एक साल से तुर्की की जेल में पत्रकार यूजेल | दुनिया | DW | 14.02.2018
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दुनिया

एक साल से तुर्की की जेल में पत्रकार यूजेल

सलाखों के पीछे 365 दिन. तुर्की की जेल में बंद तुर्क जर्मन पत्रकार डेनिस यूजेल वहां के राजनीतिक बंदियों को आवाज दे रहे हैं. बहुत से लोग उन्हें तुर्की और जर्मनी के संबंधों का बंधक मानते हैं.

"मैंने पहले भी ऐसे लोगों से बात की है जिन्हें यातना दी गई है या जो यहूदी नरसंहार में जीवित बच गए. लेकिन अब मुझे पता है कि आप इस तरह की कहानियों को अलग तरीके से सुनते हैं यदि आप खुद ऐसी सरकार के कब्जे में हों." ये बात तुर्की की जेल में एक साल से बिना किसी आरोप के बंद यूजेल ने लिखी है जो उनकी गिरफ्तारी की पहली वर्षगांठ पर प्रकाशित हो रही है.

इस्तांबुल के हाइनरिष बोएल न्यास दफ्तर के प्रमुख क्रिस्टियान ब्राकेल कहते हैं, "डेनिस यूजेल ऐसे इंसान हैं जो अपनी रिपोर्टिंग में हमेशा मुखर रहे हैं. उन्होंने दक्षिणपंथियों और वामपंथियों दोनों की आलोचना की है और अत्यंत सख्त विश्लेषण लिखे हैं." 1973 में फ्रैंकफर्ट के निकट तुर्क परिवार में पैदा हुए यूजेल जर्मन दैनिक डी वेल्ट के तुर्की में संवाददाता थे. 14 फरवरी 2017 को पुलिस ने उन्हें हिरासत में ले लिया. उसके बाद गिरफ्तारी का वारंट जारी किया गया. मार्च 2017 से 44 वर्षीय यूजेल सिलिवरी जेल में कैद हैं. अभी तक उनके खिलाफ कोई आरोप पत्र दाखिल नहीं किया गया है. बहुत से लोग उन्हें तुर्की सरकार का बंधक मान रहे हैं. 

जर्मन पत्रकार की तुर्की में गिरफ्तारी की निंदा

ब्राकेल का कहना है कि तुर्की की सरकार की कटु आलोचना यूजेल के लिए नियति बन गई. "इसके द्वारा शुरू में जर्मनी से कुछ लेने की उम्मीद की गई थी, ये तो पता नहीं लेकिन हर हाल में उनके जरिए ब्लैकमेल की कोशिश तो की ही गई." वारंट जारी करते समय यूजेल पर लोगों को भड़काने और आतंकवादी प्रोपेगैंडा करने का आरोप लगाया गया. उसके सबूत में उनके 8 लेखों को शामिल किया गया जो यूजेल ने अपने अखबार डी वेल्ट में लिखे थे.

यूजेल की नई किताब में उनमें से 2 लेखों को शामिल किया गया है. इसमें से एक प्रतिबंधित कुर्द संगठन पीकेके के उपाध्यक्ष के साथ इंटरव्यू है जिसमें उसने स्वीकार किया है कि संगठन के अंदर फांसियांदी गईं. एक और लेख इस बारे में कि राष्ट्रपति रेचेप तय्यप एर्दोवान ने अपनी ताकत का विस्तार कैसे किया है. किताब की प्रकाशक डोरिस आक्राप ने प्रस्तावना में लिखा है, दूसरे देशों में इस तरह के लेखों के लिए पत्रकारिता पुरस्कार मिलता है, लेकिन समकालीन तुर्की में उसकी सजा जेल है.

स्वतंत्र न्यायपालिका?

2016 की गर्मियों में तख्तापलट की कोशिशों के बाद तुर्की में बड़े पैमाने पर गिरफ्तारियां हुई. उनमें डेनिस यूजेल के साथ 28 जर्मन नागरिक भी हैं. जर्मन विदेश मंत्रालय के अनुसार मानवाधिकार कार्यकर्ता पेटर स्टॉटनर और पत्रकार मेसाले तोलू सहित करीब 8 लोगों को छोड़ा जा चुका है. तुर्की की सरकार बार बार दावा करती है कि वहां की न्याय व्यवस्था स्वतंत्र है. लेकिन हाइनरिष बोएल न्यास के प्रमुख का कहना है कि इसका सवाल ही नहीं उठता.

राजनीतिक हस्तक्षेप के बाद हाल में दो बंदियों को रिहा नहीं किया गया जबकि तुर्की की सर्वोच्च अदालत ने उनकी रिहाई के आदेश दिए थे. इसी तरह का मामला मानवाधिकार संगठन एमनेस्टी इंटरनेशनल की तुर्की शाखा के प्रमुख के साथ भी हुआ जिसकी रिहाई का आदेश कुछ ही घंटों के बाद वापस ले लिया गया. यूजेल के मामले में राष्ट्रपति ने खुद हस्तक्षेप किया, "वह सचमुच एक एजेंट और आतंकवादी है. काहे का पत्रकार. जर्मनदूतावास ने उसे एक महीने तक समर रेसिडेंस में छुपा रखा था."

