से बाली की फ्लाइट लेनी थी.

मिगेल यह सफर काफी बार कर चुका था और आम तौर पर वह खुशमिजाज बच्चा था. लेकिन उस दिन समीरा को लगा कि कुछ ठीक नहीं है. फ्लाइट पकड़ने से एक दिन पहले मिगेल ने अपनी मां से पूछा, "आप मरना चाहेंगी तो किस तरह? अगर मुझे जमीन के नीचे गाड़ दिया गया तो क्या होगा. क्या मुझे कुछ महसूस नहीं होगा, क्योंकि हमारी आत्मा तो भगवान के पास चली जाती है."

एमएच17 फ्लाइट पर चढ़ने से एक रात पहले मिगेल अपनी मां से अलग नहीं होना चाहता था. समीरा ने रात अपने बेटे को गोद में सुलाकर बिताई. 16 जुलाई की सुबह के 11 बजे शाका और उसका छोटा भाई मिगेल 296 और हमसफरों के साथ एमएच17 पर चढ़े. यह आखिरी सफर साबित हुआ.

एक सैनिक की कहानी

एमएच17 के बोइंग 777 विमान में ऐसे कई लोग थे जो क्वालालंपुर में नई जिंदगी शुरू करने जा रहे थे. 53 साल के विलेम ग्रोटशोल्टेन ने नीदरलैंड्स में अपना घर बेच दिया और मलेशिया में अपनी दोस्त क्रिस्टीन के साथ नया जीवन शुरू करने जा रहे थे. ग्रोटशोल्टन सैनिक रह चुके थे और पिछले साल बाली में उनकी मुलाकात क्रिस्टीन से हुई. उस समय ग्रोटशोल्टन को चोट आई थी और क्रिस्टीन, जो हकीम हैं, ने उनका इलाज किया था.

ग्रोटशोल्टन को वापस एम्सटर्डम आना पड़ा जहां वह एक दुकान में काम करते थे. लेकिन ऑनलाइन चैट के जरिए दोनों में संपर्क बना रहा और दोनों में प्यार हो गया. क्रिस्टीन के दो बच्चे भी ग्रोटशोल्टन को पसंद करने लगे. नीदरलैंड्स के सैनिक ने आखिरकार बाली जाकर अपना जीवन क्रिस्टीन के साथ बिताने का फैसला किया. मई में वहां जाकर उन्होंने क्रिस्टीन के सामने शादी का प्रस्ताव रखा और जून में अपना सामान समेटने वापस नीदरलैंड्स आए. समान समेट कर वो एमच17 से वापसी जा रहे थे लेकिन उनकी जिंदगी का पूरा सफर रास्ते में मिट गया.

घर पर छुट्टी

MH17

यात्रियों के शव यूक्रेन से नीतरलैंड्स ले जाए जा रहे हैं

फ्लाइट अटेंडेट संजीब सिंह घर जा रहे थे. उन्हें एक दिन और रुकना था क्योंकि एमएच17 में उन्हें जगह नहीं मिली, लेकिन वह अपने माता पिता से जल्दी मिलना चाहते थे . उन्होंने एक दोस्त से कह कर अपनी शिफ्ट बदल ली और एक दिन पहले एमएच17 से घर को रवाना हुए.

सिंह की पत्नी ने भी एमएच370 में अपनी शिफ्ट बदली थी. आठ मार्च को एमएच370 हिंद महासागर में लापता हुआ था. सिंह की पत्नी को उस वक्त किस्मत ने बचा लिया लेकिन सिंह की किस्मत खराब थी. सिंह की पत्नी के डरावने अनुभव के बाद उनके माता पिता ने कई बार कहा कि वह अपनी नौकरी छोड़ दें. फ्लाइट पर चढ़ने से पहले सिंह ने अपनी मां को फोन किया. उसकी मां ने फोन रखकर एक प्रार्थना की कि उनका बेटा सुरक्षित पहुंच जाए.

संजीब की मां ने तब से खाना नहीं खाया है. उन्हें समझ नहीं आ रहा कि उनके बेटे ने शिफ्ट क्यों बदली.

एमजी/ओएसजे (एपी)