एंटी हैकरों की कमी | विज्ञान | DW | 14.10.2013
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विज्ञान

एंटी हैकरों की कमी

आम जीवन में जैसे जैसे कंप्यूटरों का चलन और उस पर निर्भरता बढ़ रही है, हैकरों के हमले भी बढ़ रहे हैं. इन हमलों का सामना कर रही सरकारों और कंपनियों के सामने चुनौती साइबर हमलों को रोकने के लिए सही योद्धा के चुनाव की है.

जासूसों, तोड़ फोड़ करने वालों, प्रतिद्वंद्वियों और अपराधियों की दुश्मनी वाली गतिविधियों ने कॉरपोरेट जगत की रक्षा के उद्योग को जन्म दिया है, जो सरकारी साइबर प्रतिभाओं को भी अपनी ओर खींच रहा है. अमेरिकी सेना में 4000 नए लोगों की भर्ती के साथ साइबर कमांड के 2015 तक चौगुना बढ़ने की उम्मीद की जा रही है, जबकि ब्रिटेन ने पिछले ही महीने एक नया ज्वाइंट साइबर रिजर्व बनाने की घोषणा की है. ब्राजील से इंडोनेशिया तक इस तरह की टुकड़ियां बनाई जा रही हैं.

इस तरह के विशेषज्ञों की मांग उससे कहीं ज्यादा है जितने इस तरह का काम करने का काबिलियत रखते हैं. इसकी वजह से लोगों की भारी कमी होती जा रही है, क्योंकि प्रतिद्वंद्वी ऊंची तनख्वाह देकर कर्मचारियों को भगा ले जाते हैं. अमेरिका के राष्ट्रपति कार्यालय में 2011-12 में साइबर सुरक्षा के प्रभारी रहे क्रिस फिनान कहते हैं, "किसी भी दूसरी चीज की तरह मामला मानवीय पूंजी का है, और वह पर्याप्त नहीं है." लोग अपने काम का चुनाव करते समय ऊंची तनख्वाह, लाइफ स्टाइल और हस्तक्षेप न करने वाली नौकरशाही की उम्मीद करते हैं, लेकिन ऐसा कुछ सरकार में पाना मुश्किल है.

साइबर हमले बहुत महंगे होते हैं. ब्रिटिश सुरक्षा एजेंसी के अनुसार लंदन में रजिस्टर्ड एक कंपनी को कुछ साल पहले साइबर हमले में 80 करोड़ पाउंड का नुकसान हुआ. वाशिंगटन स्थित सेंटर फॉर स्ट्रैटेजिक एंड इंटरनेशनल स्टडीज के अनुसार दुनिया भर में साइबर हमलों से 80 से 400 अरब डॉलर का सालाना नुकसान होता है. हमले कई प्रकार के होते हैं. कुछ में तो सिर्फ धन ट्रांसफर किया जाता है, लेकिन अक्सर ग्राहकों के क्रेडिट कार्डों की सूचनाएं चुरा ली जाती है. इसके अलावा बौद्धिक संपदा या कारोबार के लिए संवेदनशील जानकारी की भी चोरी होती है.

अधिकतर साइबर विशेषज्ञ निजी कंपनियों में सक्रिय हैं जहां सुरक्षा और सेवा उत्पादों पर खर्च तेजी से बढ़ा है. हैकिंग का खतरा कितना ज्यादा है, इस आधार पर कंपनियां टैलेंट खरीद रही हैं. गूगल 129 आईटी सिक्योरिटी जॉब्स का विज्ञापन देने वाला है. जबकि लॉकहीड मार्टिन कॉर्प और बीएई सिस्टम जैसी रक्षा कंपनियां इसके लिए लोग ढूंढ रही है. एंटी वायरस बनाने वाली कंपनी सिमैंटेक कॉर्प का काम भी बढ़िया चल रहा है.

अमेरिका के श्रम सांख्यिकी कार्यालय का कहना है कि 2020 के दशक में आईटी सिक्योरिटी की भूमिका 22 फीसदी बढ़ेगी यानी 65,000 नई नौकरियां. अच्छी कंप्यूटर दिग्री के साथ छात्रों को एक लाख डॉलर वार्षिक या फिर इसके आस पास की तनख्वाह मिल सकती है. अगर अमेरिका की राष्ट्रीय सुरक्षा एजेंसी ऐसी कोई नौकरी दे, तो यह कई गुना ज्यादा भी सकती है. पश्चिमी देशों की यूनिवर्सिटियां जरूरी कंप्यूटर विशेषज्ञता में पीछे हैं. छात्रों की अक्सर शिकायत होती है कि अधिकतर कोर्स बहुत सैद्धांतिक हैं.

वॉशिंगटन के गैर सरकारी संस्थान सांस के संस्थापक एलेन पैलर का कहना है कि भले ही किसी के पास कंप्यूटर डिग्री नहीं हो लेकिन वह सॉफ्टवेयर में कमियों. वायरस, रिवर्स इंजीनियरिंग कंप्यूटर वायरस ढूंढ सके तो भी काफी है. सांस इलिनॉयस, मैसेचुसेट्स, न्यू जर्सी में हैकिंग कॉन्टेस्ट प्रायोजित कर रहा है ताकि एक्सपर्ट ढूंढे जा सकें. पश्चिम के सुरक्षा अधिकारियों का मानना है कि रूस, चीन और इरान, उत्तर कोरिया दूसरी उभरती साइबर ताकतों ने हैकर अपराधियों के साथ समझौता कर लिया है कि वे साइबर हमलों में अपनी विशेषज्ञता दें.

एएम/एनआर (एएफपी)

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