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दुनिया

एक चूड़ी रखेगी गर्भवती महिलाओं का ध्यान

मातृ-स्वास्थ्य को बेहतर करने के लिये एक उच्च तकनीक वाली चूड़ी (बेंगल) जैसी दिखने वाली डिवाइस "कोयल" तैयार की गई है. यह चूड़ी विषाक्त धुएं और स्वास्थ्य से जुड़े मसलों पर गर्भवती महिलाओं को ऑडियो के जरिये सुझाव देगी.

यह डिवाइस दूर-दराज के क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवायें पहुंचाने में मदद करेगी. हल्के वजन वाली इस चूड़ी को ग्रामीण जीवन के अनुकूल बनाया गया है जो गर्भवती महिलाओं को समय-समय पर खाने-पीने की भी जानकारी देगा. इस डिवाइस को तैयार करने वाली संस्था ग्रामीण इंटेल सोशल बिजनेस के मुख्य कार्यकारी पवेल हॉक के मुताबिक "ग्रामीण क्षेत्रों में महिलाओं और मोबाइल फोन का नाता मजबूत नहीं है, क्योंकि ग्रामीण क्षेत्रों में फोन पर अमूमन पुरूषों का एकाधिकार बना रहता है." उन्होंने बताया "हमारी कंपनी ने मातृ-स्वास्थ्य से जुड़ी कई ऐप भी तैयार की है लेकिन हमें जल्द ही एहसास हुआ कि कुछ ऐसा तैयार किया जाना चाहिये जिसे सिर्फ महिलायें इस्तेमाल कर सकें." 

ड्यूरेबल प्लास्टिक की बनी यह चूड़ी वाटर-प्रूफ होती है और इसकी लंबी चलने वाली बैट्री पूरी गर्भावस्था के दौरान चल सकती है. यहां तक कि इसे काम करने के लिये इंटरनेट की भी आवश्यकता नहीं होती है. 

कोयल (COEL) या कार्बन मोनोऑक्साइड एक्सपोजर लिमिटर, को इंटेल सोशल बिजनेस लिमिटेड (इंटेल कॉरपोरेशन का संयुक्त उद्यम) और बांग्लादेश की गैर लाभकारी संस्था ग्रामीण ट्रस्ट ने मिलकर तैयार किया है. हॉक के मुताबिक इस डिवाइस को कई बार रिचार्ज कर इस्तेमाल किया जा सकता है.

नये गहने

चूड़ी की तरह दिखने वाली यह डिवाइस कोयल, हर हफ्ते स्थानीय भाषा में दो मैसेज भेजेगी, साथ ही बतायेगी कि कब क्या खायें और कब डॉक्टर को दिखायें. जिस भी जगह कॉर्बन मोनोऑक्साइड की मात्रा अधिक होगी इसमें लगा अलार्म बज जायेगा और दूर रहने का संदेश देगा.

विश्व स्वास्थ्य संगठन के मुताबिक दुनिया भर में रोजाना तकरीबन 830 महिलाओं की गर्भावस्था और प्रसव के दौरान मौत हो जाती है. डब्लयूएचओ के मुताबिक इनमें से तकरीबन एक तिहाई मौतें दक्षिण एशिया में होती हैं. स्वास्थ्य सेवाओं में कमी के चलते मातृ मृत्यु दर ग्रामीण क्षेत्रों और गरीब महिलाओं में अधिक है.

बांग्लादेश में तकरीबन 70 फीसदी बच्चे आज भी घरों पर ही जन्म लेते हैं. डब्ल्यूएचओ के मुताबिक बांग्लादेश में हर साल 5,000 मातृ मृत्यु और 77 हजार नवजातों की मौत के मामले सामने आते हैं. कोयेल डिवाइस को फिलहाल उत्तर प्रदेश में प्रशिक्षण किया जा रहा है. हालांकि दूरदराज के कई इलाकों में अब स्मार्ट घड़ियों, जूतों और चश्मों को प्रयोग में लाया जाने लगा है. यहां तक कि मरीज भी कोलेस्ट्रॉल और इनसुलिन की जांच के भी नई तकनीकों का इस्तेमाल कर रहे हैं.

हॉक ने बताया कि कोयल की कीमत 12-15 डॉलर तक रखी गई है. उन्होंने कहा कि हम इस टूल को महिलाओं के सशक्तिकरण के लिये इस्तेमाल में लाना चाहते हैं.

एए/ओेएसजे (रॉयटर्स)

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