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विज्ञान

एक थे भारत, अंटार्कटिका और मोजाम्बिक

नक्शे में भारत, अंटार्कटिका और मोजाम्बिक भले ही एक दूसरे से दूर हों लेकिन इनकी बनावट कहती है कि ये पहले एक थे. गुजरात के रिसर्चरों को इनकी संरचना में कई समानताएं मिली हैं.

वैज्ञानिकों ने एक नए शोध के जरिए पता लगाया है कि पृथ्वी का सबसे दक्षिणी महाद्वीप अंटार्कटिका जिसका 95 फीसदी हिस्सा बर्फ से ढका है, दक्षिण भारत और मोजाम्बिक से मिलता है. उनका मानना है कि पृथ्वी की संरचना के समय ये तीनों हिस्से एक दूसरे से जुड़े हुए थे. पोलर रिसर्च नाम की अंतरराष्ट्रीय पत्रिका में छपी रिपोर्ट के अनुसार इन तीनों इलाकों के बाहरी परत यानी भूपर्पटी का अंदरूनी हिस्सा अनछुआ है और इसी परत से तीनों की समानता के प्रमाण मिले हैं.

रिसर्च के दौरान पता चला है कि अंटार्कटिका की बाहरी परत पश्चिम के मुकाबले पूर्वी इलाकों में ज्यादा मोटी है. पूर्वी हिस्से में शिरमाखर मरु उद्यान के पास बाहरी परत की मोटाई ज्यादा पाई गई. शिरमाखर मरु उद्यान पूर्वी अंटार्कटिका में 35 किलोमीटर तक फैला तटवर्ती पठारी इलाका है जहां बर्फ नहीं होती.

Innerer Aufbau der Erde

रिसर्च के परिणाम 24वें भारत अंटार्कटिक वैज्ञानिक अभियान के अंतर्गत जमा किए गए. इस रिसर्च पर काम करने वाले वैज्ञानिकों में प्रमुख हैं गुजरात एनर्जी रिसर्च मैनेजमेंट इंस्टीट्यूट के निदेशक टी हरिनारायणा. यह रिसर्च तब शुरू हुई जब वह हैदराबाद के सीएसआईआर इंस्टीट्यूट के नेश्नल जियोफिजिक्स रिसर्च संस्थान में काम कर रहे थे. उनके साथ काम करने वाले वैजानिकों में डीएन मूर्ती, के वीरस्वामी, एम संतोष और यूके सिंह भी शामिल हैं. हरिनारायनणा ने बताया, "अंटार्कटिका की बाहरी परत को समझना मुश्किल काम है. जानकारी इकट्ठा करने के लिए माप इत्यादि में कई मुश्किलें आती हैं. विद्युत चुम्बकीय संकेतों के जरिए पृथ्वी की संरचाना को समझने के लिए हमने बहुत किफायती तरीकों का इस्तेमाल किया है."

रिसर्च में 'मैग्नेटोटेल्योरिक्स' तकनीक का इस्तेमाल हुआ है जिसकी मदद से छिछली और गहरी दोनो तरह की परतों का अध्ययन किया जा सकता है. इसकी मदद से पृथ्वी के भीतर 50 से 100 किलोमीटर तक गहराई की छवि हासिल की जा सकती है. उन्होंने बताया कि शिरमाखर के पश्चिमी इलाकों में उन्हें मोजाम्बिक और दक्षिण भारत से काफी समानताएं मिली.

एनआर/ एसएफ (पीटीआई)

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