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विज्ञान

एंटीबायोटिक्स को बेअसर करती खाद

रिसर्चरों को पता चला है कि गाय की खाद से ऐसे कई एंटीबायोटिक प्रतिरोधी जीन्स मिट्टी में उगने वाली सब्जियों में पहुंच जाते हैं. ये जीन हमारे खाने में पहुंच कर शरीर को कई एंटीबायोटिक दवाओं के लिए बेअसर बना रहे हैं.

इंसान ने सभ्यता की शुरूआत से ही पशु पालन किया है. आजकल गाय जैसे कई जानवरों को जल्दी से जल्दी बड़ा करने और बीमारियों से बचाने के लिए लगातार छोटी मात्रा में एंटीबायोटिक दवाइयों के डोज दिए जाते हैं. इन्हीं गायों के गोबर से बनी खाद का इस्तेमाल भी सदियों से खेतों को और उपजाऊ बनाने में होता आया है. अब पता चला है कि सिर्फ मांस खाने से ही नहीं, गाय के गोबर से बनी खाद में भी ये प्रतिरोधक पहुंच जाते हैं और जमीन से होते हुए इंसान के शरीर में भी. अमेरिका में की गई एक नई स्टडी में पाया गया है कि इन खेतों में उगाई गई सब्जियों में खाद से कुछ गुण आ जाते हैं. खाद में कई ऐसे जीन होते हैं जो इंसान के शरीर में पहुंच कर उसे एंटीबायोटिक्स के लिए और प्रतिरोधक बना सकते हैं. इसके कारण शरीर पर एंटीबायोटिक्स का असर कम हो जाएगा.

सन् 1928 में जब जब अलेक्सेंडर फ्लेमिंग ने पहली एंटीबायोटिक दवाई पेन्सिलीन का अविष्कार किया तब वह विज्ञान की दुनिया में क्रांतिकारी कदम था. वह पहला रसायन था जिससे बैक्टीरिया के संक्रमण से लड़ा जा सकता था. दवाई खा खा कर बैक्टीरिया ऐसा ताकतवर हुआ कि हमारी नाक में दम कर रहा है. समय बीतने के साथ साथ बैक्टीरिया पर एंटीबायोटिक दवाओं के लगातार इस्तेमाल के कारण असर कम हो गया. इसी के कारण सुपरबग या महाकीटाणु बनने लगे. ये सुपर बग एक एन्जाइम है जिसके किसी बैक्टीरिया के साथ आने से उस पर एंटीबायोटिक्स दवाओं का असर नहीं होता.

इस तरह के विशेष गुणों वाले जीन गाय की आंतों में रहने वाले बैक्टीरिया से आते हैं. वैसे तो अभी तक ऐसा कोई जीन उन सुपरबग में नहीं मिला है जो इंसानों को संक्रमित कर रहे हैं लेकिन रिसर्चरों का मानना है कि इसका खतरा बना हुआ है. येल यूनिवर्सिटी के रिसर्चरों ने इस स्टडी के लिए कनेक्टिकट की एक डेयरी की गायों के खाद के सैंपल इकट्ठे किए. उन सेंपलों में वैज्ञानिकों को करीब 80 अलग अलग तरह के एंटीबायोटिक प्रतिरोधी जीन्स मिले. इनमें से तीन चौथाई जीन्स ऐसे हैं जिनके बारे में अभी ज्यादा जानकारी नहीं है.

इन जीन्स को लैब में जब ई. कोलाई नाम के एक बैक्टीरिया के साथ मिलाया गया तो इस जीन ने बैक्टीरिया को पेन्सिलीन और टेट्रासाइक्लिन जैसी कई प्रचलित एंटीबायोटिक्स के लिए प्रतिरोधी बना दिया. सिर्फ चार गायों से इकट्ठे किए गए सैंपल में इतने सारे एंटीबायोटिक्स के लिए प्रतिरोधी बनाने वाले जीन्स के मिलने से रिसर्चर हैरान हैं. लेकिन गायों से मिले ऐसे जीन्स की संख्या अब भी मुर्गियों से मिले ऐसे जीनों से कम है. आमतौर पर मुर्गी के चूजों को जल्दी जल्दी बड़ा करने के लिए गायों के मुकाबले चार गुना ज्यादा एंटीबायोटिक्स दिए जाते हैं.

'एमबायो' नामके प्रकाशन में छपी इस स्टडी से जुड़े येल यूनिवर्सिटी के माइक्रोबायोलॉजिस्ट जो हैंडल्समैन बताते हैं, "इतने छोटे से सैंपल साइज में हमें जितने तरह के जीन्स मिले वह अपने आप में उल्लेखनीय है." रिसर्चरों का मानना है कि इस विषय के कई और पहलुओं पर शोध की जरूरत है. पता लगाना होगा कि गाय के खाद में ऐसे कितने एंटीबायोटिक्स प्रतिरोधी जीन्स हैं जो खाद से मिट्टी, मिट्टी से उसमें उगने वाली चीजों और उससे हमारे खाने की प्लेट तक पहुंच सकते हैं.

आरआर/एएम (एएफपी)