एड्स जितना ही खतरनाक है हेपेटाइटिस | विज्ञान | DW | 28.07.2014
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विज्ञान

एड्स जितना ही खतरनाक है हेपेटाइटिस

हेपेटाइटिस के कारण हर साल दुनिया भर में कम से कम 14 लाख लोगों की जान जाती है. कई तरह के टीकाकरण अभियानों के बावजूद लोगों में इस बीमारी को लेकर जागरूकता की कमी है.

विश्व हेपेटाइटिस दिवस पर सरकारों से हेपेटाटिटिस को लेकर भी उसी तरह के अभियान चलाने की अपील की गई है जिस तरह के एचआइवी एड्स के चलाए जा रहे हैं. एड्स की ही तरह हेपेटाइटिस भी वायरस के कारण होता है. यह वायरस लीवर पर हमला करता है जिसका नतीजा कैंसर के रूप में सामने आता है.

हेपेटाटाइटिस में अलग अलग तरह के संक्रामक रोग होते हैं जिन्हें ए बी सी डी और ई में बांटा गया है. 90 फीसदी मौतें हेपेटाइटिस बी और सी के कारण होती हैं. एशिया में होने वाली मौतों की संख्या काफी ज्यादा है. इसमें चीन के बाद भारत दूसरे नंबर पर है. एड्स की तरह हेपेटाइटिस बी और सी वायरस का संक्रमण भी गर्भवती महिला से बच्चे को होता है. इसके अलावा संक्रमित सुई और असुरक्षित यौन संबंध बनाने से भी संक्रमण का खतरा रहता है.

कैलिफोर्निया की स्टैनफर्ड यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर सैम्यूल सो का कहना है, "हेपेटाइटिस भी हर साल करीब उतने ही लोगों की जान लेता है जितना एड्स. इसलिए जरूरी है कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर इस ओर भी उतना ही ध्यान दिया जाए." वहीं विश्व स्वास्थ्य संगठन डब्ल्यूएचओ में हेपेटाइटिस प्रोग्राम के प्रमुख स्टेफन विक्टर का कहना है कि धीरे धीरे बदलाव आ रहा है. खास कर हेपेटाइटिस सी को ले कर नई किस्म की दवाएं विकसित की जा रही हैं जो "चिकित्सा के क्षेत्र में क्रांति" ला रही हैं.

रक्तदान से हेपेटाइटिस

एक बड़ा खतरा यह है कि कई लोगों को शरीर में मौजूद हेपेटाइटिस वायरस के बारे में जानकारी ही नहीं होती. एक नए शोध में कहा गया है कि ब्रिट्रेन में हर 3,000 में से एक रक्तदाता हेपेटाइटिस ई से संक्रमित है. वर्ल्ड हेपेटाइटिस डे पर प्रकाशित इस शोध में बताया गया है कि 2,25,000 सैंपल में से 79 में हेपेटाइटिस ई का वायरस पाया गया. विकसित देशों में इस वायरस ता खतरा ज्यादा है. यह वायरस संक्रमित सूअर और पानी से फैलता है.

इंग्लैंड के स्वास्थ्य विभाग के रिचर्ड टेडर का अनुमान है कि शोध के दौरान 80,000 से एक लाख संक्रमण के मामले हुए जो अब तक सामने नहीं आए हैं. शोध में स्वीडन और जर्मनी को उन देशों की सूची में रखा गया है, जिनमें संक्रमण काफी ज्यादा है. अब तक यूरोपीय संघ में ऐसा कोई कानून नहीं है जिसके तहत रक्तदान के बाद खून की हेपेटाइटिस के लिए जांच की जाए.

वायरस के शरीर में प्रवेश करने के बाद बुखार होता है और मरीज की भूख में कमी आती है. धीरे धीरे यह लीवर को पूरी तरह खराब कर देता है. अब तक इसका कोई इलाज मौजूद नहीं है. ऐसे में शोधकर्ताओं की मांग है कि सावधानी पर ज्यादा ध्यान दिया जाए.

आईबी/एमजे (एएफपी)

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