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दुनिया

एनएसए जासूसी रिपोर्टिंग को पुलित्जर पुरस्कार

इस साल का प्रतिष्ठित पुलित्जर पुरस्कार 'द गार्जियन' और 'वॉशिंगटन पोस्ट' को दिया गया है. इन्होंने पूर्व एनएसए कॉन्ट्रेक्टर एडवर्ड स्नोडेन के खुलासों पर आधारित रिपोर्टिंग कर वैश्विक स्तर पर हो रही जासूसी का पर्दाफाश किया.

इन संयुक्त विजेताओं के नाम की घोषणा करते हुए सोमवार को कहा गया कि न्यू यॉर्क स्थित कोलंबिया यूनिवर्सिटी की पुलित्जर कमेटी ने जन सेवा के क्षेत्र में ब्रिटिश अखबार 'द गार्जियन' और अमेरिका के 'वॉशिंगटन पोस्ट' के योगदान को बहुत महत्वपूर्ण बताया. दोनों अवॉर्ड विजेताओं की घोषणा के साथ ही 1972 की यादें ताजा हो गई हैं जब 'न्यू यॉर्क टाइम्स' को अमेरिका के रक्षा मुख्यालय के वियतनाम युद्ध से जुड़े कुछ दस्तावेज प्रकाशित करने के लिए पुलित्जर पुरस्कार दिया गया था.

कमेटी ने ब्रिटिश अखबार 'द गार्जियन' की अमेरिकी ईकाई को "आम जनता की सुरक्षा और प्राइवेसी के मामले पर सरकार के साथ जुड़े तारों पर अपनी आक्रामक रिपोर्टिंग के जरिए आम बहस छेड़ने" का श्रेय दिया. वहीं 'वॉशिंगटन पोस्ट' के बारे में कमेटी का कहना था कि उसकी रिपोर्टों ने जनता को यह समझने में मदद की कि राष्ट्रीय सुरक्षा के ढांचे में राष्ट्रीय सुरक्षा एजेंसी (एनएसए) के खुलासे किस तरह की भूमिका निभाते हैं. इन प्रकाशनों में विस्तार से बताया गया था कि किस तरह एनएसए के जासूसी कार्यक्रम में लाखों अमेरिकी और विदेशी लोगों के फोन कॉल और ईमेलों पर नजर रखी जाती है. इतने बड़े स्तर पर लोगों की निजी जानकारियों की जासूसी करने के मामले पर उठे विवाद के बाद राष्ट्रपति बराक ओबामा को जासूसी की नई सीमाएं निर्धारित करनी पड़ीं.

स्नोडेन पर अमेरिका में जासूसी और दूसरे कई आरोप लगे हैं जिसके लिए दोषी पाए जाने पर उन्हें 30 साल तक की जेल हो सकती है. स्नोडेन ने इस समय रूस में शरण ले रखी है. इन विजेताओं को स्नोडेन ने भी एक संदेश जारी कर बधाई भेजी है. फ्रीडम ऑफ द प्रेस फाउंडेशन को दिए एक वक्तव्य में स्नोडेन ने लिखा है कि वह "असाधारण धमकियों से नहीं डरने वाले बहादुर रिपोर्टरों और उनके साथियों" को सलाम करते हैं. वहीं कुछ लोग जो स्नोडेन के तरीकों से सहमत नहीं हैं उनका मानना है कि वह एक अपराधी है. आर-न्यू यॉर्क के प्रतिनिधि पीटर किंग का कहना है, "गैरकानूनी हरकतों को सम्मान देना, स्नोडेन जैसे गद्दार को मजबूत बनाने जैसा है, मुझे नहीं लगता कि यह कोई पुलित्जर पुरस्कार दिए जाने लायक बात है."

दोनों अखबारों ने स्नोडेन के हवाले से मिली खबरों को बिना किसी रिपोर्टर का नाम दिए प्रकाशित किया. लॉरा पोइत्रास नाम की एक डॉक्यूमेंट्री फिल्म निर्माता का नाम इन दोनों ही अखबारों में छपी खबरों में जाता था क्योंकि सिर्फ वह ही स्नोडेन के साथ सीधे संपर्क में थीं. फिर भी पुलित्जर पुरस्कार के प्रशासक रहे सिग गिसलर का मानना है कि कि विजेता का चुनाव कठिन था और पुरस्कार "स्नोडेन पर केन्द्रित नहीं" था. गिसलर का कहना है कि दोनों अखबारों ने "इस बहस को बढ़ावा दिया कि प्राइवेसी और सुरक्षा के बीच संतुलन कैसे बनाया जाए और यह बहस अब भी जारी है."

आरआर/एएम (एपी,एएफपी)