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ताना बाना

एनआरआई दूल्हों से शादी की सजा

अमनजोत कौर के पास सुंदर सी फोटो एल्बम और हनीमून पर जाने के लिए ट्रेन की टिकटें ही शादी की दो निशानियां हैं. वह उन हजारों लड़कियों में शामिल हैं जो एनआरआई दूल्हों से शादी की कड़वी यादों का शिकार हैं.

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अमनजोत कौर की शादी पंजाब के एक छोटे से गांव में हुई लेकिन उसका पति कनाडा के मांट्रियल में रहता है. शादी के बाद वह कनाडा चला गया और वादा कर गया कि वीजा के लिए जरूरी दस्तावेज भेज देगा. अमनजोत को अब तक दस्तावेजों का इंतजार है. जैसे तैसे अमनजोत ने अपने पति से संपर्क किया लेकिन उसने पहचाने से ही इनकार कर दिया.

शादी या कारोबार

दो साल पहले शादी के बाद से डिप्रेशन में रहने वाली 22 वर्षीय अमनजोत बताती हैं, "उससे बात करने के लिए मैंने 120 पत्र लिखे, लगभग 500 टेलीफोन किए. लेकिन उस पर कोई असर नहीं पड़ा. ऐसे आदमी से प्यार करने के लिए मुझे खुद से ही नफरत होती है. उसने मुझे और मेरे परिवार को धोखा दिया है." अमनजोत के पिता को बेटी की शादी धूमधाम से करने के लिए अपनी चार एकड़ जमीन भी बेचनी पड़ी.

Spezialbild: Monsoon Wedding, Bollywood-Film aus Indien

अमनजोत भारत की उन हजारों लड़कियों में शामिल है, जिनसे विदेश में रहने वाले भारतीयों ने शादी तो की लेकिन कभी साथ नहीं ले गए. ऐसे लोग शादी में मिलने वाले पैसे और दहेज को जरूर साथ ले जाते हैं. पंजाब में काम करने वाले एक छोटे से राजनीतिक संगठन लोक भलाई पार्टी का कहना है कि लगभग 22,000 लड़कियों ने अपने एनआरआई पतियों के खिलाफ आपराधिक शिकायतें दर्ज कराई हैं. पार्टी के संस्थापक बी रामूवालिया बताते हैं कि 10 साल में उन्होंने इस तरह की 1,200 लड़कियों की मदद की है. उनका कहना है, "इस तरह के लोगों के लिए शादी करना पैसा बनाने का सबसे आसान तरीका है. दहेज मिलने के बाद ही वे देश से जाने की तैयारी करने लगते हैं. इस तरह की लड़कियों की असल संख्या का पता लगाना मुश्किल है क्योंकि रूढीवादी पृष्ठभूमि होने की वजह से वे समझती हैं कि शिकायत दर्ज कराने से परिवार की बदनामी होगी."

हसीन सपनों का दर्दनाक अंत

भारत में 1961 से दहेज लेना और देना कानूनी तौर पर जुर्म है, लेकिन पारपंरिक तौर पर दुल्हन के घर वाले अब भी शादी में महंगे तोहफे, कपड़े और गहने देते हैं. अमनजोत यह बताने को तैयार नहीं कि उसके घर वालों ने कितना दहेज दिया, लेकिन यह रकम अकसर लाखों में होती है. इन दिनों भी भारत में शादियों का सीजन है. कनाडा, ब्रिटेन और दूसरे पश्चिमी देशों में रहने वाले भारतीय युवा दुल्हन तलाशने भारत का रुख कर रहे हैं क्योंकि उनके परिवार वाले अपने समाज और संस्कारों वाली बहू ही पसंद करते हैं. पंजाब में बहुत सी लड़कियां गांव की जिंदगी से दूर विदेश में रहने का सपना देखती हैं और एनआरआई दूल्हों के चक्कर में पड़ जाती हैं. अमनजोत कहती हैं, "मैं हमेशा से विदेश में रहने का सपना देखती थी. हर लड़की अच्छा पति और खुशहाल परिवार चाहती है, लेकिन मुझे नहीं लगता कि मुझे यह सब मिल पाएगा."

इन लड़कियों को हॉलीडे ब्राइड्स का नाम भी दिया जाता है. उनका दोबारा शादी करना भी बहुत मुश्किल होता है. इसीलिए वह खुद को अपने माता पिता पर बोझ भी समझने लगती हैं. वे इसी उम्मीद में जीती हैं कि एक दिन उनके एनआरआई पति का दिमाग बदलेगा. लेकिन 2004 में ब्रिटेन में रहने वाले एक लड़के से शादी करने वाली राधा नवीन का कहना है, "ऐसा कभी नहीं होता. ऐसे लड़के फिर कभी गांव में वापस नहीं आते. उन्हें डर होता है कि गांव वाले उन्हें गिरफ्तार करा देंगे या पिटाई कर देंगे. चंडीगढ़ में रहने वाली राधा अब टेलरिंग का बिजनेस करती है और उसने ऐसी ही लड़कियों को काम पर रखा है जिन्हें छोड़ दिया गया है.

Spezialbild: Monsoon Wedding, Bollywood Film aus Indien

कौन करे सुनवाई

राधा कहती हैं, "आप पंजाब के किसी भी गांव में चले जाइए वहां आपको कम से कम एक हॉलीडे ब्राइड जरूरी मिलेगी जो अपने माता पिता के साथ रह रही है." अपनी कहानी बताते हुए राधा कहती हैं कि शादी के चार दिन बाद ही उसके पति ने बता दिया कि ब्रिटेन में भी उसकी एक गर्लफ्रेंड है और राधा को तभी वीजा दिलाने की कोशिश की जाएगी, अगर वह उस "दूसरी औरत" के साथ रहने को राजी हो. लेकिन राधा ने इससे इनकार कर दिया और पुलिस में शिकायत दर्ज कराई. लेकिन वह लड़का पुलिस वालों को रिश्वत दे कर भागने में कामयाब रहा.

पंजाब यूनिवर्सिटी की 2007 की रिपोर्ट कहती है कि राज्य में लगभग 25,000 इस तरह छोड़ी हुई लड़कियां है और वे अपना हक पाने के लिए लड़ रही है लेकिन देश का कानूनी तंत्र उनके लिए ज्यादा मददगार साबित नहीं होता. ऐसे में सरकार को इस समस्या से निपटने के लिए कड़े कदम उठाने होंगे. लेकिन राधा कहती है कि पंजाब के राजनेताओं को इसकी ज्यादा परवाह नहीं है क्योंकि जिन परिवारों के लड़के इस तरह लड़कियों को धोखा देते हैं, वे राजनीतिक पार्टियों को मोटा चंदा देते हैं.

रिपोर्टः एएफपी/ए कुमार

संपादनः ए जमाल

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