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विज्ञान

ऊंटों से इंसानों में आया एमईआरएस वायरस

शोधकर्ताओं ने कहा है कि उन्हें इस बात के सीधे सबूत मिल गए हैं जिससे यह पता चलता है कि जानलेवा मिडल ईस्ट रेस्पिरेटरी सिंड्रोम वारयस ऊंटों से इंसानों तक फैला है.

सऊदी अरब पर मिडल ईस्ट रेस्पिरेटरी सिंड्रोम वारयस या एमईआरएस का सबसे ज्यादा कहर टूटा है. सऊदी स्वास्थ्य मंत्रालय के ताजा आंकड़ों के मुताबिक 688 संक्रमित लोगों में से 282 लोगों को इस वायरस के कारण अपनी जान गंवानी पड़ी है. सऊदी अरब और संयुक्त अरब अमीरात में एमईआरएस की चपेट में आने वाले यात्रियों के कारण वायरस यूरोप, एशिया और उत्तरी अमेरिका तक फैल चुका है. न्यू इंग्लैंड के जर्नल ऑफ मेडिसिन में छपा ताजा शोध 44 वर्षीय सऊदी नागरिक पर केंद्रित है. इस शख्स के पास 9 ऊंटों का झुंड था और उसकी मौत पिछले साल नवंबर में हुई थी.

उसके दोस्तों का कहना है कि उन्होंने उसे बीमार ऊंट की नाक में दवाई लगाते देखा था. उस शख्स के चार ऊंटों को नाक बहने की शिकायत थी. मौत के हफ्ते भर पहले उस शख्स पर एमईआरएस वायरस का हमला हुआ. बीमार ऊंट में पाए गए वायरस और जिस वायरस के कारण उस शख्स की मौत हुई थी उसको मिलान करने से शोधकर्ताओं ने पाया कि दोनों का जीनोम समान हैं.

जेद्दाह में किंग अब्दुल अजीज यूनिवर्सिटी के मेडिसिन विभाग के तारीक मदनी के मुताबिक, "इन आंकड़ों से यह सुझाव मिलता है संक्रमित जानवर के संपर्क में आने के बाद इंसान जानलेवा एमईआरएस की चपेट में आया."

पुराने शोधों से यह पता चलता है कि यह वायरस ऊंटों में करीब 20 सालों से पाया जाता है और अब यह इंसानों तक पहुंचने की कोशिश में है. न्यू यॉर्क में कोलंबिया यूनिवर्सिटी में संक्रमण और प्रतिरक्षण केंद्र के निदेशक डब्ल्यू इयान लिपकिन के मुताबिक, "हालांकि अन्य शोध से पता चला है कि गर्म इलाकों में पाए जाने वाले ऊंट एमईआरएस कोरोनावायरस के महत्वपूर्ण कुंड हो सकते हैं. अजहर और उनके साथियों का यह शोध स्पष्ट सबूत देता है कि ऊंट से इंसानों तक वायरस का फैलाव हो रहा है."

यह वायरस सीवियर एक्यूट रेस्पिरेटरी सिन्ड्रोम (सार्स) से जुड़ा हुआ है. यह 10 साल पहले पूर्वी एशिया में सामने आया था. तब इस वायरस का संक्रमण पशुओं से इंसानों में हुआ था और इसके कारण 800 से ज्यादा लोगों की जान गई. सार्स की तरह एमईआरएस में फेफड़ों का इनफेक्शन होता है. इसके शुरुआती लक्षण फ्लू जैसे होते हैं. जिसमें बुखार, थकान, कफ, गला खराब जैसे सामान्य लक्षण होते हैं. इसका सामान्य लक्षण है 38 डिग्री (100 डिग्री फॉरेनहाइट) के ऊपर बुखार. बाद में सांस लेने में मुश्किल हो सकती है. एमईआरएस के कारण गुर्दा तुरंत नाकाम हो जाता है.

एए/ओएसजे (एएफपी)

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