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जर्मन चुनाव

एड्स के कारण अनाथ होते भारतीय बच्चे

भारत में 15 लाख बच्चे ऐसे हैं जो जो एड्स के कारण अनाथ हो गए हैं. ऐसे बच्चों के लिए जयपुर में खास आश्रम है. माता पिता के बगैर, इतनी गंभीर बीमारी से ग्रस्त ये बच्चे आखिर रहते कैसे हैं. जसविंदर सहगल की खास रिपोर्ट

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एड्स के इस माह में जयपुर की सड़कों पर गुजरती मेरी कार ऐसे ही मकान के सामने जा पहुंची जिसे लोग एड्स अनाथालय के नाम से जानते हैं. यहीं मैंने एक दिन बिताया

20-22 बच्चे भगवान के आगे प्रार्थना कर रहे हैं. प्रार्थना में भगवान से इस बात की माफी मांगी जा रही है कि बच्चे भगवान के नाम से पहले अपने माता पिता का नाम लेना चाहते हैं. इन बच्चों में शामिल है 11 साल की एक लड़की. "मेरे पापा सेना में थे और उन्हें एड्स की बीमारी थी. उनकी मृत्यु के बाद ताऊ जी ने हमें घर से बाहर निकाल दिया. चूंकि हम अपनी आवश्यकताओं की पूर्ति नहीं कर सकते थे इस लिए हम यहां आ गए. इस बालिका की मां भी इसी अनाथाश्रम में हैं और बच्चों के लिए खाना पकाने का काम करती हैं. "एड्स के कारण हुई मेरे पति की मौत के बाद मेरे ससुराल वाले मुझे रोज पीटते थे. मैं भी एच. आई. वी. के कारण बीमार रहती थी और खाने के लिए हमारे पास कुछ नहीं था. ऐसे में मुझे यहां नौकरी भी मिल गयी और मेरी बेटी को सहारा भी."

Indien Jaipur Aids-Waisen

जयपुर में एड्स से अनाथ हुए बच्चों के लिए बने आश्रम में

मुश्किलें कम नहीं

अनाथालय के प्रबंधक जगदीश बच्चों को योग सिखाते हैं. जगदीश ने बताया चूंकि सरकार द्वारा एच. आई. वी.संक्रमित बच्चों के लिए कोई छात्रावास अथवा अनाथालय नहीं खोला गया है ऐसे में एच. आई. वी. पॉजिटिव लोगों ने अपने दम पर यह केयर होम संचालित कर रखा है. उन का यह भी कहना है कि धनाभाव के कारण इसे चलाना बहुत ही मुश्किल हो रहा है. उन्होंने कहा कि सरकार गरीबों के साथ साथ महिलाओं या विभिन्न जातियों के लिए तो छात्रावास खोल सकती है पर एच. आई. वी. बच्चों के लिए नहीं .

अनाथालय को चलाने वाले राजस्थान नेटवर्क आफ पॉजिटिव पर्सन्स के अध्यक्ष बृजेश दुबे ने बताया कि पूरे देश में नाको (नेशनल एड्स कंट्रोल ऑर्गेनाइजेशन) ने सिर्फ दस एड्स अनाथालय खोल रखे है जो की बहुत ही कम हैं. उनका कहना था कि अकेले राजस्थान में ही उनकी संस्था तीन केंद्र चला रही हैं जहां साठ से ज्यादा बच्चे रहते हैं. नाको भारत में एड्स नियंत्रण का काम कर रही सरकारी संस्था है.

रोजमर्रा की परेशानियों और संघर्ष की बात करते हुए उन्होंने बताया. कि दो माह पहले ही अनाथाश्रम का एक बच्चा एड्स के उपचार में काम आने वाली सेकण्ड लाइन दवाइयों के अभाव में दम तोड़ चुका हैं.

अनाथ बच्चों के लिए नहीं

राजस्थान में एड्स नियंत्रण का काम करने वाली सरकारी संस्था राजस्थान एड्स कंट्रोल सोसाइटी के कार्यालय में डाक्टर प्रदीप शारदा सोसाइटी के प्रमुख हैं. उन्होंने अपना पक्ष रखते हुए कहा, "वर्तमान में सोसाइटी" द्वारा राजस्थान में एड्स नियंत्रण के लिए 47 कार्यक्रम है पर हां यह सही है कि इन में से एक भी एड्स के कारण अनाथ हुए बच्चों के लिए नहीं है. हम अगले साल अपने कार्यक्रमों में इसे भी जोड़ने का प्रयास करेंगें. यह निश्चित रूप से एक महत्वपूर्ण विषय है और हम अवश्य ही कुछ करेंगें"

इसे सरकार की लाचारी कहें या बेरुखी कि आज भारत में हजारों बच्चे एड्स के कारण दम तोड़ते जा रहें हैं.

रिपोर्टः जसविंदर सहगल, जयपुर

संपादनः आभा एम

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