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दुनिया

एक मंच पर जुटेंगे जर्मन भारतीय

जर्मनी में रहने वाले भारतीय पेशेवरों और कारोबारियों को साथ लाने के लिए एक फोरम शुरू किया गया है. भारत के वाणिज्य दूत रवीश कुमार ने बताया कि यह कदम दोनों मुल्कों के बीच कारोबार और संपर्क बढ़ाने के इरादे से उठाया गया है.

भारत और जर्मनी की सरकारों का सहयोग दशकों पुराना है. 1951में भारत ने पश्चिम जर्मनी को राष्ट्र के तौर पर मान्यता दी. तब से लेकर अब तक दोनों देशों ने शिक्षा और तकनीक पर कई समझौते किए हैं. डीडब्ल्यू से बातचीत में रवीश कुमार ने कहा कि यह दोनों देशों को बहुत फायदा पहुंचा सकता है.

डीडब्ल्यूः भारत और जर्मनी के बीच संबंधों में इस वक्त ध्यान किस पर दिया जा रहा है?

रवीश कुमारः जर्मनी और भारत के बीच रिश्ता काफी मजबूत रहा है. अभी के समय में देखें तो हमारा राजनीतिक रिश्ता बहुत अच्छे दौर से गुजर रहा है. मेरे हिसाब से यह अभी तक का सबसे अच्छा दौर है. हमारा ध्यान इस वक्त वित्तीय और वाणिज्य से संबंधित मुद्दों पर है, आउटरीच पर है, व्यावसायिक प्रशिक्षण पर है, शिक्षा में सहयोग पर है.

इस बीच भारत और जर्मनी के बीच व्यापार कितने का हुआ है?

अभी भारत और जर्मनी के बीच व्यापार 17.7 अरब यूरो का है. इसमें पिछले साल के मुकाबले कुछ कमी आई है और इस कमी का कारण वैश्विक अर्थव्यवस्था में गिरावट है. हम उम्मीद करते हैं कि आने वाले सालों में हमारी जो बढ़ोतरी हुई, व्यापार में, हम उस पर वापस आ जाएंगे.

देखा जाए तो भारत के छात्र ज्यादातर अमेरिका में पढ़ना चाहते हैं, जर्मनी में नहीं. ऐसा क्यों?

अब हालत बदल रही है. अब जर्मनी में 6,000 छात्र हैं. पांच साल पहले यह आंकड़ा मुश्किल से 700-800 था. सिर्फ आखेन शहर में 1,000 छात्र हैं. और मेरे ख्याल से अगले चार पांच साल में यह संख्या दोगुनी होगी. हर एक साल इसमें इजाफा हो रहा है. भारत में लोग जानने लगे हैं कि जर्मनी में खास तौर से तकनीकी शिक्षा बहुत अच्छी है. यहां की उच्च शिक्षा को बहुत बढ़िया माना जाता है.

इस सिलसिले में भारतीय वाणिज्य दूतावास किस तरह की रणनीति अपना रही है?

मेरी जिम्मेदारी में चार राज्य आते हैं, नॉर्थराइन वेस्टफेलिया, राइनलैंड पलैटिनेट, सारलैंड और हेसेन. मेरा ध्यान तीन केंद्रों में बंटा है. वाणिज्य और वित्तीय मामलों को मैं अपना सबसे जरूरी क्षेत्र समझता हूं. उसके बाद आउटरीच का काम है, जिसमें मेरा प्रयास रहा है कि भारत के जो लोग यहां हैं, यहां पर छात्र और बुद्धिजीवी हैं, उन तक पहुंचने का है. इसी सिलसिले में हमने इंडिया बिजनेस फोरम शुरू किया है जिसमें हम चाहते हैं कि भारत से सारे प्रोफेशनल और व्यापारी सब एक जगह आएं. हमारी शुरुआत काफी अच्छी रही है. मेरा प्रयास रहेगा कि जब मैं वाणिज्य चैंबर और शहरों के मेयर से मिलूं और एक बिजनेस टीम लेकर जाऊं ताकि बिजनेस के स्तर पर रिश्ते जोड़े जा सकें.

जर्मनी और भारत के बीच रिश्तों का कैसा भविष्य देखते हैं आप?

भविष्य बहुत ही उज्ज्वल है. व्यापार में बहुत संभावनाएं हैं, निवेश में बहुत संभावनाएं हैं. जर्मनी में जो लघु और मध्य स्तर के उद्योग हैं और भारत में जो हैं, उन दोनों के बीच कई संभावनाएं हैं. व्यावसायिक प्रशिक्षण में बहुत संभावनाएं हैं क्योंकि जर्मनी का यह प्रशिक्षण सबसे अच्छा माना जाता है. शिक्षा सहयोग में बहुत संभावनाएं हैं. जहां तक भारत में जर्मनी के निवेश का सवाल है, उसमें अगर हम सेक्टर पहचान लें, तो और संभावनाएं बढ़ेंगी. इससे दोनों देशों को फायदा होगा.

इंटरव्यूः मानसी गोपालकृष्णन

संपादनः अनवर जे अशरफ

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