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दुनिया

एक तिहाई सीरिया बेघर

संकट के बीच सीरिया को जो मदद दी जा रही है, वह सागर में एक बूंद के बराबर है. संयुक्त राष्ट्र के अधिकारियों का दावा है कि सीरिया के अंदर 50 लाख लोग बेघर हो चुके हैं.

संयुक्त राष्ट्र के आंकड़ों के मुताबिक इसके अलावा करीब 20 लाख लोग पास पड़ोस के देशों में भागने को मजबूर हुए हैं. इसका मतलब सीरिया की कुल आबादी का करीब एक तिहाई हिस्सा घर छोड़ चुका है.

देश में हाहाकार मचा है और उसे विदेशी मदद की जरूरत है लेकिन दान देने वाले देशों के पैसे पूरे नहीं पड़ रहे हैं. सीरिया में संयुक्त राष्ट्र की रिफ्यूजी एजेंसी के तारिक कुर्दी का कहना है कि कम से कम तिगुना मदद की जरूरत है. देश में करीब ढाई साल से गृह युद्ध के हालात हैं, जिसमें एक लाख लोगों की जान जा चुकी है. अमेरिका के मुताबिक इनमें से कई लोग रासायनिक हथियार की भेंट चढ़ चुके हैं.

सीरिया के राष्ट्रपति बशर अल असद की सरकार ने रासायनिक हथियारों के इस्तेमाल से इनकार किया है. न तो अमेरिका और न ही असद प्रशासन ने अपने दावों के पक्ष में कोई सबूत पेश किया है. अमेरिका के राष्ट्रपति बराक ओबामा इस बीच अपने देश की संसद में सीरिया के मुद्दे पर समर्थन हासिल करने की कोशिश कर रहे हैं, ताकि "रासायनिक हथियारों के इस्तेमाल के बाद" असद प्रशासन के खिलाफ सैनिक कार्रवाई की जा सके. शुरू में लग रहा था कि राष्ट्रपति ओबामा कांग्रेस से समर्थन हासिल किए बगैर ही हमला करने का आदेश दे देंगे लेकिन हफ्ते के आखिर में उन्होंने अपना विचार बदल दिया.

इस बीच अरब लीग ने सैनिक कार्रवाई का समर्थन नहीं करने का फैसला किया है. रविवार को काहिरा में एक आपात बैठक के दौरान, इसने अमेरिका और संयुक्त राष्ट्र से कहा है कि वह समझबूझ कर कदम उठाएं. उसने साफ कर दिया है कि वह अमेरिका के हमले वाले सिद्धांत का साथ नहीं देगा. इससे पहले ब्रिटेन ने स्पष्ट कर दिया है कि वह सीरिया में सैनिक कार्रवाई का समर्थन नहीं करेगा क्योंकि वहां की संसद ने इसके विरोध में वोट दिया है.

असद प्रशासन को रूस और चीन का साथ मिला हुआ है, जो अमेरिका के किसी प्रस्तावित हमले का विरोध कर रहे हैं. चीन के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता होंग ली ने कहा कि सीरिया कि खिलाफ संभावित एकतरफा हमले को लेकर चीन चिंता में है और उसका मानना है कि अंतरराष्ट्रीय बिरादरी को "सीरिया के मुद्दे पर संयम से काम लेना चाहिए ताकि मध्य पूर्व में हालात और खराब न हों."

इस बीच, रूस के विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव ने कहा कि अमेरिका ने रासायनिक हथियारों के इस्तेमाल पर मॉस्को को जो दस्तावेज दिए हैं, वे "बिलकुल संतोषजनक नहीं" हैं. लावरोव ने कहा कि कोई भी पुख्ता सबूत नहीं है. उन्होंने बताया कि अमेरिका का कहना है कि वे पूरी जानकारी साझा नहीं कर सकते क्योंकि उनमें से कुछ "गोपनीय" हैं.

उधर अमेरिका के विदेश मंत्री जॉन केरी का कहना है कि खून और बालों के नए नमूने जमा किए गए हैं. सीरिया का संकट मार्च 2011 में शुरू हुआ, जब राष्ट्रपति असद के खिलाफ लोगों ने क्रांति की शुरुआत की. इसके बाद हालात लगातार बिगड़ते चले गए.

कुर्दी का कहना है कि बहुत ज्यादा मदद की दरकार है, "हमने जो कुछ किया है और संयुक्त राष्ट्र ने मानवीय आधार पर जो मदद की है, यह समुद्र में एक बूंद पानी के बराबर है."

एजेए/एमजे (एपी)

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