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एक गोत्र में विवाहों पर रोक फ़िलहाल नहीं

भारत के सर्वोच्च न्नायालय ने एक जनहित याचिका को ठुकराते हुए हिंदू विवाह अधिनियम में इस आशय के किसी संशोधन से मना कर दिया है कि एक ही गोत्र के लोगों के बीच विवाह पर प्रतिबंध होना चाहिये.

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उत्तरी भारत के ग्रामीण अंचलों में खाप पंचायतें कहलाने वाली ऐसी जातीय पंचायतें एक नया सिरदर्द बनती जा रही हैं, जो शादी-विवाह के मामलों में दखल देने लगी हैं. उनके कहने पर इज़्ज़त के नाम पर न केवल हत्याएं होने लगी हैं, एक नयी बॉलीवुड फ़िल्म भी बन रही है और बात सर्वोच्च न्यायालय तक पहुंच गयी है.

हरियाणा, उत्तर प्रदेश और राजस्थान के देहाती इलाकों में इन स्वघोषित पंचायतों का काफ़ी दबदबा बन गया है. उन्हीं के कहने से भारत के सर्वोच्च न्यायालय में एक जनहित याचिका दायर की गयी थी. उसमें मांग की गयी थी कि हिंदू विवाह अधिनियम में इस आशय का संशोधन किया जाना चाहिये कि एक ही गोत्र (कुनबे या उपजाति) के भीतर विवाह करना अवैध है. लेकिन, सर्वोच्च न्यायालय ने ऐसा करने से मना कर दिया है. याचिका दायर करने वालों को उसने सलाह दी है कि वे पंजाब और हरियाणा के न्यायालयों के सामने अपना पक्ष रखें.

इन जातीय पंचायतों के एक प्रतिनिधिमंडल ने अपनी बात मनवाने के लिए हरियाणा के

BDT Indische Mädchen heiraten symbolisch die Fruchtbarkeit

बालविवाह पर रोक है, पर कितना पालन होता है

मुख्यमंत्री भुपिंदर सिंह हूडा से मिल कर गत दस जून को उन्हें एक मांगपत्र भी दिया. सर्व जातीय सर्व खाप महापंचायत के 12 सदस्यों वाले इस प्रतिनिधिमंडल के नेता मेवा सिंह ने बाद में पत्रकारों को बताया कि मुख्यमंत्री हूडा ने उनसे कहा कि "उनका अपना निजी विचार तो यही है कि एक ही गोत्र के बीच वैवाहिक संबंध ठीक नहीं हैं. लेकिन, हमें अपनी इस मांग का कोई दोटूक जवाब नहीं मिला कि वे इस पर ज़ोर दें, ताकि हिंदू विवाह अधिनियम में संशोधन हो सके."

मेवा सिंह ने बताया कि उन्होंने हरियाणा के मुख्यमंत्री से यह भी अनुरोध किया कि इस मामले पर विचार करने के लिए सभी पार्टियों की एक सर्वदलीय बैठक बुलायें. "हम स्वयं भी सभी पार्टियों के नेताओं से मिलेंगे और पहली अगस्त को मेहम में देश की सभी खाप पंचायतों की एक महापंचायत का आयोजन करेंगे," मेवा सिंह ने कहा.

लगता है कि कम से कम हरियाणा में अंतःगोत्र विवाह की बहस एक बड़ी समस्या का रूप धारण करती जा रही है. वहां के मुख्य विपक्षी दल ने सत्तारूढ़ कांग्रेस पार्टी से कहा है वह इस विषय पर बहस करने के लिए राज्य विधानसभा का एक विशेष सत्र बुलाए.

इस बीच हरियाणा के मुख्यमंत्री स्वयं भी जातिगत राजनीति की इस नाव पर सवार होने को तैयार हो गये लगते हैं. कुछ समय पहले उन्होंने कहा, "एक ही गोत्र के भीतर विवाह की मनाही हमारे रिवाज़ का हिस्सा है. वह किसी एक ही जाति तक सीमित नहीं है."

रिपोर्ट-- एजेंसियां, राम यादव

संपादन- उज्ज्वल भट्टाचार्य