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विज्ञान

एचआईवी पीड़ितों में टीबी जांच का नया टेस्ट

शोधकर्ताओं ने एक ऐसे नए टेस्ट का दावा किया है जो बेहद कम कीमतों में एचआईवी मरीजों में टीबी का पता लगा सकता है. इससे हजारों लोगों की जान बच सकती है.

केप टाउन यूनिवर्सिटी के शोधकर्ताओं का कहना है कि एचआईवी ग्रस्त लोगों में टीबी की जांच के लिए बेहद मामूली खर्च में होने वाले एक नए यूरीन टेस्ट की मदद से हजारों लोगों की जिंदगी बचाई जा सकती है. खासकर ये उप सहारा से लगे अफ्रीकी देशों में काफी मददगार हो सकता है.

'द लेंसेट' मेडिकल जर्नल में प्रकाशित अपने इस शोध में शोधकर्ता कीर्टन डेडा का कहना है कि अफ्रीका में एचआवी/एड्स से पीड़ित लगभग 40 प्रतिशत लोगों की टीबी के कारण मौत होती है. इनमें से तकरीबन आधे लोगों को अपने रोग के बारे में पता भी नहीं चल पाता. वे कहते हैं, ''जिनका एचआईवी ​एडवांस स्टेज में पहुंच जाता है, ऐसे मरीजों में यह पता कर पाना मुश्किल हो जाता है कि उन्हें कैसा संक्रमण हुआ है. खासकर टीबी का पता लगाना और भी अधिक मुश्किल होता है.''

अपने आलेख में डेडा ने लिखा है कि कम और मध्यम आय वाले देशों में एचआईवी मरीजों के मरने की सबसे बड़ी वजह टीबी है. उधर विश्व स्वास्थ्य संगठन का भी कहना है कि दूसरे अन्य संक्रमणों के बजाय टीबी की वजह से ही एचआईवी/एड्स के सबसे अधिक मरीज मारे जा रहे हैं.

एचआईवी मरीजों में टीबी की जांच करना बहुत कठिन है क्योंकि पारंपरिक तरीकों में छाती के एक्सरे और बलगम के नमूने लेने होते हैं. डेडा कहते हैं कि गंभीर मरीजों से बलगम के नमूने लेना मुश्किल है. इस नए यूरीन टेस्ट की कीमत महज 2.66 डॉलर है और इसका परिणाम केवल 25 मिनट में निकल आता है. साथ ही इसमें बलगम के नमूने की भी जरूरत नहीं होती.

दक्षिण अफ्रीका में मौजूद डेडा ने फोन पर बात करते हुए बताया, ''हमने इस अध्ययन में पाया है कि अगर आप इस नए टेस्ट का इस्तेमाल करते हैं और परिणामों के ​मुताबिक बताया गया उपचार करते हैं तो आप कई जिंदगियां बचा सकते हैं.'' डेडा कहते हैं, ''अफ्रीका में सालाना तीन लाख एचआईवी से पीड़ित लोग टीबी की वजह से मारे जाते हैं. इस कम कीमत के टेस्ट का इस्तेमाल कर हजारों जिंदगियों को बचाया जा सकता है. जल्दी टीबी का पता लगने से इन मरीजों का इलाज जल्द करवाया जा सकेगा.''

यह अध्ययन उप सहारा से लगे 4 अफ्रीकी देशों के 10 अस्पतालों के 2500 मरीजों में किया गया था.

आरजे/आईबी (रॉयटर्स)

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