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खेल

एक कांधे पर टिका ब्राजील का सपना

ब्राजील के कुछ लोगों के लिए राष्ट्रीय फुटबॉल टीम के कोच लुइस फिलिपे स्कोलारी देश के राष्ट्रपति से भी महत्वपूर्ण व्यक्ति हैं, क्योंकि उनके कंधे पर देश का सपना टिका है.

शनिवार को 65 वां जन्मदिन मनाने वाले कोच स्कोलारी देश में फेलिपाओ यानी बिग फेलिपे के नाम से जाने जाते हैं. एक साल पहले वह राष्ट्रीय टीम के कोच बनाए गए. पूरे देश की उम्मीद उन पर और उनकी टीम पर टिकी हुई है कि 2014 वर्ल्ड कप में वह देश को आगे ले जाएंगे. स्कोलारी कहते हैं, "बिलकुल हम वर्ल्ड चैंपियन बनेंगे और 2014 में हेक्साकैंपेआओ यानी छह बार के विश्व चैंपियन भी बनेंगे."

एक साल पहले अगर किसी ब्राजिलियाई से सड़क पर पूछा होता कि ब्राजील के 2014 का फुटबॉल वर्ल्ड कप जीतने के क्या आसार हैं, तो वह या तो निराशा में सिर हिलाता या फिर एक दुखी से भाव के साथ कहता, 'खराब.'

2012 में स्कोलारी सीन में आए. उन्होंने मानो मेनेसेस की जगह ली. मेनेसेस के दौर में टीम विफल तो नहीं थी लेकिन एक अहम सीजन में टीम बड़े खिताब नहीं जीत सकी. उनमें फेलिपाओ की विनम्रता और करिश्मा नहीं था. जब स्कोलारी ने नौकरी शुरू की तो शुरुआती फेरबदल छोटा सा ही था लेकिन धीरे धीरे यह बड़े बदलाव दिखाई देने लगा.

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छह फरवरी से ब्राजील ने 17 दोस्ताना मैच और कंफेडरेशन कप के मैच खेले हैं. नतीजा रहा, 11 जीतें, चार ड्रॉ और दो हार और चौथा कंफेडरेशन कप का खिताब. जून में इस जीत के बाद उन्होंने कहा, "हमने फिर सम्मान पा लिया है."

ब्राजील के फुटबॉल फैन्स इतने दीवाने हैं कि मैच के दौरान राष्ट्रीय गीत गाते हैं. यहां फुटबॉल रग रग में बसता है और हर फैन किसी कोच से कम नहीं. ब्राजील के पूर्व राष्ट्रपति लुइस इनासियो लूला दा सिल्वा फुटबॉल के बड़े फैन. उन्होंने भी एक बार कहा था, "हम 19 करोड़ कोच वाले देश हैं.

बाकी कोचों की तरह स्कोलारी भी जानते हैं कि फुटबॉल में जीत ही मायने रखती है और कि हार और जीत एक दूसरे के बहुत नजदीक होते हैं.

कार्लोस डुंगा के नेतृत्व में जब नीदरलैंड्स की टीम ने 2010 दक्षिण अफ्रीका फुटबॉल वर्ल्ड कप में ब्राजील को क्वार्टर फाइनल में हरा दिया तो ब्राजील का सारा जश्न और जोश हवा हो गया और एक चुप्पी फैल गई.

वर्तमान कोच फेलिपाओ रोल मॉडल हैं. क्लब लेवल के मैचों में अक्सर रेफरी उन्हें वापस भेज देते क्योंकि मैच के दौरान अपनी सीट और मैदान के बीच हैरान परेशान होते हैं, चिल्लाते, लड़ते और दौड़ते रहते हैं, उनके हाव भाव बहुत आक्रामक होते हैं.

स्कोलारी 20 टीमों के कोच रह चुके हैं. वह 2003 से पुर्तगाल के प्रशिक्षक थे, उस समय पुर्तगाल फुटबॉल वर्ल्ड कप (2006) के सेमीफाइनल में पहुंचा था. 2008-09 के दौरान वह चेल्सी के कोच थे लेकिन वह लंदन की अपेक्षाएं पूरी नहीं कर सके. साओ पाओलो क्लब पाल्मेरास के साथ वह 1997-2000 और 2010-12 के दौरान रहे लेकिन 2012 में उन्हें निकाल दिया गया.

फेलिपाओ कभी हार नहीं मानते. उनकी कोचिंग स्टाइल फैमिलिया स्कोलारी है, जिसमें टीम एक परिवार की तरह आगे बढ़ती है. जिस दौर में फुटबॉल खिलाड़ियों का ट्रांसफर हजारों लाखों डॉलर्स का होता है, वहीं स्कोलारी जर्मनी के पूर्व कोच सेप हैरबैर्गेर जैसा सोचते हैं, "आपको 11 दोस्तों की तरह होने की जरूरत है." हालांकि वह कोशिश करते हैं कि फैमिलिया स्कोलारी का इस्तेमाल उनकी टीम के लिए नहीं किया जाए.

हाल के महीनों वे अच्छे प्रदर्शन से फैन्स को फिर राष्ट्रीय टीम के समर्थन में खींच लाए हैं. उनकी कोशिश है वर्ल्ड कप जीतने की और इसमें वो निश्चित ही लगे रहेंगे. स्कोलारी कहते हैं, "विश्वास रखो कि 2018 (रूस) में मैं किसी और टीम को कोच कर रहा होउंगा."

एएम/एनआर (डीपीए)