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जर्मन चुनाव

'एंडरसन को भोपाल से भेजना जरूरी था'

कांग्रेस ने मान लिया है कि यूनियन कार्बाइड फैक्ट्री के पूर्व प्रमुख वॉरेन एंडरसन को आननफानन में भोपाल से दिल्ली भेजने का फैसला अर्जुन सिंह सरकार के आदेश पर हुआ. कांग्रेस के मुताबिक और कोई विकल्प ही नहीं बचा था.

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वित्त मंत्री प्रणब मुखर्जी ने वॉरेन एंडरसन को भोपाल से दिल्ली भेजने की जिम्मेदारी सीधे सीधे तत्कालीन मध्य प्रदेश सरकार के कंधों पर डाल दी है. कोलकाता में प्रणब मुखर्जी ने कहा, "अर्जुन सिंह ने उस समय मुख्यमंत्री के तौर पर जो बयान दिया था उसमें स्पष्ट रूप से कहा गया कि भोपाल में कानून व्यवस्था ढह रही है. लोगों में जबरदस्त गुस्सा है और उनके सब्र का पैमाना छलक रहा है. ऐसे में एंडरसन को भोपाल से बाहर भेजना जरूरी हो गया था."

Warren Anderson

इस मामले में तत्कालीन केंद्र सरकार पर भी सवाल उठे हैं लेकिन प्रणब मुखर्जी ने जोर देकर कहा है कि एंडरसन को भोपाल से दिल्ली रवाना करने का निर्णय राज्य सरकार ने ही लिया और इसमें राजीव गांधी सरकार की कोई भूमिका नहीं थी.

प्रणब मुखर्जी के इस बयान के बाद एंडरसन के भोपाल से दिल्ली जाने के सवाल का तो जवाब मिला है लेकिन इस बात पर रहस्य अब भी बना हुआ है कि आखिर किसके आदेश पर एंडरसन को दिल्ली से अमेरिका भेजा गया.

भोपाल गैस कांड पर कुछ ही दिन पहले फैसला आया है जिसमें आठ आरोपियों को दो दो साल कैद की सजा सुनाई गई और इस फैसले में एंडरसन का नाम नहीं था. अदालत के इस फैसले के खिलाफ लोगों में बहुत गुस्सा है.

फैसला आने के बाद से ही कांग्रेस पर इस सवाल का जवाब देने का दबाव है जहरीली गैस के रिसाव के पांच दिन बाद 7 दिसंबर 1984 को एंडरसन को गिरफ्तार करने के बाद रिहा क्यों कर दिया गया. भोपाल गैस कांड में हजारों लोगों की मौत हो गई थी.

भोपाल के पूर्व जिलाधिकारी मोती सिंह ने कहा है कि एंडरसन को 7 दिसंबर 1984 को दोपहर 2 बजे गिरफ्तार किया गया था और मुख्य सचिव का फोन आने के बाद उन्हें उसी दिन जमानत पर रिहा कर दिया गया. मोती सिंह के मुताबिक वॉरेन एंडरसन को राज्य सरकार के विमान से दिल्ली भेजा गया था.

वित्त मंत्री के मुताबिक भारत अमेरिका से वॉरेन एंडरसन के प्रत्यर्पण की फिर मांग करने पर विचार कर रहा है. "हम एंडरसन के प्रत्यर्पण की संभावनाओं पर विचार करेंगे लेकिन हम कोर्ट के फैसले पर टिप्पणी नहीं कर सकते. हम फैसले के खिलाफ अपील करने पर भी विचार कर रहे हैं."

रिपोर्ट: एजेंसियां/एस गौड़

संपादन: एन रंजन

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