जर्मन सरकार की कोशिश

बाद में राष्ट्रपति एर्दोवान ने यूजेल की रिहाई के बारे में कहा, "किसी हाल में नहीं, जबतक मैं इस पद पर हूं, कभी नहीं." हालांकि क्रिस्टियान ब्राकेल के अनुसार एर्दोवान ने जर्मन विदेश मंत्री जिगमार गाब्रिएल के साथ बातचीत में अनौपचारिक रूप से "डेनिस यूजेल को उन तुर्क सैनिकों के बदले छोड़ने की पेशकश की थी जिन्होंने तख्तापलट में हिस्सा लिया था और जिन्हें जर्मनी में शरण मिली है."

जर्मन चांसलर अंगेला मैर्केल ने भी यूजेल की गिरफ्तारी पर स्पष्ट दृष्टिकोण अपनाया था. गिरफ्तारी के दो हफ्ते बाद ही मैर्केल ने कहा, "पत्रकारों को अपना काम करने दिया जाना चाहिए. इसलिए हम डेनिस यूजेल के बारे में सोचते हैं जो तुर्की में हिरासत में हैं, जिनकी रिहाई की हम मांग करते हैं, क्योंकि हमें विश्वास है कि उन्होंने स्वतंत्र पत्रकारिता का काम करने के अलावा कुछ भी अलग नहीं किया है. इसे मनवाया जाना चाहिए." चांसलर ने वादा किया कि जर्मन सरकार हर मुमकिन प्रयास करेगी कि ये संभव हो.

खुद को नुकसान पहुंचाए बिना दबाब

आलोचकों का कहना है कि शुरू में जर्मनी ने अपने नागरिक की रिहाई के लिए कोई ज्यादा प्रयास नहीं किया. क्रिस्टियान ब्राकेल भी मानते हैं कि गर्मियों में पहली बार प्रयास हुए. उस समय विदेश मंत्री ने तुर्की के खिलाफ यात्रा की चेतावनी जारी की और कहा कि कर्ज की गारंटी में सख्ती बरती जाएगी. लेकिन अंत में तुर्की में निवेश करने वाले जर्मन उद्यमियों को नुकसान न पहुंचाने के लिए चांसलर दफ्तर की सलाह पर गारंटी की सीमा पर समझौता हुआ.

हालांकि जर्मन आर्थिक तौर पर मजबूत देश है और तुर्की को यूरोप के साथ काम करने वाला संबंध चाहिए क्योंकि उसके साथी लगातार कम होते जा रहे हैं. लेकिन राजनीतिक विश्लेषक ब्राकेल का कहना है कि जर्मनी और तुर्की के बीच आर्थिक, सैनिक और सांस्कृतिक संबंध इतने सघन हैं कि जर्मनी के लिए खुद को नुकसान पहुंचाए बिना तुर्की पर बहुत ज्यादा दबाव डालना मुश्किल है.

चाय पर चर्चा

2018 में दोनों पक्षों ने खुलकर संबंधों को सामान्य बनाने पर ध्यान दिया. विदेश मंत्री जिगमार गाब्रिएल ने तुर्की के विदेश मंत्री मेवलुत कावुसोलू से उनके चुनाव क्षेत्र में मुलाकात की. उसके बाद कावुसोलू गाब्रिएल से मिलने उनके गृहनगर गोसलार आए जहां उन्हें चाय पिलाते हुए गाब्रिएल की तस्वीर सुर्खियों में रही. कावुसोलू ने गाब्रिएल को दोस्त बताया, एक दोस्त जिससे उन्हें यूरोपीय संघ के साथ कस्टम संधि के विस्तार और सैन्य सहयोग में मदद की उम्मीद है. गाब्रिएल ने कहा कि हथियारों की सप्लाई समस्याओं के समाधान पर ही संभव है और इसमें यूजेल का मामला भी है.

तुर्की की कैद में बंद पत्रकार ने इस पर चिंता व्यक्त की कि वे राजनीतिक मोहरा बन सकते हैं. वकील के जरिए दिए गए इंटरव्यू में यूजेल ने कहा कि वे अपनी आजादी न तो राइनमेटाल के टैंकों की बिक्री के बदले चाहते हैं और न ही सैनिक विद्रोह करने वाले अधिकारियों के बदले. यूजेल ने कहा, "वह गंदी डील के लिए उपलब्ध नहीं हैं." जिगमार गाब्रिएल ने स्पष्ट किया कि गंदी डील की कोई बात ही नहीं थी. क्रिस्टियान ब्राकेल के लिए यह गंदी डील ही होगी यदि यूजेल की रिहाई के बाद तुर्की में मानवाधिकारों के लिए लड़ रहे और जेल मे बंद लोगों की बात ही न हो.

आंद्रिया ग्रुनाऊ

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