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दुनिया

एफडीआई पर मनमोहन की माया

बीएसपी के पाले में आने के साथ ही एफडीआई पर भारत सरकार की चिंता दूर हो गई है. शुक्रवार को राज्यसभा में वोटिंग होनी है, जिसमें अब कांग्रेस नेतृत्व वाली सरकार के लिए ज्यादा मुश्किल नहीं रह गई है.

भारत की प्रमुख विपक्षी पार्टियों बीजेपी और एआईएडीएमके ने उन पार्टियों पर सीधा निशाना साधा है, जिन्होंने इस मुद्दे पर अपना विरोध जताने के बाद भी सरकार के खिलाफ नहीं जाने का फैसला किया. लोकसभा में हुई वोटिंग के दौरान मुलायम सिंह यादव की समाजवादी पार्टी और मायावती की बहुजन समाज पार्टी ने वॉकआउट किया था.

लोकसभा में सरकार के पक्ष में आंकड़े आने के अगले दिन राज्यसभा में इस पर बहस शुरू हुई. बीएसपी सुप्रीमो मायावती ने कुछ घंटों बाद ही अपने एलान से सारा सस्पेंस खत्म कर दिया, "हमने फैसला किया है कि एफडीआई के मुद्दे पर कल होने वाली वोटिंग में हम सरकार के समर्थन में मत देंगे." राज्यसभा में बीएसपी के 15 सांसद हैं और उनका साथ सरकार के लिए बहुत राहत लेकर आएगा.

राज्यसभा में सरकार के पास वोटिंग में जीत के लिए जरूरी आंकड़े नहीं हैं और ऐसे में उसे कुछ पार्टियों के समर्थन की जरूरत थी. इस वोट से सरकार की सेहत पर कोई असर नहीं पड़ने वाला है लेकिन इसमें हार का मतलब घरेलू और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सरकार की शर्मिंदगी थी.

मायावती का कहना है कि उन्होंने इस मुद्दे पर सरकार का साथ देने का फैसला किया है क्योंकि "इसमें कई अच्छी बातें भी हैं और खास बात यह है कि यह किसी राज्य सरकार पर जबरन लागू नहीं किया जा सकेगा."

राज्यसभा में बहस की शुरुआत एआईएडीएमके के वी मैत्रेयण ने की. बीजेपी समेत कई पार्टियां रिटेल सेक्टर में 51 फीसदी प्रत्यक्ष विदेशी निवेश का विरोध कर रही हैं. राज्यसभा में विपक्ष के नेता अरुण जेटली ने इससे पहले बीएसपी पर निशाना साधते हुए कहा कि बीएसपी, एसपी, एनसीपी और डीएमके जैसी पार्टियां परोक्ष रूप से सरकार का समर्थन कर रही हैं. उन्होंने खास तौर पर मायावती की बीएसपी के बारे में कहा, "आपको पता है कि यह नीति देश के लिए खराब साबित हो सकती है. अगर आप किसी चीज के बारे में कह रही हैं, तो इस पर अड़ी रहिए."

मायावती ने इस बात से इनकार किया कि उनकी पार्टी सीबीआई की किसी जांच के डर से सरकार का साथ दे रही है. उन्होंने उलटा कहा कि बीजेपी के लिए अंगूर खट्टे हैं. इस मुद्दे पर खासी बहस भी हुई क्योंकि कई सांसदों का कहना था कि उनका बयान बहुत खराब है लेकिन संसदीय कार्य मंत्री कमलनाथ का मानना था कि इसमें गैरसंसदीय जैसी कोई बात नहीं थी.

जेटली और मैत्रेयण ने बहस की शुरुआत करते हुए कहा कि जब मनमोहन सिंह और सोनिया गांधी विपक्ष में थे, तो उन्होंने एफडीआई का विरोध किया था. उन्होंने सीधे तौर पर प्रधानमंत्री की तरफ इशारा करते हुए कहा कि एनडीए की सरकार के वक्त वह जब राज्यसभा में विपक्ष के नेता थे, तो उन्होंने एफडीआई का विरोध किया. उन्होंने डीएमके पर भी निशाना साधा, जो एफडीआई का विरोध कर रही थी लेकिन लोकसभा में उसने इस मुद्दे पर सरकार का साथ दिया.

रिटेल सेक्टर विदेशी कंपनियों के लिए खोलने के मुद्दे पर सरकार में शामिल ममता बनर्जी की तृणमूल कांग्रेस बाहर हो चुकी है और इसके बाद से औपचारिक तौर पर सरकार लोकसभा में बहुमत खो चुकी है. इसके बाद भी शक्ति परीक्षण की नौबत नहीं आई है.

एजेए/एएम (पीटीआई)

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